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  • लालकिले की दर्दभरी दास्तां-225 : लाल किला क्रांति की देवी को शौर्य-रक्त का अर्पण नहीं कर सका!

     01.01.1970

  • लालकिले की दर्दभरी दास्तां-224 : वीर सावरकर ने कहा यह विद्रोह नहीं, भारत का प्रथम स्वातंत्र्य समर था

     01.01.1970

  • लालकिले की दर्दभरी दास्तां-223 : अंग्रेजों का आरोप था कि लाल किला फिर से भारत पर शासन करना चाहता था!

     01.01.1970

  • लालकिले की दर्दभरी दास्तां-222 : चांद सी सूरत वाली औरतें फटे पाजामे पहनकर सड़कों पर घूम रही थीं !

     01.01.1970

  • लाल किले की दर्द भरी दास्तां - 221 : दिल्ली से मुगलों का नामोनिशान मिटा देना चाहते थे अंग्रेज!

     01.01.1970

  • लालकिले की दर्दभरी दास्तां-220 : जॉन लॉरेंस ने लाल किले को अदृश्य होने से बचा लिया!

     01.01.1970

  • लालकिले की दर्दभरी दास्तां-219 : ब्रिटेन के लॉर्ड्स चाहते थे कि दिल्ली को नक्शे से मिटा दिया जाए!

     01.01.1970

  • लालकिले की दर्दभरी दास्तां-218 : जो मुगल घोड़ों पर चढ़कर आए थे, बैलगाड़ी में लादकर बर्मा भेज दिए गए!

     01.01.1970

  • लाल किले की दर्द भरी दास्तां - 217 : लाल किले ने अपने एक और बादशाह को बेइज्जत होते हुए देखा!

     01.01.1970

  • लाल किले की दर्द भरी दास्तां - 216 : बहादुरशाह जफर ने कहा कि मैं रानी विक्टोरिया की प्रजा नहीं हूँ!

     01.01.1970

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