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सूर्य नगरी जोधपुर

Author : Dr. Mohanlal Gupta
Rajasthani Granthagar Jodhpur
( customer reviews)
150 150
Category:
Book Type: Hard Copy
Size: 104 pages
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Language

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पंद्रहवीं शताब्दी में बसी जोधपुर नगरी, इक्कीसवीं सदी के आते-आते कई बार बदली। घाटू पत्थर की मरुस्थलीय सरचनाएं विलुप्त हुईं और छीतर तथा ग्रेनाइट की चमकती-दमकती कॉलोनियां प्रकट हुईं। तालाब और बावडि़यां अदृश्य हुए तथा जलदाय विभाग के नल विस्तृत हुए। अभेद्य मध्ययुगीन नगरप्राचीर निःशेष हुई और भग्न प्रवेशद्वार ही उसकी गौरवमयी गाथा कहने को शेष बचे। देवालयों के देवता बदल गये, उनकी पूजा के विधि-विधान बदल गये। घरों के बाहर थपे मेहंदी के हाथ बदल गये। सेठों और सामंतों के दरवाजों पर झूमने वाले हाथियों के झुण्ड थककर सो गये। रूपमद से दमदमाती नृत्यांगनाओं के घुंघरू भी कहीं खो गये। चौबीसों घण्टे नंगी तलवारें लिये, बड़ी-बड़ी मूंछों वाले सिपाहियों की जगह राइफलधारी गार्ड आ गये। राजाओं के घोड़ों, रानियों की पालकियों और अंग्रेज हाकिमों की टमटमों के स्थान पर कारों के बेड़े आ गये। इतना कुछ बदल जाने पर भी सूर्यनगरी का वैभव अमर है। नगर में स्थित विविध सरंचनाएं इस वैभव की अमरगाथा कहती हैं। भारत की स्वतंत्रता प्राप्ति के समय यह नगर, देश की तीसरी सबसे बड़ी रियासत की राजधानी था। इसे देखने के लिये यूरोप भर से पर्यटक आते थे, वह सिलसिला आज भी विद्यमान है। यह पुस्तक, भारतीय पर्यटकों को उसी कालजयी वैभव के दर्शन करने में सहायता करती है। यह एक ऐसी पुस्तक है जिसे पढ़ना आरम्भ करने के बाद आप बीच में छोड़ना नहीं चाहेंगे।

डॉ. मोहनलाल गुप्ता आधुनिक युग के बहुचर्चित एवं प्रशंसित लेखकों में अलग पहचान रखते हैं। उनकी लेखनी से लगभग दस दर्जन पुस्तकें निृःसृत हुई हैं जिनमें से अधिकांश पुस्तकों के कई-कई संस्करण प्रकाशित हुए हैं। डॉ. गुप्ता हिन्दी साहित्य के जाने-माने व्यंग्यकार, कहानीकार, उपन्यासकार एवं नाट्यलेखक हैं। यही कारण है कि उनकी सैंकड़ों रचनाएं मराठी, तेलुगु आदि भाषाओं में अनूदित एवं प्रकाशित हुईं। इतिहास के क्षेत्र में उनका योगदान उन्हें वर्तमान युग के इतिहासकारों में विशिष्ट स्थान देता है। वे पहले ऐसे लेखक हैं जिन्होंने राजस्थान के समस्त जिलों के राजनैतिक इतिहास के साथ-साथ सांस्कृतिक इतिहास को सात खण्डों में लिखा तथा उसे विस्मृत होने से बचाया। इस कार्य को विपुल प्रसिद्धि मिली। इस कारण इन ग्रंथों के अब तक कई संस्करण प्रकाशित हो चुके हैं तथा लगातार पुनर्मुद्रित हो रहे हैं। डॉ. मोहनलाल गुप्ता ने भारत के विशद् इतिहास का तीन खण्डों में पुनर्लेखन किया तथा वे गहन गंभीर तथ्य जो विभिन्न कारणों से इतिहासकारों द्वारा जानबूझ कर तोड़-मरोड़कर प्रस्तुत किए जाते रहे थे, उन्हें पूरी सच्चाई के साथ लेखनीबद्ध किया एवं भारतीय इतिहास को उसके समग्र रूप में प्रस्तुत किया। भारत के विश्वविद्यालयों में डॉ. गुप्ता के इतिहास ग्रंथ विशेष रूप से पसंद किए जा रहे हैं। इन ग्रंथों का भी पुनमुर्द्रण लगातार जारी है। राष्ट्रीय ऐतिहासिक चरित्रों यथा- अब्दुर्रहीम खानखाना, क्रांतिकारी केसरीसिंह बारहठ, महाराणा प्रताप, महाराजा सूरजमल,सवाई जयसिंह,भैंरोंसिंह शेखावत, सरदार पटेल तथा राव जोधा आदि पर डॉ. मोहनलाल गुप्ता द्वारा लिखी गई पुस्तकों ने भारत की युवा पीढ़ी को प्रेरणादायी इतिहास नायकों को जानने का अवसर दिया। प्रखर राष्ट्रवादी चिंतन, मखमली शब्दावली और चुटीली भाषा, डॉ. मोहनलाल गुप्ता द्वारा रचित साहित्य एवं इतिहास को गरिमापूर्ण बनाती है। यही कारण है कि उन्हें महाराणा मेवाड़ फाउण्डेशन से लेकर मारवाड़ी साहित्य सम्मेलन मुम्बई, जवाहर कला केन्द्र जयपुर तथा अनेकानेक संस्थाओं द्वारा राष्ट्रीय महत्व के पुरस्कार दिए गए।




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