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राजस्थानी संस्कृति

Author : Prof. (Dr.) Kalyan Singh Shekhawat
Shubhda Prakashan, Jodhpur
( customer reviews)
180 180
Category:
Book Type: Hard Copy
Size: Printed Pages 72
Downloads: 5
Language

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इस पुस्तक में राजस्थान की प्राचीन तथा गौरवपूर्ण संस्कृति का गवेषणात्मक अध्ययन प्रस्तुत किया गया है। राजस्थानी संस्कृति सलिला भारतीय संस्कृति के उद्गमस्थल से निकलकर पल्लवित-पुष्पित हुई है। यहां के राष्ट्रभक्त वीरों तथा वीरांगनाओं ने अपने बलिदान से जिस विश्वविख्यात इतिहास की रचना की है, उसी से यहां सांस्कृतिक परम्परा भी समृद्ध हुई है। राजस्थान का सांस्कृतिक वैभव अद्वितीय है- अनोखा है। यहां का सामाजिक जीवन निराला है जो विविध पर्वों, उत्सवों, त्यौहारों, मेलों के साथ-साथ विभिन्न जातियों, आस्थाओं विश्वासों तथा धर्मों एवं सम्प्रदायों की सीमाओं में विभाजित होकर भी समन्वय समरसता और बन्धुत्व भाव का उदाहरण बना हुआ है। आन, मान, मर्यादा का पोषक यहां का जन लौकिक जीवन में उच्च आदर्शों तथा मानव मूल्यों का निर्वहन करता है। राजस्थान का विविध प्रकार का स्थापत्य, ललित कलाएं, संगीत गायन, नृत्य एवं साहित्य अद्भुत है। भौगोलिक दृष्टि से राजस्थान मरुभूमि कहलाती है किंतु सांस्कृतिक दृष्टि से यह वसुन्धरा वैभवयुक्त है। यह कृति विश्वास और वैविध्य पूर्ण संस्कृति का कीर्तिमान है। इस पुस्तक में राजस्थानी की संस्कृति के विविध पक्षों पर सामग्री दी गई है। आरम्भिक अध्याय संस्कृति का अर्थ, परिभाषा, शास्त्रीय पक्ष, संस्कृति की विशेषताएं, सभ्यता एवं संस्कृति में अंतर, भारतीय संस्कृति पर केन्द्रित हैं। बाद के अध्यायायों में राजस्थानी संस्कृति का परिचय, धर्म और दर्शन, मेले, उत्सव, त्यौहार एवं व्रत, रीति-रिवाज, खान-पान, रहन-सहन, वेश-भूषा, आभूषण, मनोरंजन, आखेट, चौपड़, खेलकूद, राजस्थानी कला परम्परा, स्थापत्य, नगर स्थापत्य, दुर्ग स्थापत्य, मंदिर स्थापत्य, जल स्थापत्य, आवास स्थापत्य, मूर्ति स्थापत्य, चित्रकाला की मेवाड़ शैली, मारवाड़ शैली, किशनगढ़ शैली, हाड़ौती शैली, ढूंढाड़ शैली, संगीत एवं नृत्य परम्परा, गायन शैलियां, विभिन्न वाद्ययंत्र तथा शास्त्रीय एवं लौकिक संगीत परम्परा आदि विषयों को लिखा गया है। कुल 72 पृष्ठों में समाहित यह पुस्तक हार्डबाउण्ड कलेवर में उपलब्ध है।

राजस्थानी भाषा के उद्भट् विद्वान प्रोफेसर (डॉ.) कल्याणसिंह शेखावत का जन्म 7 जुलाई 1942 को हुआ। आप जयनारायण विश्वविद्यालय जोधपुर के कला, शिक्षा, एवं समाज विज्ञान संकाय के पूर्व अधिष्ठाता हैं तथा राजस्थानी विभाग के संस्थापक प्रोफेसर हैं। अपकी अब तक दो दर्जन से अधिक पुस्तकें प्रकाशित हुई हैं। मीराँबाई पर आपने जो महत्वपूर्ण शोध कार्य किया है, उसके परिणाम स्वरूप मीराँबाई के बहुत से ज्ञात एवं अज्ञात पदों को उनके शुद्ध स्वरूप में लाया जाना सम्भव हो सका है।
आपके लिखे हिन्दी भाषा के ग्रंथों में मीराँबाई का जीवनवृत्त एवं काव्य (1978), मीराँ वृहत्पदावली (द्वितीय भाग-1975), मीराँ ग्रंथावली (भाग-1 एवं 2 - 2001), मीराँ वाणी (1984), राजस्थानी भाषा एवं साहित्य (2003), वीरवर राव जयमल (मोनोग्राफ- 2003), मीराँबाई का ऐतिहासिक एवं प्रामाणिक जीवनवृत्त (2013) सम्मिलित हैं।
आपके लिखे राजस्थानी भाषा के ग्रंथों में राजस्थानी निबंध (साहित्यिक निबंध संग्रह-1981), मणिमाळ (मौलिक निबंध संग्रह-1995), राजस्थानी साहित्य- छंद एवं अलंकार (पाठ्य पुस्तक), नारायणसिंह भाटी (मोनोग्राफ-2005), विरासत (चिंतन प्रधान मौलिक निबंध-2005), गढ री सीख (सांस्कृतिक आलेख-2006), रस कळस (निबंध संग्रह-2006) सम्मिलित हैं।
आपके द्वारा सम्पादित ग्रंथों में राजस्थानी गद्य संकलन (1977), राजस्थानी काव्य संकलन (1977), रामकथा (राजस्थानी भाषा की प्राचीन गद्य रचना-1982), तेजा लोक काव्य (1982), कूंपळ (1982), राजस्थानी की प्रतिनिधि कहानियां (1984), गुरांसा री ख्यात (ऐतिहासिक ग्रंथ-2000), गिरधर अनुरागी मीराँ-2010) सम्मिलित हैं।
आपको राजस्थान रत्नाकर दिल्ली द्वारा सम्मानित किया गया। मीराँ स्मृति संस्थान चित्तौड़गढ़ द्वारा सार्वनिक अभिनंदन कर रजतपत्र दिया गया। आप भारतीय साहित्य संगम नई दिल्ली द्वारा साहित्य वागीश की मानद उपाधि से सम्मानित किये गये। मीराँ कला केन्द्र उदयपुर द्वारा आयोजित मीराँ समारोह पर आपको सम्मानित किया गया। राजस्थान सरकार की ओर से जिला प्रशासन जोधपुर द्वारा सम्मानित किया गया। वीर दुर्गादास राठौड़ स्मृति समिति जोधपुर द्वारा साहित्य सेवा के लिये सम्मानित किया गया। राजस्थानी भाषा, साहित्य एवं संस्कृति अकादमी, बीकानेर द्वारा राजस्थानी भाषा के उन्नयन एवं संवर्धन हेतु सम्मानित किया गया। आप मीराँ सम्मान एवं पुरस्कार से पुरस्कृत हैं। महाराजा जोधपुर द्वारा हाथी सिरोपाव से सम्मानित किया गया तथा मेहरानगढ़ म्यूजियम ट्रस्ट जोधपुर द्वारा मारवाड़ रत्न सम्मान 2011 से सम्मानित किया गया। आपने वर्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय कोटा के दो प्रमाणपत्र पाठ्यक्रमों, बी. ए. तथा एम. ए. पाठ्यक्रमों के लिये 16 पुस्तकों का सम्पादन एवं संयोजन किया है।
सम्पर्क: शिवगंगा, 15, सुभाषचंद्र बोस कॉलोनी, रक्षा प्रयोगशाला मार्ग, रातानाडा, जोधपुर- 342001, मोबाइल फोन: 0 93147 10732




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