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राजस्थान में पयर्टन स्थलों का प्रबन्धन तथा लोककलाओं का संरक्षण

Author : Dr. Mohanlal Gupta
Shubhda Prakashan, Jodhpur
( customer reviews)
450 405
Category:
Book Type: Hard Copy
Size: 240 pages
Downloads: 1
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राजस्थान में मांगणियार, लंगा, दमामी, संपेरा, भाण्ड आदि अनेक ऐसे जातीय समुदाय निवास करते हैं जिनकी आजीविका लोककलाओं के प्रदर्शन पर निर्भर है। समाज का बहुत बड़ा वर्ग चाक्षुष कलाओं से जुड़ा हुआ है। जुलाहा, कंसारा, कुंभकार, हस्तशिल्पिी, मूर्तिकार, चित्रकार आदि लोककलाकारों द्वारा निर्मित कलाकृतियां, हस्तशिल्प, मूर्तियां, चित्र, आभूषण एवं वस्त्र आदि देशी-विदेशी पर्यटकों के लिए बहुत बडे़ आकर्षण हैं। पर्यटकों द्वारा की जाने वाली खरीददारी से ही इन कलाकारों की आजीविका का प्रबन्ध होता है। इसलिए यह आवश्यक हो जाता है कि देशी एवं विदेशी पर्यटकों का प्रवाह राज्य में बने रहने के लिए पर्यटन स्थलों का संरक्षण एवं विकास हो, साथ ही राज्य की लोककलाओं एवं उनसे सम्बद्ध कलाकारों के संरक्षण, प्रशिक्षण एवं उन्नयन के लिए भी समुचित प्रबन्धन किया जाए। प्रस्तुत पुस्तक में राजस्थान में पर्यटन स्थलों, लोककलाओं एवं लोककलाकारों के संरक्षण की स्थिति का विवेचन किया गया है। यद्यपि राजस्थान में दूर-दूर तक फैले पर्यटन स्थलों, कलाओं की विविधताओं, लोककलाकारों की समस्याओं और वित्तीय सीमाओं के उपरांत भी पर्यटन क्षेत्र का प्रबन्धन सफलता पूर्वक किया जा रहा है तथापि बहुत कुछ किया जाना शेष है।

डॉ. मोहनलाल गुप्ता आधुनिक युग के बहुचर्चित एवं प्रशंसित लेखकों में अलग पहचान रखते हैं। उनकी लेखनी से लगभग दस दर्जन पुस्तकें निृःसृत हुई हैं जिनमें से अधिकांश पुस्तकों के कई-कई संस्करण प्रकाशित हुए हैं। डॉ. गुप्ता हिन्दी साहित्य के जाने-माने व्यंग्यकार, कहानीकार, उपन्यासकार एवं नाट्यलेखक हैं। यही कारण है कि उनकी सैंकड़ों रचनाएं मराठी, तेलुगु आदि भाषाओं में अनूदित एवं प्रकाशित हुईं। इतिहास के क्षेत्र में उनका योगदान उन्हें वर्तमान युग के इतिहासकारों में विशिष्ट स्थान देता है। वे पहले ऐसे लेखक हैं जिन्होंने राजस्थान के समस्त जिलों के राजनैतिक इतिहास के साथ-साथ सांस्कृतिक इतिहास को सात खण्डों में लिखा तथा उसे विस्मृत होने से बचाया। इस कार्य को विपुल प्रसिद्धि मिली। इस कारण इन ग्रंथों के अब तक कई संस्करण प्रकाशित हो चुके हैं तथा लगातार पुनर्मुद्रित हो रहे हैं। डॉ. मोहनलाल गुप्ता ने भारत के विशद् इतिहास का तीन खण्डों में पुनर्लेखन किया तथा वे गहन गंभीर तथ्य जो विभिन्न कारणों से इतिहासकारों द्वारा जानबूझ कर तोड़-मरोड़कर प्रस्तुत किए जाते रहे थे, उन्हें पूरी सच्चाई के साथ लेखनीबद्ध किया एवं भारतीय इतिहास को उसके समग्र रूप में प्रस्तुत किया। भारत के विश्वविद्यालयों में डॉ. गुप्ता के इतिहास ग्रंथ विशेष रूप से पसंद किए जा रहे हैं। इन ग्रंथों का भी पुनमुर्द्रण लगातार जारी है। राष्ट्रीय ऐतिहासिक चरित्रों यथा- अब्दुर्रहीम खानखाना, क्रांतिकारी केसरीसिंह बारहठ, महाराणा प्रताप, महाराजा सूरजमल,सवाई जयसिंह,भैंरोंसिंह शेखावत, सरदार पटेल तथा राव जोधा आदि पर डॉ. मोहनलाल गुप्ता द्वारा लिखी गई पुस्तकों ने भारत की युवा पीढ़ी को प्रेरणादायी इतिहास नायकों को जानने का अवसर दिया। प्रखर राष्ट्रवादी चिंतन, मखमली शब्दावली और चुटीली भाषा, डॉ. मोहनलाल गुप्ता द्वारा रचित साहित्य एवं इतिहास को गरिमापूर्ण बनाती है। यही कारण है कि उन्हें महाराणा मेवाड़ फाउण्डेशन से लेकर मारवाड़ी साहित्य सम्मेलन मुम्बई, जवाहर कला केन्द्र जयपुर तथा अनेकानेक संस्थाओं द्वारा राष्ट्रीय महत्व के पुरस्कार दिए गए।




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