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राजस्थानी भाषा एवं साहित्य

Author : Prof. (Dr.) Kalyan Singh Shekhawat
Anand Prakashan Jodhpur
( customer reviews)
300 300
Category:
Book Type: Hard Copy
Size: 320 Pages
Downloads: 2
Language

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इस पुस्तक में राजस्थानी भाषा एवं साहित्य का परिचय दिया गया है। 320 पृष्ठों की इस पुस्तक को दो भागों में विभक्त किया गया है। पुस्तक के प्रथम भाग में राजस्थानी भाषा, उसका उद्भव, भाषा के तत्व, विशेषताएं, राजस्थानी भाषा का काव्यरूप, भाषा का मानक स्वरूप, डिंगल एवं पिंगल, राजस्थानी भाषा की वैयाकरिणक विशेषताएं, छंद, अलंकार, काव्य दोष, शब्द सम्पदा, लिपि, विभिन्न बोलियों एवं उपबोलियों का वर्णन किया गया है। पुस्तक के द्वितीय भाग में राजस्थानी साहित्य का मूल्यांकन किया गया है। इस के अंतर्गत राजस्थानी साहित्य की प्रमुख प्रवृत्तियों, विभिन्न काव्य धाराओं, गद्य विधाओं, लोक साहित्य, राजस्थानी के प्रमुख रचनाकारों तथा उनकी प्रमुख रचनाओं का अध्ययन किया गया है। राजस्थानी साहित्य के कालगत विवेचन में आदिकाल, मध्यकाल एवं आधुनिक काल का विवेचन किया गया है। पद्य की प्रमुख विधाओं में छायावाद, प्रगतिवाद, नई कविता, समकालीन कविता, गद्य विधाओं में उपन्यास, कहानी, निबंध, नाटक, एकांकी, डायरी, रिपोर्ताज, संस्मरण, आत्मकथा, रूपक आदि का विवेचन किया गया है। इसका प्रकाशन आनंद प्रकाशन द्वारा किया गया है। पुस्तक के अब तक तीन संस्करण प्रकाशित हो चुके हैं। विश्वविद्यालयी छात्रों के लिए यह एक बहु-उपयोगी पुस्तक है।

राजस्थानी भाषा के उद्भट् विद्वान प्रोफेसर (डॉ.) कल्याणसिंह शेखावत का जन्म 7 जुलाई 1942 को हुआ। आप जयनारायण विश्वविद्यालय जोधपुर के कला, शिक्षा, एवं समाज विज्ञान संकाय के पूर्व अधिष्ठाता हैं तथा राजस्थानी विभाग के संस्थापक प्रोफेसर हैं। अपकी अब तक दो दर्जन से अधिक पुस्तकें प्रकाशित हुई हैं। मीराँबाई पर आपने जो महत्वपूर्ण शोध कार्य किया है, उसके परिणाम स्वरूप मीराँबाई के बहुत से ज्ञात एवं अज्ञात पदों को उनके शुद्ध स्वरूप में लाया जाना सम्भव हो सका है।
आपके लिखे हिन्दी भाषा के ग्रंथों में मीराँबाई का जीवनवृत्त एवं काव्य (1978), मीराँ वृहत्पदावली (द्वितीय भाग-1975), मीराँ ग्रंथावली (भाग-1 एवं 2 - 2001), मीराँ वाणी (1984), राजस्थानी भाषा एवं साहित्य (2003), वीरवर राव जयमल (मोनोग्राफ- 2003), मीराँबाई का ऐतिहासिक एवं प्रामाणिक जीवनवृत्त (2013) सम्मिलित हैं।
आपके लिखे राजस्थानी भाषा के ग्रंथों में राजस्थानी निबंध (साहित्यिक निबंध संग्रह-1981), मणिमाळ (मौलिक निबंध संग्रह-1995), राजस्थानी साहित्य- छंद एवं अलंकार (पाठ्य पुस्तक), नारायणसिंह भाटी (मोनोग्राफ-2005), विरासत (चिंतन प्रधान मौलिक निबंध-2005), गढ री सीख (सांस्कृतिक आलेख-2006), रस कळस (निबंध संग्रह-2006) सम्मिलित हैं।
आपके द्वारा सम्पादित ग्रंथों में राजस्थानी गद्य संकलन (1977), राजस्थानी काव्य संकलन (1977), रामकथा (राजस्थानी भाषा की प्राचीन गद्य रचना-1982), तेजा लोक काव्य (1982), कूंपळ (1982), राजस्थानी की प्रतिनिधि कहानियां (1984), गुरांसा री ख्यात (ऐतिहासिक ग्रंथ-2000), गिरधर अनुरागी मीराँ-2010) सम्मिलित हैं।
आपको राजस्थान रत्नाकर दिल्ली द्वारा सम्मानित किया गया। मीराँ स्मृति संस्थान चित्तौड़गढ़ द्वारा सार्वनिक अभिनंदन कर रजतपत्र दिया गया। आप भारतीय साहित्य संगम नई दिल्ली द्वारा साहित्य वागीश की मानद उपाधि से सम्मानित किये गये। मीराँ कला केन्द्र उदयपुर द्वारा आयोजित मीराँ समारोह पर आपको सम्मानित किया गया। राजस्थान सरकार की ओर से जिला प्रशासन जोधपुर द्वारा सम्मानित किया गया। वीर दुर्गादास राठौड़ स्मृति समिति जोधपुर द्वारा साहित्य सेवा के लिये सम्मानित किया गया। राजस्थानी भाषा, साहित्य एवं संस्कृति अकादमी, बीकानेर द्वारा राजस्थानी भाषा के उन्नयन एवं संवर्धन हेतु सम्मानित किया गया। आप मीराँ सम्मान एवं पुरस्कार से पुरस्कृत हैं। महाराजा जोधपुर द्वारा हाथी सिरोपाव से सम्मानित किया गया तथा मेहरानगढ़ म्यूजियम ट्रस्ट जोधपुर द्वारा मारवाड़ रत्न सम्मान 2011 से सम्मानित किया गया। आपने वर्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय कोटा के दो प्रमाणपत्र पाठ्यक्रमों, बी. ए. तथा एम. ए. पाठ्यक्रमों के लिये 16 पुस्तकों का सम्पादन एवं संयोजन किया है।
सम्पर्क: शिवगंगा, 15, सुभाषचंद्र बोस कॉलोनी, रक्षा प्रयोगशाला मार्ग, रातानाडा, जोधपुर- 342001, मोबाइल फोन: 0 93147 10732




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