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INDIAN LEADERS : CONTEMPORARY OPINIONS

Author : Prof F. K. Kapil
Shubhda Prakashan, Jodhpur
( customer reviews)
30 9
Category:
Book Type: EBook
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Downloads: 3
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The last decade of the 19th Century and first decade of 20th Century witnessed the emergence of a younger group within the Congress which was sharply critical of the methods of the old leadership. The new group came to be called the Extremists while the older one to be referred as Moderates. The credit of leavening Indian polities with this national spirit undoubtedly goes to Bal Gangadhar Tilak. He was the first Indian leader to impress upon the men of learning and light in the country that unless they had the support of the people, they would not attain their objective.34 Tilak clashed with Moderates over the question of social reforms. The controversy over the Anti cow killing movement, the age of consent Bill, the Ganpati and the Shivaji festivals divided the Congress in two groups in Maharashtra, one under Tilak and the other led by K. T. Telang, Mahadev Govind Ranade, Pherozeshah Mehta, Gopal Krishan Gokhale and others.35 Ranade a great social reformer, was the father of public life in Maharashtra. Gandhi declared that he ‘could hardly talk in his presence. - INDIAN LEADERS : COTEMPORARY OPINIONS (1885-1922)

प्रोफेसर एफ. के. कपिल का जन्म जोधपुर के एक पुष्करणा परिवार में हुआ। इनके पूर्वज मूल रूप से पोकरण के थे। इनके पिता श्री गणेशदत्त छंगाणी राजस्थान के प्रशासनिक अधिकारी थे। कपिल ने जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय जोधपुर में 35 वर्ष तक प्राध्यापक का कार्य किया। देशी राज्यों और राजस्थान के इतिहास पर इनकी तीन पुस्तकें प्रकाशित हुई हैं- (1.) राजपूताना स्टेट्स (1817-1950), (2.) प्रिंसली स्टेट्स: पर्सोनेजेज (3.) राजपूताना: जन जागरण से एकीकरण। इनमें देशी राज्यों और ब्रिटिश शासन के नियंत्रण में राजपूताना की जनता के प्रतिरोध का वास्तविक रूप प्रकट किया गया है। इनमें देशी नरेशों की कमियों को भी स्पष्ट किया गया है। प्रोफेसर कपिल ने इतिहास कांग्रेस और राष्ट्रीय संगोष्ठियों में आधुनिक भारतीय इतिहास और राजस्थान के बारे में अनेक शोध पत्र प्रस्तुत किये हैं। इनमें जवाहरलाल नेहरू और अम्बेडकर और अन्य पर समकालीन मत, समाजवाद पर कांग्रेस में अंतर्द्वन्द्व, सरस्वती नदी के प्रवाह क्षेत्र में तीर्थ स्थल, मारवाड़ में वैदिक सरस्वती नदी का प्रवाह, अश्व एवं अश्वारोही: ऐतिहासिक संदर्भ, 1857 में सिंधिया और तात्या टोपे की भूमिका, लोकमान्य तिलक; राष्ट्रीय जागृति के जनक, शास्त्रीय ग्रंथों में परशुराम महिमा, राजस्थान के प्रमुख राज्यों के विलय में दक्षिण भारतीय सहयोग आदि। शोध निर्देशक के रूप में प्रोफेसर कपिल ने अनेक शोध ग्रन्थों में भी सहयोग दिया है।




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