Books Home / History of India/ Ancient History of India/ अश्व एवं अश्वारोही : ऐतिहासिक संदर्भ

अश्व एवं अश्वारोही : ऐतिहासिक संदर्भ

Author : Prof F. K. Kapil
Shubhda Prakashan, Jodhpur
( customer reviews)
25 3
Category:
Book Type: EBook
Size: 547kb
Downloads: 5
Language

Share On Social Media:


To read this book you need to Download the Rajasthan History App on your phone. Available in Android. To purchase this book you have to login first. Please click here for / .

प्रोफेसर एफ. के. कपिल का जन्म जोधपुर के एक पुष्करणा परिवार में हुआ। इनके पूर्वज मूल रूप से पोकरण के थे। इनके पिता श्री गणेशदत्त छंगाणी राजस्थान के प्रशासनिक अधिकारी थे। कपिल ने जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय जोधपुर में 35 वर्ष तक प्राध्यापक का कार्य किया। देशी राज्यों और राजस्थान के इतिहास पर इनकी तीन पुस्तकें प्रकाशित हुई हैं- (1.) राजपूताना स्टेट्स (1817-1950), (2.) प्रिंसली स्टेट्स : पर्सोनेजेज (3.) राजपूताना : जन जागरण से एकीकरण। इनमें देशी राज्यों और ब्रिटिश शासन के नियंत्रण में राजपूताना की जनता के प्रतिरोध का वास्तविक रूप प्रकट किया गया है। इनमें देशी नरेशों की कमियों को भी स्पष्ट किया गया है। प्रोफेसर कपिल ने इतिहास कांग्रेस और राष्ट्रीय संगोष्ठियों में आधुनिक भारतीय इतिहास और राजस्थान के बारे में अनेक शोध पत्र प्रस्तुत किये हैं। इनमें जवाहरलाल नेहरू और अम्बेडकर और अन्य पर समकालीन मत, समाजवाद पर कांग्रेस में अंतर्द्वन्द्व, सरस्वती नदी के प्रवाह क्षेत्र में तीर्थ स्थल, मारवाड़ में वैदिक सरस्वती नदी का प्रवाह, अश्व एवं अश्वारोहीरू ऐतिहासिक संदर्भ, 1857 में सिंधिया और तात्या टोपे की भूमिका, लोकमान्य तिलकय राष्ट्रीय जागृति के जनक, शास्त्रीय ग्रंथों में परशुराम महिमा, राजस्थान के प्रमुख राज्यों के विलय में दक्षिण भारतीय सहयोग आदि। शोध निर्देशक के रूप में प्रोफेसर कपिल ने अनेक शोध ग्रन्थों में भी सहयोग दिया है।

प्रोफेसर एफ. के. कपिल का जन्म जोधपुर के एक पुष्करणा परिवार में हुआ। इनके पूर्वज मूल रूप से पोकरण के थे। इनके पिता श्री गणेशदत्त छंगाणी राजस्थान के प्रशासनिक अधिकारी थे। कपिल ने जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय जोधपुर में 35 वर्ष तक प्राध्यापक का कार्य किया। देशी राज्यों और राजस्थान के इतिहास पर इनकी तीन पुस्तकें प्रकाशित हुई हैं- (1.) राजपूताना स्टेट्स (1817-1950), (2.) प्रिंसली स्टेट्स: पर्सोनेजेज (3.) राजपूताना: जन जागरण से एकीकरण। इनमें देशी राज्यों और ब्रिटिश शासन के नियंत्रण में राजपूताना की जनता के प्रतिरोध का वास्तविक रूप प्रकट किया गया है। इनमें देशी नरेशों की कमियों को भी स्पष्ट किया गया है। प्रोफेसर कपिल ने इतिहास कांग्रेस और राष्ट्रीय संगोष्ठियों में आधुनिक भारतीय इतिहास और राजस्थान के बारे में अनेक शोध पत्र प्रस्तुत किये हैं। इनमें जवाहरलाल नेहरू और अम्बेडकर और अन्य पर समकालीन मत, समाजवाद पर कांग्रेस में अंतर्द्वन्द्व, सरस्वती नदी के प्रवाह क्षेत्र में तीर्थ स्थल, मारवाड़ में वैदिक सरस्वती नदी का प्रवाह, अश्व एवं अश्वारोही: ऐतिहासिक संदर्भ, 1857 में सिंधिया और तात्या टोपे की भूमिका, लोकमान्य तिलक; राष्ट्रीय जागृति के जनक, शास्त्रीय ग्रंथों में परशुराम महिमा, राजस्थान के प्रमुख राज्यों के विलय में दक्षिण भारतीय सहयोग आदि। शोध निर्देशक के रूप में प्रोफेसर कपिल ने अनेक शोध ग्रन्थों में भी सहयोग दिया है।




SIGN IN
Or sign in with
 
×
Forgot Password
×
SIGN UP
Already a user ?
×