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मजनूं का कटोरा

Author : Dr. Mohanlal Gupta
Shubhda Prakashan, Jodhpur
( customer reviews)
25 0
Category:
Book Type: EBook
Size: 455 kb
Downloads: 33
Language

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इस पुस्तक में दो व्यंग्य कहानियां हैं। मजनूं का कटोरा में एक ऐसी लड़की की कहानी है जो व्हाट्स एप पर आने वाले संदेशों को पढ़कर मजनूं से प्रेम करने लगती है और अपने पिता से बगावत करती है किंतु जब उसे ज्ञात होता है कि मजनूं, अपनी लैला के लिये किंचित् भी कष्ट उठाने को तैयार नहीं है और उसने व्हाटसैप तथा फेसबुक पर जो संदेश भेजे थे, वे तो कहीं ओर से आये हुए थे जिन्हें मजनूं, लैला को केवल फॉरवर्ड कर रहा था तो लैला की आंखें खुल जाती हैं और वह मजनूं से विमुख होकर अपने पिता के गले लग जाती है। अंतिम उपदेश ऐसे महात्मा की कहानी है जो यह समझता है कि सद्उपदेश से भेड़ियों को भी अच्छा बनाया जा सकता है। ढोंगी भेड़िये महात्माजी की इस मान्यता का दुरुपयोग करते हैं। महात्माजी चाहते हैं कि जिस प्रकार भेड़ियों पर सदुपदेशों का प्रभाव हुआ है, हरिण शावक भी उनकी इस भावना को समझें किंतु लाख प्रयास करने पर भी हरिण शावक महात्माजी की बात का विश्वास नहीं करते। एक दिन भेड़िये ढोंग छोड़कर सीधे ही महात्माजी पर आक्रमण कर देते हैं तब जाकर महात्माजी को भेड़ियों की सच्चाई का ज्ञान होता है किंतु तब तक बहुत देर हो चुकी होती है। देश की तत्कालीन परिस्थितियों पर पढ़िये आधुनिक समय के प्रसिद्ध व्यंग्यकार डॉ. मोहनलाल गुप्ता के दो व्यंग्य।

डॉ. मोहनलाल गुप्ता आधुनिक युग के बहुचर्चित एवं प्रशंसित लेखकों में अलग पहचान रखते हैं। उनकी लेखनी से लगभग दस दर्जन पुस्तकें निृःसृत हुई हैं जिनमें से अधिकांश पुस्तकों के कई-कई संस्करण प्रकाशित हुए हैं। डॉ. गुप्ता हिन्दी साहित्य के जाने-माने व्यंग्यकार, कहानीकार, उपन्यासकार एवं नाट्यलेखक हैं। यही कारण है कि उनकी सैंकड़ों रचनाएं मराठी, तेलुगु आदि भाषाओं में अनूदित एवं प्रकाशित हुईं। इतिहास के क्षेत्र में उनका योगदान उन्हें वर्तमान युग के इतिहासकारों में विशिष्ट स्थान देता है। वे पहले ऐसे लेखक हैं जिन्होंने राजस्थान के समस्त जिलों के राजनैतिक इतिहास के साथ-साथ सांस्कृतिक इतिहास को सात खण्डों में लिखा तथा उसे विस्मृत होने से बचाया। इस कार्य को विपुल प्रसिद्धि मिली। इस कारण इन ग्रंथों के अब तक कई संस्करण प्रकाशित हो चुके हैं तथा लगातार पुनर्मुद्रित हो रहे हैं। डॉ. मोहनलाल गुप्ता ने भारत के विशद् इतिहास का तीन खण्डों में पुनर्लेखन किया तथा वे गहन गंभीर तथ्य जो विभिन्न कारणों से इतिहासकारों द्वारा जानबूझ कर तोड़-मरोड़कर प्रस्तुत किए जाते रहे थे, उन्हें पूरी सच्चाई के साथ लेखनीबद्ध किया एवं भारतीय इतिहास को उसके समग्र रूप में प्रस्तुत किया। भारत के विश्वविद्यालयों में डॉ. गुप्ता के इतिहास ग्रंथ विशेष रूप से पसंद किए जा रहे हैं। इन ग्रंथों का भी पुनमुर्द्रण लगातार जारी है। राष्ट्रीय ऐतिहासिक चरित्रों यथा- अब्दुर्रहीम खानखाना, क्रांतिकारी केसरीसिंह बारहठ, महाराणा प्रताप, महाराजा सूरजमल,सवाई जयसिंह,भैंरोंसिंह शेखावत, सरदार पटेल तथा राव जोधा आदि पर डॉ. मोहनलाल गुप्ता द्वारा लिखी गई पुस्तकों ने भारत की युवा पीढ़ी को प्रेरणादायी इतिहास नायकों को जानने का अवसर दिया। प्रखर राष्ट्रवादी चिंतन, मखमली शब्दावली और चुटीली भाषा, डॉ. मोहनलाल गुप्ता द्वारा रचित साहित्य एवं इतिहास को गरिमापूर्ण बनाती है। यही कारण है कि उन्हें महाराणा मेवाड़ फाउण्डेशन से लेकर मारवाड़ी साहित्य सम्मेलन मुम्बई, जवाहर कला केन्द्र जयपुर तथा अनेकानेक संस्थाओं द्वारा राष्ट्रीय महत्व के पुरस्कार दिए गए।




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