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  • महान पर्व रक्षा बंधन!

     14.08.2019
     महान पर्व रक्षा बंधन!

     महान पर्व रक्षा बंधन!


    रक्षा बंधन के महान् पर्व पर आप सबका अभिनंदन।

    मैंने इसे महान् पर्व कहा, यह बात केवल कहने भर के लिए नहीं है।

    प्रत्येक भारतीय पर्व महान् है तथा उसमें हमारी शाश्वत संस्कृति की सम्पूर्ण पृष्ठभूमि निहित है। प्रत्येक पर्व अपने आपमें एक सम्पूर्ण संस्कृति है।

    आप इस पर्व की महानता पर किंचित् विचार करें।

    हम कहते हैं कि राष्ट्र को एकता के सूत्र में पिरोए जाने की आवश्यकता है। तो रक्षा बंधन का यह पर्व और क्या है? सम्पूर्ण राष्ट्र को एकता के सूत्र में पिरोने का ही तो उपक्रम है, उसी का तो प्रयास है।

    और ऐसा करते समय कितनी अद्भुत बात है कि हम किसी तरह की जबर्दस्ती नहीं करते, किसी कानून का उपयोग नहीं करते, कोई हथियार नहीं उठाते, कोई युद्ध जीत कर राष्ट्र को एक नहीं करते! कोई संधि नहीं करते। कोई धारा नहीं लगाते। केवल सूत के कच्चे धागे को प्रेम, श्रद्धा और समर्पण के भाव से भिगोकर एक-दूसरे की कलाई पर बांधते हैं और किसी अनजान को भी अपना बना लेते हैं।

    रक्षा बंधन के पर्व की महानता के एक और पक्ष पर बात करें। कच्चे सूत्र का एक धागा प्रेम के जल में सिंचित होकर इतना मजबूत हो जाता है कि उसके बंधन को तोड़ पाना किसी के वश में नहीं रह जाता। यदि एक बार भी किसी अनाजन स्त्री ने किसी भारतीय पुरुष की कलाई पर धागा बांध दिया तो वह स्त्री और वह पुरुश मरते दम तक उस धागे की पवित्रता की रक्षा करते हैं।

    क्या संसार भर में कोई और देश, कोई और संस्कृति कोई और समाज ऐसा है जो सूत के कच्चे धागों को प्रेम, श्रद्धा विश्वास और समर्पण के जल में भिगोकर इतनी मजबूती देने की ताकत रखता है! हम रखते हैं।

    आज यदि देश में बलात्कार लूट और हत्याएं की घटनाएं बढ़ रही हैं तो केवल इसलिए के हमने अपनी नई पीढ़ी को रक्षाबंधन जैसे त्यौहारों का असली अर्थ नहीं बताया है। इस पर्व की भावना जन-जन तक नहीं पहुंचाई है।

    रक्षा बंधन के पर्व की महानता के एक और पक्ष पर बात करते हैं। वह है पॉजिटिविटी। आज पूरी दुनिया में पॉजिटिविटी की बात होती है। रक्षा बंधन के पर्व से अधिक पॉजिटिविटी और क्या होगी? बहिन भाई के लिए मंगल कामना करती है, जीवन के संघर्षों में उसकी विजय की कामना करती है, उसकी दीर्घ आयु होने की कामना करती है, उसके परिवार की सुख वृद्धि की कामना करती है और भाई अपनी बहिन के सिर पर हाथ रखकर कहता है, बहिन तू चिंता मत कर। तेरा जीवन हमेशा खुशियों से भरा रहेगा। यदि तुझे कभी मेरी जरूरत हो तो मैं तुझे जीवन के हर मोड़ पर खड़ा मिलूंगा। मैं तेरे संकट अपने ऊपर ले लूंगा। मैं अपने प्राण देकर भी तेरी और तेरे परिवार की रक्षा करूंगा।

    इस पर्व के एक और पक्ष पर बात करते हैं। भारतीय संस्कृति के समस्त त्यौहार आनंद और हर्ष के त्यौहार हैं, होली हो, दीपावली हो, दहशहरा हो, रक्षा बंधन हो या फिर भगवान को छप्पन भोग लगाने का आयोजन हो, सबमें आनंद मनाया जाता है। किसी प्रकार के शोक की अभिव्यक्ति हमारे किसी त्यौहार में नहीं होती जबकि संसार की अन्य संस्कृतियां शोक के त्यौहार मनाती हैं, अपने पर्वों पर रोती-पीटती हैं। इस दृष्टि से देखें तो भी रक्षा-बंधन का पर्व एक महान् पर्व है


    संसार की किसी भी संस्कृति का कोई भी पर्व रक्षा बंधन जैसी से भारतीय पर्व से तुलना नहीं की जा सकती। आजकल भारतीय पर्वों से मिलते-जुलते पर्व मनाने की परम्पराएं विश्व के अनेक देशों में आरम्भ हो गई हैं। आजकल फ्रेंण्डशिप बेल्ट आती है, इसे पश्चिमी बाजारवाद ने तैयार किया है। वस्तुतः उन्होंने राखी के इसी कच्चे धागे को फ्रेंण्डशिप बेल्ट में बदल कर पैसा कमाने का जरिया बना लिया है।

    भारतीय संस्कृति में रक्षा बंधन को ब्राह्मणों का, दीपावली को वैश्यों का, विजया दशमी को क्षत्रियों का तथा होली को श्रमिक वर्ग का पर्व माना जाता है।

    यदि हम इस बात पर विचार करें कि रक्षा बंधन ब्राह्मणों का पर्व क्यों है, तो भी हमें इस पर्व की महानता के बारे में ज्ञान हो सकता है।

    यजुर्वेद कहता है- वयं राष्ट्रे जागृयाम पुरोहिताः। राष्ट्र जागरण के महान उद्देश्य के लिए ही तो पुरोहित रक्षासूत्र हाथ में लेकर निकलता है और अपने द्वारा मंत्रोच्चार के साथ बांधे गए इस धागे के साथ ही वह राष्ट्र को भी एक सूत्र में बांध डालता है। इसलिए रक्षा बंधन ब्राह्मणों का पर्व है तथा यह भारत के समस्त पर्वों में सबसे महान है।

    ओऽम् शांति।


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