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  • जो करेगा रामजन्म भूमि की सेवा, वही पायेगा यशस्वी होने की मेवा।

     11.10.2017
    जो करेगा रामजन्म भूमि की सेवा, वही पायेगा यशस्वी होने की मेवा।

    मेवाड़ के एक महाराणा अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि को मुक्त करवाने के लिये सशस्त्र संघर्ष हेतु अपनी सेना लेकर अयोध्या गये थे। उस सेवा का परिणाम यह हुआ कि जब राजस्थान बना तो उसके पहले महाराज प्रमुख मेवाड़ के महाराणा बने।

    भारत की स्वतंत्रता से पहले, गीताप्रेस गोरखपुर के संस्थापकों में से एक श्री भाईज

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  • संत-साहित्य में ईश्वरीय विषम व्यवहार का कारण

     14.01.2018
    संत-साहित्य में ईश्वरीय विषम व्यवहार का कारण

    ईश्वर में ना-ना प्रकार के गुण हैं, यदि वे गुण नहीं होते तो इस सृष्टि की रचना संभव नहीं हुई होती। ईश्वर में सृष्टि को उत्पन्न करने, पालन करने तथा उसका संहार करने की जो क्षमता है, उसे भी ईश्वर का गुण समझना चाहिए। इस बात में किसी को शंका नहीं होनी चाहिए कि ईश्वर नाम, रूप, उपाधियों के साथ-सा

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  • भगवद्गीता किसने लिखी ?

     03.09.2018
    भगवद्गीता किसने लिखी ?

    भगवद्गीता किसने लिखी ?


    महाभारत के भीष्मपर्व में 23 से 40वें अध्याय तक गीता के अट्ठारह अध्याय वर्णित हैं। भारतीय जनमानस इस बात को मानता है कि भगवद्गीता मूलतः भगवान श्रीकृष्ण ने अपने सखा अर्जुन को कुरुक्षेत

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  • क्या भगवान शंकराचार्य ने परकाया प्रवेश किया था?

     23.09.2018
    क्या भगवान शंकराचार्य ने परकाया प्रवेश किया था?

    क्या भगवान शंकराचार्य ने परकाया प्रवेश किया था?


    भारतीय जनमानस में यह प्रबल धारणा है कि आदि जगद्गुरु भगवान शंकराचार्य ने परकाया प्रवेश किया था। क्या परकाया प्रवेश संभव है? क्या आज तक किसी ने भी परकाया प्रवेश किया है? क्य

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  • परकाया प्रवेश की वैज्ञानिकता और उसके पौराणिक संदर्भ

     23.09.2018
    परकाया प्रवेश की वैज्ञानिकता और उसके पौराणिक संदर्भ

    परकाया प्रवेश की वैज्ञानिकता और उसके पौराणिक संदर्भ

    भगवान शंकराचार्य के परकाया प्रवेश पर हमारे पिछले ब्लॉग के बाद यह आवश्यकता अनुभव हुई कि परकाया प्रवेश की वैज्ञानिकता तथा उसके पौराणिक सं

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  • सोलहवीं शताब्दी की अद्भुत घटना का नायक है ध्यानू भगत

     23.09.2018
    सोलहवीं शताब्दी की अद्भुत घटना का नायक है ध्यानू भगत

    सोलहवीं शताब्दी की अद्भुत घटना का नायक है ध्यानू भगत


    हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में एक प्राचीन पहाड़ी नगर स्थित है जिसे नगरकोट कहा जाता है। इस नगर में देवी दुर्गा के 51 सिद्धपीठों में से एक सिद्धपीठ स्थि

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  • भगवान श्रीराम की दृष्टि में संत कौन है ?

     16.10.2018
    भगवान श्रीराम की दृष्टि में संत कौन है ?

     भगवान श्रीराम की दृष्टि में संत कौन है ?

    आज भारत भूमि में चारों ओर धूर्त बाबाओं, लालची मठाधीशों और अपने आप को संत कहने वाले मक्कार लोगों की भीड़ है, ऐसे में वास्तविक संत की पहचान करना अत्यंत मुश्किल काम हो जाता है। यही कारण है कि भारत की भो

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  • क्या मृत्यु के समय मनुष्य को कष्ट होता है?

     16.10.2018
     क्या मृत्यु के समय मनुष्य को कष्ट होता है?

     क्या मृत्यु के समय मनुष्य को कष्ट होता है?


    इस संसार में समस्त प्राणी मृत्यु से भयभीत रहते हैं। उनमें से मनुष्य नामक प्राणी, मृत्यु का भय सर्वाधिक अनुभव करता है। जाने कब और किस रूप में मृत्यु आकर प्राणी क

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  • समन्वयवादी परम्परा के प्रवर्तक रामानंद

     26.10.2018
     समन्वयवादी परम्परा के प्रवर्तक रामानंद

    भारतीय धर्म, अध्यात्म एवं दार्शनिक चिंतन में दो प्रबल विरोधी धाराएं एक साथ विद्यमान रही हैं। इनमे से पहली धारा है- धार्मिक कट्टरता एवं दूसरी धारा है- धार्मिक सहिष्णुता।

    एकमात्र अपने ही मत तथा अपने ही इष्ट देव में सर्वोच्च आस्था रखे जाने के कारण भारत वर्ष में ध

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  • रामानंद के अवतरण की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

     26.10.2018
    रामानंद के अवतरण की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

    याज्ञिक कर्मकाण्ड के वैभव पूर्ण आयोजन और कर्मकाण्ड की जटिलता के कारण वैदिक धर्म जनसामान्य की पहुँच से दूर होता चला गया। एक समय ऐसा भी आया जब धर्म केवल राजाओं और श्रेष्ठियों के लिये सुलभ रह गया।

    इस प्रवृत्ति के विरोध में ईसा पूर्व छठी शताब्दी में भगवान बुद्ध न

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