Blogs Home / Blogs / राजस्थानी साहित्य / राजस्थानी कहावतें
  • राजस्थानी कहावतें

     07.06.2017
    राजस्थानी कहावतें

    अणदोखी ने दोख, बीनै गति न मोख।

       भावार्थ- निरपराध पर दोष धरने वाले को न स्वर्ग मिलता है न मोक्ष।

    असाई म्हे असाई म्हारा सगा, बां कै टोपी न म्हारे झगा।

       भावार्थ- निर्धनों के मित्र भी निर्धन ही होते हैं।

    अभागियो टाबर त्यूहार नूं रूसै।

       भावार्थ- मंदभागी व्यक्ति अवसर का लाभ नहीं उठा सकता।

    अंधाधुंध की साहबी, घटाटोप को राज।

       भावार्थ- विवेकहीन शासकों के शासन में अंधकार छा जाता है।

    अक्कल बिना ऊँट उभाणा फिरै।

       भावार्थ- मूर्ख लोग उपहास का पात्र बन जाते हैं।

    अठे किसा काचर खाय है!

       भावार्थ- यहाँ तुझे कौनसा सुख है !

    अठे गुड़ गीलो कोनी।

       भावार्थ- हमें मूर्ख मत समझना।

    अठे ही रेवड़ को रिवाड़ो, अठे ही भेडि़यां री घूरी।

       भावार्थ- यह स्थान सुरक्षित नहीं है।

    अणी चूकी धार मारी।

       भावार्थ- सावधानी हटते ही दुर्घटना हो जाती है।

    अणमिले का सै जती हैं।

       भावार्थ- जब तक बेईमानी का अवसर न मिले, तब तक सब ईमानदार हैं।

    अरडावतां ऊंट लदै।

       भावार्थ- सामर्थ्यवान, दीनों की पुकार नहीं सुनते।

    असी रातां का असा ही तड़का।

       भावार्थ- बुरे कामों के बुरे परिणाम होते हैं।

    आंख कान को च्यार आंगल को फरक है।

       भावार्थ- देखी और सुनी हुई बात में बहुत अंतर होता है।


  • Share On Social Media:
Categories
SIGN IN
Or sign in with
 
×
Forgot Password
×
SIGN UP
Already a user ?
×