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  • राजस्थानी कहावतों में वर्षा एवं अकाल सम्बन्धी भविष्यवाणियाँ

     03.06.2020
    राजस्थानी कहावतों में वर्षा एवं अकाल सम्बन्धी भविष्यवाणियाँ

    हमारी नई वैबसाइट - भारत का इतिहास - www.bharatkaitihas.com

    प्रकृति में घटने वाली घटनाएं बेतरतीब नहीं होतीं। उनके बीच निश्चित क्रम तथा तारतम्य होता है। यही कारण है कि कुछ निश्चित प्राकृतिक घटनाओं का सावधानी पूर्वक अवलोकन करके हम भविष्य में होने वाली प्राकृतिक घटनाओं का अनुमान लगा सकते हैं। ऋतुओं का आवागमन भी प्राकृतिक घटनाएं हैं जिनके बीच निश्चित क्रम तथा तारतम्य है। हजारों साल से मनुष्य इस तारतम्य को देख और समझ रहा है तथा इस संचित ज्ञान को लोकोक्तियों एवं कहावतों में ढालकर एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुंचा रहा है।

    राजस्थानी कहावतों में वर्षा एवं अकाल सम्बन्धी भविष्यवाणियों का भण्डार भरा हुआ है। प्र्राचीन समय में किसान इन कहावतों को ध्यान में रखकर समय रहते ही पता लगा लेते थे कि आने वाली वर्षा ऋतु में वर्षा कितनी होगी तथा फसल कितनी मिलेगी। ग्रामीण अंचलों में आज भी किसानों द्वारा बहुत सी कहावतें कही जाती हैं। इनमें से कुछ कहावतें यहाँ दी जा रही हैं-

    काल केरड़ा सुगाळै बोर: अर्थात् कैर की झाड़ी पर अत्यधिक फल लगें तो वर्षा नहीं होगी, अकाल पड़ेगा एवं बेर की झाडि़यों पर अधिक बेर लगें तो अच्छी वर्षा होने का संकेत है। सुकाल होगा।

    काती रो मेह कटक बराबर: अर्थात् कार्तिक की वर्षा फसल के लिये बहुत हानिकारक है।

    आसोजां में मोती बरसे: अर्थात् आश्विन मास में होने वाली थोड़ी वर्षा भी खेती के लिये मूल्यवान होती है।

    ईसानी बिसानी: अर्थात् ईशान कोण में यदि बिजली चमके तो खेती अच्छी होगी। यह स्वाभाविक भी है क्योंकि राजस्थान में मानसून उत्तर-पूर्व दिशा अर्थात् ईशान कोण से ही प्रवेश करता है।

    चांद छोड़े हिरणी तो लोग छोड़े परणी: अर्थात् अक्षय तृतीया को यदि चन्द्रमा, मृगशिरा से पूर्व अस्त हो जाये तो भीषण अकाल पड़ेगा, जिसमें लोगों को अपनी स्त्रियों को घर पर छोड़कर जीवन निर्वाह के लिये अन्यत्र जाना पड़ेगा।

    बरसे भरणी, छोड़े परणी: अर्थात् यदि भरणी नक्षत्र में वर्षा होवे तो पति अपनी पत्नी को छोड़ भागे अर्थात् उसे कमाने के लिये विदेश जाना पड़ेगा। जे बरसे मघा तो धान रा ढगा: यदि मघा नक्षत्र में वर्षा हो तो अनाज अत्यधिक उत्पन्न होगा।

    जे बरसे उतरा तो धान न खावे कुतरा: यदि उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र में वर्षा हो तो इतना धान होगा कि उसे कुत्ते भी नहीं खायेंगे।

    रोहण रेली तो रुपये की अधेली: अर्थात् यदि रोहिणी नक्षत्र में वर्षा हो तो रुपये की अधेली मिलेगी अर्थात् अकाल पड़ेगा।

    न भीज्यो काकड़ो, तो क्यूं टेरै हाळी लाकड़ो?: अर्थात् हे किसान यदि कर्क संक्रांति के दिन वर्षा न हो तो तुम व्यर्थ ही हल चलाते हो क्योंके कर्क संक्रांति के दिन वर्षा न होने से अकाल पड़ेगा।

    भादरवो गाज्यौ, काळ भाज्यौ: अर्थात् भादों में वर्षा होने पर अकाल भाग जाता है।

    -डॉ. मोहनलाल गुप्ता

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