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  • उच्च कोटि की साहित्यिक रचनाओं से समृद्ध है राजस्थानी भाषा का अलंकृत गद्य

     07.06.2017
    उच्च कोटि की साहित्यिक रचनाओं से  समृद्ध है राजस्थानी भाषा का अलंकृत गद्य

    किसी भी भाषा में साहित्य की रचना प्रायः पद्य विधा से आरम्भ होती है तथा बाद में गद्य विधा को अपनाया जाता है। यही कारण है कि राजस्थानी भाषा में ई.788 में जालोर में उद्योतन सूरि द्वारा रचित ‘कुवलयमाला’ (प्राकृत ग्रंथ) से लेकर, 12वीं शताब्दी ईस्वी में सिरोही में सिंह कवि द्वारा रचित ‘पज्जुन्न कहा’ (अपभ्रंश ग

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  • राजस्थानी कहावतें

     07.06.2017
    राजस्थानी कहावतें

    अणदोखी ने दोख, बीनै गति न मोख।

       भावार्थ- निरपराध पर दोष धरने वाले को न स्वर्ग मिलता है न मोक्ष।

    असाई म्हे असाई म्हारा सगा, बां कै टोपी न म्हारे झगा।

       भावार्थ- निर्धनों के मित्र भी निर्धन ही होते हैं।

    अभागियो टाबर त्यूहार नूं रूसै।

       भावार्थ- मंदभागी व्

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  • राजस्थान के जन मानस में आजादी के गीत, नारे एवं कविताएं

     06.06.2017
    राजस्थान के जन मानस में आजादी के गीत, नारे एवं कविताएं

    पराधीन भारत का राजस्थान देशी रियासतों में बंटा हुआ था। प्रजा, राजाओं के अधीन थी और राजा अंग्रेजों के किंतु अंग्रेजी सत्ता से मुक्ति की चाह राजस्थान के जन मानस में ब्रिटिश भारत से किसी भी तरह कम नहीं रही। स्वतंत्रता सेनानियों, समाज सुधारकों एवं कवियों ने अपने शब्दों से आजादी की अलख जगाई। उनके शब्दों ने आ

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  • राजस्थानी कहावतों में वर्षा एवं अकाल सम्बन्धी भविष्यवाणियाँ

     21.08.2017
    राजस्थानी कहावतों में वर्षा एवं अकाल सम्बन्धी भविष्यवाणियाँ

    प्रकृति में घटने वाली घटनाएं बेतरतीब नहीं होतीं। उनके बीच निश्चित क्रम तथा तारतम्य होता है। यही कारण है कि कुछ निश्चित प्राकृतिक घटनाओं का सावधानी पूर्वक अवलोकन करके हम भविष्य में होने वाली प्राकृतिक घटनाओं का अनुमान लगा सकते हैं। ऋतुओं का आवागमन भी प्राकृतिक घटनाएं हैं जिनके बीच निश्चित क्रम तथा तारत

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  • लुप्त हो गई राजस्थानी प्रेमाख्यानों की परम्परा

     21.08.2017
    लुप्त हो गई राजस्थानी प्रेमाख्यानों की परम्परा

    सम्पूर्ण विश्व प्रतिक्षण प्रेम का अभिलाषी है। यह मनुष्य की आत्मा का सबसे मधुर पेय है। इसके बिना जीवन अपूर्ण है। आदि काल से मनुष्य प्रेम का संधान करता आया है। यही कारण है कि धरती पर विकसित हुई समस्त सभ्यताओं में प्रेमाख्यानों की रचना हुई। राजस्थानी प्रेमाख्यान विश्व साहित्य की अमूल्य धरोहर हैं। कथ्य, तथ्

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  • ख्यातों के बिना अधूरा है मध्यकालीन राजस्थान का इतिहास

     05.06.2018
    ख्यातों के बिना अधूरा है मध्यकालीन राजस्थान का इतिहास

    डिंगल भाषा में लिखे गये ग्रंथ- प्रबंध, ख्यात, वंशावली, वचनिका, गुटके, बेलि, बात, वार्ता, नीसाणी, कुर्सीनामा, झूलणा, झमाल, छप्पय, कवित्त, गीत तथा विगत आदि नामों से प्राप्त होते हैं। डिंगल गद्य को वात, वचनिका, ख्यात, दवावैत, वंशावली, पट्टावली, पीढि़यावली, दफ्तर, विगत एवं हकीकत आदि के रूप में

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