Blogs Home / Blogs / राजस्थान ज्ञान कोष प्रश्नोत्तरी लेखक - डॉ. मोहन लाल गुप्ता / राजस्थान ज्ञानकोश प्रश्नोत्तरी : राजस्थान में गरीबी, पिछड़ापन एवं बेरोजगारी
  • राजस्थान ज्ञानकोश प्रश्नोत्तरी : राजस्थान में गरीबी, पिछड़ापन एवं बेरोजगारी

     07.12.2021
    राजस्थान ज्ञानकोश प्रश्नोत्तरी  : राजस्थान में गरीबी, पिछड़ापन एवं बेरोजगारी

    राजस्थान ज्ञानकोश प्रश्नोत्तरी - 49

    राजस्थान ज्ञानकोश प्रश्नोत्तरी : राजस्थान में गरीबी,

    पिछड़ापन एवं बेरोजगारी

    1.प्रश्न - बीपीएल के चयन हेतु नए मापदण्ड क्या हैं?

    उत्तर - गरीबी की रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले परिवारों को चिह्नित करने के नये मापदण्ड निर्धारित किये गये हैं। 2100 कैलोरी से कम दैनिक उपभोग करने तथा 20 रुपये प्रतिदिन से कम की दैनिक आय वाले व्यक्ति को अब गरीबी की रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाला माना जायेगा। राज्य में अब तक 1992, 1997, 2002 में बीपीएल सर्वे हो चुका है। तीसरे सर्वेक्षण में राज्य में बीपीएल परिवारों की संख्या 18.76 प्रतिशत पाई गई थी। नई परिभाषा के अनुसार राज्य के लगभग एक तिहाई परिवार बीपीएल श्रेणी में आ सकते हैं।

    2.प्रश्न - वाधवा समिति ने किन परिवारों को बीपीएल घोषित करने की सिफारिश की है?

    उत्तर - जस्टिस डी पी वाधवा की अध्यक्षता में कार्यरत, सार्वजनिक वितरण प्रणाली की केन्द्रीय सतर्कता समिति ने अनुशंसा की है कि 60 हजार रुपये वार्षिक आय तक के समस्त परिवारों को बीपीएल के समकक्ष घोषित किया जाये। उन्हें बीपीएल राशन की समस्त योजनाओं का लाभ मिले। 60 हजार तक वार्षिक आय वाले परिवारों का चयन ग्रामसभा करेगी। उसके बाद या तो उसे बीपीएल का कार्ड दिया जायेगा या फिर उसके एपीएल कार्ड पर बीपीएल की छाप लगाई जायेगी। समिति ने यह सिफारिश पूरे देश के लिये की है।

    3.प्रश्न - नेशनल सैम्पल सर्वे ऑर्गेनाइजेशन (एनएसएसओ) द्वारा गरीबी की क्या परिभाषा दी गई है?

    उत्तर - अप्रेल 2012 में दी गई रिपोर्ट के में शहरी क्षेत्र में 2100 कैलोरी तथा ग्रामीण क्षेत्रों में 2400 कैलोरी से कम दैनिक खपत करने वाले को गरीब माना गया है।

    4.प्रश्न - राज्य को विशेष दर्जा क्यों चाहिये?

    उत्तर - राजस्थान में देश की 11 प्रतिशत भूमि, 5.5 प्रतिशत पशुधन एवं 5 प्रतिशत जनसंख्या है जबकि पानी केवल 1 प्रतिशत है। इस कारण राजस्थान की माँग है कि भारत सरकार का योजना आयोग, राजस्थान को विशेष दर्जा दे तथा राज्य को विशेष पैकेज जारी करे। विशेष दर्जा मिलने से राज्य को केन्द्र सरकार से मिलने वाली सहायता में 90 प्रतिशत अनुदान एवं 10 प्रतिशत कर्ज होगा जबकि इस समय केन्द्र से मिलने वाली सहायता 70 प्रतिशत अनुदान एवं 30 प्रतिशत कर्ज के रूप में मिलती है। मुख्यमंत्री की मांग है कि यदि राज्य को विशेष दर्जा दिया जाना संभव न हो तो राजस्थान को बुंदेलखण्ड की तरह पेयजल में विशेष दर्जा दिया जाये तथा राज्य को पेयजल के लिये 51 हजार करोड़ रुपये की विशेष सहायता राशि दी जाये। राज्य में बिजली कम्पनियों द्वारा महंगी दरों पर ऋण लेने से उनकी वित्तीय स्थिति गड़बड़ा गई है इसलिये प्रदेश को पॉवर बॉण्ड जारी करने के लिये अधिकृत किया जाये। विद्युत परियोजनाओं के लिये कोल बॉक्स का विशेष आवंटन किया जाये। मरुक्षेत्रों की सिंचाई के लिये 90 प्रतिशत अनुदान दिया जाये। पूरक पोषाहार की इकाई लागत में कैलोरी नार्म्स के अनुपात में वृद्धि करने और उत्तर मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना के अंतर्गत फण्डिंग पैटर्न में संशोधन किया जाये। केन्द्र सरकार राज्य वचनबद्धता राशि से अधिक होने वाले व्यय की 100 प्रतिशत राशि उपलब्ध करवाने के अतिरिक्त राज्य वचनबद्धता की राशि की 50 प्रतिशत राशि भी वहन करे। शिक्षा का अधिकार अधिनियम को सर्व शिक्षा अभियान में सम्मिलित कर इसका फण्डिंग पैटर्न केन्द्र एवं राज्य के बीच 85 एवं 15 के अनुपात में किया जाये। राजस्थान की विशेष भौगोलिक परिस्थितियों, पाकिस्तान से लगी अन्तर्राष्ट्रीय सीमा और प्रायः पड़ने वाले सूखे एवं अकालों, रेगिस्तानी, पहाड़ी एवं दुर्गम क्षेत्रों में छितराई हुई आबादियों, पिछड़ी बस्तियों एवं पानी की कमी के चलते राजस्थान को भी उत्तर-पूर्व एवं अन्य राज्यों की तरह विशेष राज्य का दर्जा दिया जाना चाहिये। राजस्थान को आजादी के बाद के 62 वर्षों में से 56 वर्षों में सूखे एवं अकाल का सामना करना पड़ा है। राज्य का 60 प्रतिशत क्षेत्रफल रेगिस्तानी है जिसमें 40 प्रतिशत जनसंख्या निवास करती है, 13 प्रतिशत जनसंख्या आदिवासी है तथा 1040 कि.मी. सीमा पाकिस्तान से लगती है। राज्य का जनसंख्या घनत्व (200 व्यक्ति प्रति कि.मी.), राष्ट्रीय जनसंख्या घनत्व (382 व्यक्ति प्रति कि.मी.) से लगभग आधा है। इन परिस्थितियों के कारण राज्य में विकास कार्यों पर देश के अन्य राज्यों की तुलना में अधिक राशि व्यय करनी पड़ती है।

    5.प्रश्न - राजस्थान अब भी पिछड़ा राज्य क्यों है?

    उत्तर - (1.) रिजर्व बैंक गवर्नर रघुरामराजन की अध्यक्षता वाली समिति ने राजस्थान को उन 10 राज्यों की समिति में सम्मिलित किया है जो सर्वाधिक पिछड़े हुए हैं तथा जिन्हें केन्द्र सरकार से सहायता मिलनी चाहिये। इस समिति ने राज्यों को अल्प विकसित, कम विकसित तथा अपेक्षाकृत विकसित तीन श्रेणियों में रखा है। राजस्थान को अल्प विकसित राज्यों में जगह मिली है। इस श्रेणी में उड़ीसा, बिहार, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखण्ड, अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, उत्तर प्रदेश तथा राजस्थान को रखा गया है। इन राज्यों में भी आर्थिक-सामाजिक आधारों पर किये गये अंक विभाजन के आधार पर राजस्थान को सबसे नीचे वाला पायदान मिला है। इस श्रेणी में सम्मिलित होने से राज्य को कोन्द्र सरकार से अधिक वित्तीय सहायता मिल सकेगी। (2.) यूएनडीपी की मानव विकास रिपोर्ट के अनुसार मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान सहित देश के आठ राज्य अत्यधिक निर्धनता से जूझ रहे हैं। इन राज्यों में कुल 42.1 करोड़ निर्धन निवास कर रहे हैं। यह जनसंख्या अफ्रीका के 26 देशों की कुल जनसंख्या 41 करोड़ से भी 1.1 करोड़ अधिक है।

    इस विषय पर विभिन्न परीक्षाओं में पूछे गए प्रश्न

    1 आर.ए.एस. 1988, मुख्य परीक्षा- राजस्थान अब भी आर्थिक दृष्टि से एक पिछड़ा राज्य है। इसके पिछड़ेपन के क्या कारण हैं ? राजस्थान: बीमारू राज्य


    6.प्रश्न - भारत के कौनसे राज्य बीमारू राज्यों की श्रेणी में आते हैं?

    उत्तर - बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान एवं उत्तर प्रदेश।

    7.प्रश्न - बीमारू शब्द का निर्माण कैसे हुआ?

    उत्तर - बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान एवं उत्तर प्रदेश् राज्यों के अंग्रेजी नाम के प्रथम दो या एक अक्षरों को लेकर बीमारू शब्द का निर्माण किया गया है। (बिहार का बीआई मध्यप्रदेश का एमए राजस्थान का आर तथा उत्तर प्रदेश का यू)

    8.प्रश्न - किस जनसंख्या विशेषज्ञ ने इन चारों राज्यों को बीमारू राज्य की श्रेणी में वर्गीकृत किया?

    उत्तर - डॉ. आशीष बोस।

    9.प्रश्न - चार राज्यों को बीमारू क्यों माना गया है?

    उत्तर -ये राज्य जनांकिकीय दृष्टि से काफी पिछड़े हुए है। वार्षिक जनसंख्या वृद्धि दर, शिशु मृत्यु दर, मातृत्व मृत्यु दर, कुल प्रजनन दर, लड़कियों की शादी की नीची आयु की दृष्टि से स्थिति काफी प्रतिकूल है। इसलिये इन्हें बीमारू राज्य माना गया है।


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