Blogs Home / Blogs / राजस्थान ज्ञान कोष प्रश्नोत्तरी लेखक - डॉ. मोहन लाल गुप्ता / राजस्थान ज्ञानकोश प्रश्नोत्तरी : राज्य की प्रमुख पेयजल परियोजनाएँ
  • राजस्थान ज्ञानकोश प्रश्नोत्तरी : राज्य की प्रमुख पेयजल परियोजनाएँ

     06.12.2021
    राजस्थान ज्ञानकोश प्रश्नोत्तरी : राज्य की प्रमुख पेयजल परियोजनाएँ

    राजस्थान ज्ञानकोश प्रश्नोत्तरी - 37

    राजस्थान ज्ञानकोश प्रश्नोत्तरी : राज्य की प्रमुख पेयजल परियोजनाएँ

    राजस्थान में पेयजल की कमी सदियों से रही है। इस कारण यहाँ पानी की बचत का बहुत ही महत्व है। कवि आईदानसिंह भाटी ने लिखा है- पार पोखरा कुआ बावड़ी, नाडी अर तालाब राखजे। पांणी आडी पाळ राखजे, थूं जळ री रुखवाळ राखजे।

    1.प्रश्न - राज्य में कितने शहरों में नगरीय जलदाय योजनाओं के माध्यम से पेयजल आपूर्ति होती है?

    उत्तर - 222 शहरों में

    2.प्रश्न - राज्य में कितने गाँवों में ग्रामीण जलदाय योजनाओं के माध्यम से पेयजल की आपूर्ति होती है?

    उत्तर - 42,635 गाँवों एवं 69,086 ढाणियों में बीसलपुर परियोजना

    3.प्रश्न - बीसलपुर परियोजना किस उद्देश्य से बनाई गई है?

    उत्तर - बीसलपुर परियोजना राज्य की सिंचाई एवं पेयजल की प्रमुख बहुउद्देशीय परियोजना है।

    4.प्रश्न - बीसलपुर परियोजना बाँध राज्य के किस जिले में एवं किस नदी पर बनाया गया है?

    उत्तर - टोंक जिले के बीसलपुर गाँव के निकट बनास नदी पर।

    5.प्रश्न - बीसलपुर बाँध कब बनाया गया?

    उत्तर - ई. 1999

    6.प्रश्न - इस बाँध की भराव क्षमता कितनी है?

    उत्तर - कुल भराव क्षमता 38.70 टी.एम.सी. है जिसमें से 16.2 टी.एम.सी. जल पेयजल आपूर्ति के लिये तथा 8 टी.एम.सी. जल सिंचाई के लिये आरक्षित किया गया है।

    7.प्रश्न - बीसलपुर परियोजना से किन क्षेत्रों को पेयजल की आपूर्ति होगी?

    उत्तर - इससे जयपुर, अजमेर, केकड़ी, सरवाड़, नसीराबाद, ब्यावर, किशनगढ़ आदि नगरों एवं कस्बों को तथा मार्ग में आने वाले गाँवों को पेयजल आपूर्ति तथा टोंक जिले के 81 हजार 800 हैक्टेयर कृषि क्षेत्र में सिंचाई हेतु जल उपलब्ध करवाने की योजना है। 8.प्रश्न - बीसलपुर परियोजना का काम कहाँ तक हो चुका है?

    उत्तर - जयपुर व अजमेर जिले को पेयजल आपूर्ति हेतु बाँध एवं इसके संग्रहण ढांचों का कार्य पूर्ण हो चुका है। अजमेर, ब्यावर, किशनगढ़ एवं रास्ते के गाँवों को पेयजल वर्ष 1994 से उपलब्ध कराया जा रहा है। दांयी व बांयी मुख्य नहरों का कार्य पूर्ण हो चुका है तथा इनकी वितरिकाओं के निर्माण का कार्य प्रगति पर है।

    इस विषय पर विभिन्न परीक्षाओं में पूछे गए प्रश्न 1 आर.ए.एस. मुख्य परीक्षा वर्ष 2003, सामान्य ज्ञान, निम्न के बारे में आप क्या जानते हैं- बीसलपुर परियोजना। 2 आर.ए.एस. मुख्य परीक्षा वर्ष 1999, बीसलपुर योजना की मुख्य विशेषतायें बताईये। मानसी वाकल परियोजना

    9.प्रश्न - मानसी वाकल परियोजाना किस नदी पर स्थापित की गई है?

    उत्तर - मानसी नदी पर स्थित उर्सिया पर।

    10.प्रश्न - मानसी वाकल परियोजाना किस जिले में स्थापित की गई है?

    उत्तर - उदयपुर जिला।

    11.प्रश्न - मानसी वाकल परियोजाना से किस शहर को पेयजल उपलब्ध करवाया जाता है?

    उत्तर - उदयपुर शहर चम्बल-धौलपुर-भरतपुर परियोजना

    12.प्रश्न - चम्बल धौलपुर भरतपुर परियोजना किस नदी पर स्थापित की गई है?

    उत्तर - चम्बल नदी

    13.प्रश्न - चम्बल धौलपुर भरतपुर परियोजना किस जिले में स्थापित की गई है?

    उत्तर - धौलपुर जिला

    14.प्रश्न - चम्बल धौलपुर भरतपुर परियोजना किस उद्देश्य से स्थापित की गई है?

    उत्तर - भरतपुर एवं धौलपुर जिलों के 1000 गाँवों एवं 5 नगरों को पेयजल की आपूर्ति के उद्देश्य से बघेरी का नाका परियोजना 15.प्रश्न - बघेरी का नाका परियोजना किस नदी पर स्थापित की गई है?

    उत्तर - बनास नदी।

    16.प्रश्न - बघेरी का नाका परियोजना किस जिले में स्थापित की गई है?

    उत्तर - राजसमंद जिला

    17.प्रश्न - बघेरी का नाका परियोजना किस उद्देश्य से स्थापित की गई है?

    उत्तर - राजसमंद जिले की नाथद्वारा, राजसमंद एवं रेलमगरा तहसील के 206 गाँवों को पेयजल आपूर्ति के उद्देश्य से। सरस्वती योजना

    18.प्रश्न - सरस्वती परियोजना क्या है?

    उत्तर - ओएनजीसी ने थार के भूगर्भ में बहने वाली प्राचीन सरस्वती नदी की खोज का काम हाथ में लिया है। इसे सरस्वती परियोजना कहते हैं। इसके तहत ओएनजीसी थार मरुस्थल में 500 से 1000 मीटर की गहराई के 40 कुंए खोदेगी। जैसलमेर जिले के डाबला गाँव के निकट एक कुंआ खोदा गया है जिसमें मीठा एवं ताजा पानी निकला हैै। इस कुंए से हर घण्टे में लगभग सात हजार लीटर पानी निकाला जा सकता है। इस परियोजना का कार्यक्षेत्र हरियाणा एवं गुजरात तक विस्तृत किया जा रहा है। ओ.एन.जी.सी. ने रिमोट सेंसिंग सेंटर, सी पी डब्लू डी एवं जी डब्लू डी से डाटा लेकर यह कार्य आरंभ किया है। इन कुंओं की खुदाई पर सामान्य कुंओं की अपेक्षा 50 गुना अधिक व्यय होता है। ओ.एन.जी.सी. खोदे गये कुंओं को राज्य सरकार को देगी। शहरी जलप्रदाय योजनाएँ

    19.प्रश्न - फ्रांसीसी संस्था ए.एफ.डी. के सहयोग से किस शहर के लिये पुनर्गठित शहरी जलप्रदाय योजना बनाई गई है?

    उत्तर - जोधपुर।

    20.प्रश्न - जोधपुर के लिए बनाई गई पुनर्गठित शहरी जलप्रदाय परियोजना की लागत कितनी है?

    उत्तर - 740.50 करोड़़ रुपये

    21.प्रश्न - ब्यावर के लिये वर्ष 2013 में आरम्भ की गई शहरी जल प्रदाय पुनर्गठन योजना की लागत कितनी है?

    उत्तर - 50 करोड़ रुपये

    22.प्रश्न - वर्ष 2013 में पूर्ण हुई मांगरोल पुनर्गठित शहरी पेयजल योजना की लागत कितनी थी?

    उत्तर - 15.24 करोड़ रुपये

    23.प्रश्न - वर्ष 2013 में आरम्भ हुई सायगढ़ पेयजल परियोजना की लागत कितनी है?

    उत्तर - 69.76 करोड़ रुपये।

    24.प्रश्न - वर्ष 2013 में आरम्भ हुई चम्बल-बूँदी पेयजल परियोजना की लागत कितनी है?

    उत्तर - 74.37 करोड़ रुपये

    25.प्रश्न - चम्बल-बूँदी पेयजल परियोजना किस शहर के लिये बनाई गई है?

    उत्तर - बूँदी। ग्रामीण जल प्रदाय योजनाएँ राजस्थान ग्रामीण पेयजल और फ्लोराइड निराकरण परियोजना नागौर

    26.प्रश्न - राजस्थान में अब तक सबसे बड़ी ग्रामीण पेयजल परियोजना कौनसी है?

    उत्तर - राजस्थान ग्रामीण पेयजल और फ्लोराइड निराकरण परियोजना नागौर।

    27.प्रश्न - राजस्थान ग्रामीण पेयजल और फ्लोराइड निराकरण परियोजना नागौर के प्रथम चरण के अंतर्गत किन शहरों अथवा कस्बों में मीठे पानी की जलापूर्ति आरम्भ की गई?

    उत्तर - पेयजल परियोजना के प्रथम चरण के अंतर्गत इंदिरागांधी नहर के माध्यम से नागौर एवं बासनी कस्बे में मीठे पानी की जलापूर्ति आरम्भ हो चुकी है।

    28.प्रश्न - राजस्थान ग्रामीण पेयजल और फ्लोराइड निराकरण परियोजना नागौर का द्वितीय चरण कब प्रारम्भ हुआ?

    उत्तर - 20 जून 2013.

    29.प्रश्न - राजस्थान ग्रामीण पेयजल और फ्लोराइड निराकरण परियोजना नागौर का द्वितीय चरण किस कस्बे में स्थापित किया गया है?

    उत्तर - जायल।

    30.प्रश्न - राजस्थान ग्रामीण पेयजल और फ्लोराइड निराकरण परियोजना नागौर की लागत कितनी है?

    उत्तर - 2,938 करोड़ रुपये।

    31.प्रश्न - राजस्थान ग्रामीण पेयजल और फ्लोराइड निराकरण परियोजना नागौर किस एजेन्सी के सहयोग से चलाई जा रही है? उत्तर - जापान इन्टरनेशनल कॉपरेशन एजेन्सी (जायका)।

    32.प्रश्न - जायका क्या है और इसके सहयोग से पश्चिमी राजस्थान में कौनसी महत्वपूर्ण परियोजना चलाई जा रही है ?

    उत्तर - जापान इन्टरनेशनल कॉपरेशन एजेन्सी को संक्षेप में जायका कहते हैं। इसके सहयोग से नागौर जिले में राजस्थान ग्रामीण पेयजल और फ्लोराइड निराकरण परियोजना नागौर चलाई जा रही है।

    33.प्रश्न - राजस्थान ग्रामीण पेयजल और फ्लोराइड निराकरण परियोजना नागौर कितनी अवधि में पूर्ण होगी?

    उत्तर - इस परियोजना को जून 2013 से जून 2017 तक की चार साल की अवधि में पूर्ण कर लिया जाएगा।

    34.प्रश्न - राजस्थान ग्रामीण पेयजल और फ्लोराइड निराकरण परियोजना नागौर के माध्यम से नागौर जिले के कितने कस्बों एवं गाँवों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराया जायेगा?

    उत्तर - नागौर जिले के 6 कस्बों- लाडनूं, परबतसर, मकराना, डीडवाना, डेगाना एवं कुचामन तथा 890 गाँवों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराया जायेगा।

    35.प्रश्न - राजस्थान ग्रामीण पेयजल और फ्लोराइड निराकरण परियोजना नागौर (द्वितीय चरण) का जलस्रोत क्या रखा गया है?

    उत्तर - पन्नालाल बारूपाल लिफ्ट नहर।

    36.प्रश्न - राजस्थान ग्रामीण पेयजल और फ्लोराइड निराकरण परियोजना नागौर (द्वितीय चरण) में जल शोधन संयंत्र का निर्माण कहाँ करवाया है?

    उत्तर - जलस्रोत पन्नालाल बारूपाल लिफ्ट नहर पर स्थित नोखार्दया में 2300 लाख लीटर प्रतिदिन क्षमता का जल शोधन संयंत्र का निर्माण करवाया जायेगा।

    37.प्रश्न - किन दो योजनाओं के पूरा हो जाने पर नागौर जिले को शुद्ध पेयजल की आपूर्ति का लक्ष्य प्राप्त हो जायेगा?

    उत्तर - 761 करोड़ रुपये की नागौर लिफ्ट कैनाल पेयजल परियोजना (प्रथम चरण) एवं 2938 करोड़ रुपये लागत की राजस्थान ग्रामीण पेयजल और फ्लोराइड निराकरण परियोजना नागौर (द्वितीय चरण) के पूर्ण हो जाने पर सम्पूर्ण नागौर जिले को इंदिरागांधी नहर के माध्यम से मीठा पानी उपलब्ध हो जायेगा।

    38.प्रश्न - नागौर लिफ्ट कैनाल से दूरस्थ गाँवों तक पेयजल पहुंचाने के लिये कितने मीटर लिफ्ट किया जायेगा?

    उत्तर - 454 मीटर। जोधपुर जिले के लिये वृहद जल परियोजनाए

    39.प्रश्न - जोधपुर जिले के कितने रुपये लागत की ग्रामीण वृहद जल परियोजनाए आरम्भ की गई हैं?

    उत्तर - जोधपुर जिले में स्वच्छ पेयजल उपलब्ध करवाने के लिये 2,098 करोड़़ रुपये की लागत वाली ग्रामीण वृहद जलापूर्ति परियोजनाएँ चालू की गई हैं।

    40.प्रश्न - माणकलाव-खंगटा वृहद जल परियोजना की मुख्य बातें क्या हैं?

    उत्तर - (लागत 94.52 करोड़़ रुपये) इस परियेाजना से जोधपुर जिले के 64 गाँवों को इंदिरा गांधी नहर परियोजना से जल पहुंचाया जा रहा है।

    41.प्रश्न - कुड़ी-लूणी-सालावास-सतलानावृहदजल परियोजना की मुख्य बातें क्या हैं?

    उत्तर - (लागत 30.74 करोड़़ रुपये) इस परियोजना से 34 गाँवों को राजीव गांधी नहर परियोजना का पानी उपलब्ध कराया जा रहा है।

    42.प्रश्न - उम्मेदसागर डोली धवा पार्ट द्वितीय वृहद जल परियोजना की मुख्य बातें क्या हैं?

    उत्तर - (64.76 करोड़़ रुपये) इस परियोजना से 69 गाँवों को राजीव गांधी नहर परियोजना का पानी उपलब्ध कराया जा रहा है। 43.प्रश्न - केरू-बेरू-जोलीयाली फेज द्वितीय (लागत 32 करोड़़ रुपये) की मुख्य बातें क्या हैं?

    उत्तर - इस परियोजना का कार्य पूर्ण हो चुका है जिससे जोधपुर तहसील के 32 गाँवों को पेयजल आपूर्ति अप्रेल 2012 से प्रारम्भ कर दी गई है।

    44.प्रश्न - देवानिया-नाथड़ाऊ जलप्रदाय योजना की मुख्य बातें क्या हैं?

    उत्तर - (लागत 449.25 करोड़ रुपये) इस परियोजना में शेरगढ़ तहसील के 264 गाँवों को लाभान्वित किया जायेगा। इसे दो पैकेज मे कार्यान्वित किया जा रहा है। (अ.) प्रथम पैकेज: (234.46 करोड़़ रुपये) प्रथम पैकेज में 35 गाँवों एवं 10 ढाणियों को नहरी पानी से जोड़ा जा चुका है। (ब.) देवानिया-नाथड़ाऊ जलप्रदाय योजना (द्वितीय पैकेज): (184.79 करोड़़ रुपये) द्वितीय पैकेज से 195 गाँव लाभान्वित होंगे। 23 नवम्बर 2012 को 1550 किलोलीटर मुख्य संग्राहक जलाशय खिरजा फतेहसिंह का शिलान्यास हुआ।

    45.प्रश्न - माणकलाव-दांतीवाड़ा-पीपाड़-बिलाड़ा वृहद जल परियोजना की मुख्य बातें क्या हैं?

    उत्तर - (लागत 308.45 करोड़़ रुपये) इस परियोजना से जोधपुर के 35, भोपालगढ के 4 व बिलाड़ा तहसील के 80 गाँवों कुल 119 गाँवों व 2 शहरों (पीपाड़ सिटी व बिलाड़ा) को पेयजल उपलब्ध कराया जायेगा।

    46.प्रश्न - तिंवरी-मथानियां-ओसियां-बावड़ी-भोपालगढ़ वृहद जलप्रदाय योजना की मुख्य बातें क्या हैं?

    उत्तर - (लागत 430.06 करोड़़ रुपये) इस परियोजना से ओसियां व भोपालगढ़ तहसीलों के 113 गाँवों व 950 ढाणियों को लाभान्वित किया जायेगा।

    47.प्रश्न - खुड़ियाला-जीयाबेरी-आगोलाई-बालेसरवृहद जलप्रदाय योजना की मुख्य बातें क्या हैं?

    उत्तर - (लागत 74.38 करोड़़ रुपये) इस परियोजना से शेरगढ़़ तहसील के 77 गाँवों को पेयजल उपलब्ध कराया जायेगा। चम्बल-भीलवाड़ा वृहद् पेयजल परियोजना

    48.प्रश्न - चम्बल-भीलवाड़ा वृहद् पेयजल परियोजना की मुख्य बातें बताइये।

    उत्तर - 22 सितम्बर 2013 को भीलवाड़ा जिले के रूपाहेली गाँव में 2,223.67 करोड़ रुपये की लागत वाली चम्बल-भीलवाड़ा वृहद् पेयजल परियोजना का शिलान्यास किया गया। इस परियोजना से चम्बल नदी से 9 कस्बों- भीलवाड़ा, आसीन्द, माण्डल, गुलाबपुरा, गंगापुर, शाहपुरा, जहाजपुर, माण्डलगढ़ एवं बिजौलिया तथा 1,688 गाँवों के 25 लाख लोगों तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाया जायेगा। नसीराबाद-ब्यावर पाइप लाइन परियोजना

    49.प्रश्न - अजमेर-बीसलपुर परियोजना फेज-2 की मुख्य बातें बताइये।

    उत्तर - अजमेर-बीसलपुर परियोजना फेज-2 के अंतर्गत नसीराबाद-ब्यावर पाइप लाइन परियोजना का काम पूरा हो गया है। 12 मई 2013 को इसका लोकार्पण हुआ। इस पर 88.30 करोड़ रुपये की लागत आई है। इसके तहत नसीराबाद से ब्यावर तक 50 किमी पाइप लाइन बिछाई गई है। इस परियोजना से ब्यावर शहर, जवाजा ब्लॉक के 199 गाँव, पीसांगन ब्लॉक के 75 गाँवों में पेयजल पहुंचाया गया है। जवाजा ब्लॉक के 199 गाँवों को लाभान्वित करने के लिये 231.46 करोड़ रुपये की स्वीकृति जारी की गई है। धौलपुर जिले के 188 ग्रामों को स्वच्छ पेयजल हेतु तीन परियोजनाएँ

    50.प्रश्न - धौलपुर जिले के गांवों के लिए आरम्भ की गई परियोजनाओं की जानकारी दीजिए।

    उत्तर - धौलपुर जिले के 188 ग्रामों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने हेतु तीन परियोजनाएँ आरम्भ की गई हैं- (1.) धौलपुर जिले में डांग क्षेत्र के अंतर्गत बसेड़ी तहसील के 82 गाँवों हेतु पार्वती बाँध से निकाली गई क्षेत्रीय जलप्रदाय परियोजना पूरी हो गई है। इस पर 103.38 करोड़ रुपये की लागत आई है। (2.) 9.11 करोड़ रुपये की लागत वाली चम्बल-धौलपुर-भरतपुर पेयजल परियोजना के सागरपाड़ा हैडवर्क्स से धौलपुर जिले के 62 ग्रामों को पेयजल उपलब्ध कराया जा रहा है। यह परियोजना भी पूरी हो गई है। (3.) चम्बल-धौलपुर-भरतपुर पेयजल परियोजना के अंतर्गत सैपऊ हैडवर्क्स से धौलपुर जिले की सैंपऊ तहसील के 44 ग्रामों की क्षेत्रीय जल प्रदाय योजना पर 34.65 करोड़ रुपये की लागत आयेगी। इस परियोजना का 28 जुलाई 2013 को शिलान्यास किया गया। भरतपुर जिले के 755 गाँवों की कलस्टर पेयजल परियोजना

    51.प्रश्न - चम्बल-धौलपुर-भरतपुर पेयजल परियोजना से भरतपुर के लिए कितने गांवों के लिए कलस्टर पेयजल योजना आरम्भ की गई है ?

    उत्तर - 27 सितम्बर 2013 को भरतपुर जिले के 755 गाँवों की कलस्टर पेयजल परियोजना का शिलान्यास हुआ। चम्बल-धौलपुर-भरतपुर पेयजल परियोजना से निकलने वाली इस योजना पर 720.31 करोड़ रुपये की लागत आना अनुमानित है। झालावाड़ जिले के लिये दो नई पेयजल परियोजनाएँ

    52.प्रश्न - गागरोन पेयजल परियोजना तथा पीपलाद पेयजल परियोजना किस जिले में आरम्भ की गई हैं तथा इनकी मुख्य बातें क्या हैं ?

    उत्तर - 13 सितम्बर 2013 को झालावाड़ जिले में 256.56 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली गागरोन पेयजल परियोजना तथा 32.84 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली पीपलाद पेयजल परियोजना का शिलान्यास किया गया। टोंक जिले के 199 गाँवों के लिये पेयजल परियोजना

    53.प्रश्न - बीसलपुर-रिवाई पेयजल परियोजना की मुख्य बातें बताइये।

    उत्तर - 31 मई 2013 को टोंक जिले के निवाई एवं टोंक तहसीलों के 199 गाँवों के लिये 118 करोड़ रुपयों की लागत वाली बीसलपुर-रिवाई पेयजल परियोजना का शिलान्यास किया गया। इसके तहत निवाई तहसील के 191 तथा टोंक तहसील के 8 गोवों को पेयजल पहुंचाया जायेगा। इसका आकार 2045 की जनसंख्या को अनुमानित करके बनाया गया है। इसे 2015 तक पूर्ण किया जाना है। इसमें 1714 किमी पाइप लाइन बिछाई जायेगी, 4 पम्पिंग स्टेशन बनाये जायेंगे, 80 मीटर लिफ्टिंग की जायेगी तथा 38 उच्च जलाशयों के माध्यम से गाँवों एवं ढाणियों में जल का वितरण किया जायेगा। बीसलपुर-टोंक-उनियारा-देवली जलप्रदाय योजना 54.प्रश्न - बीसलपुर-टोंक-उनियारा-देवली जलप्रदाय योजना की मुख्य बातें बताइये।

    उत्तर - 1 जून 2013 को टोंक, देवली एवं उनियारा शहर तथा 436 गाँवों के लिये 542.11 करोड़ रुपये की लागत वाली बीसलपुर-टोंक-उनियारा-देवली जलप्रदाय योजना का शिलान्यास किया गया। इसे वर्ष 2041 की अनुमानित जनसंख्या के लिये बनाया जायेगा तथा वर्ष 2016 तक पूरा कर लिया जायेगा। इसमें 1835 किमी पाइप लाइन बिछाना, 14 पम्पिंग स्टेशनों के माध्यम से पानी को 245 मीटर लिफ्ट करके अंतिम छोर के गाँवों तक पहुंचाना और 71 उच्च जलाशयों का निर्माण कर उनसे 436 गाँवों एवं तीन शहरों में पेयजल पहुंचाना प्रस्तावित है। बाँसवाड़ा एवं प्रतापगढ़ जिले के लिये वृहद पेयजल परियोजनाएँ

    55.प्रश्न - बांसवाड़ा एवं प्रतापगढ़ जिलों के ग्रामीण क्षेत्रों के लिए विगत वर्षो में आरम्भ की गई पेयजल परियोजनाओं की जानकारी दीजिए।

    उत्तर - 29 सितम्बर 2013 को सुरवाणियां बाँध से बाँसवाड़ा जिले के 82 गाँवों एवं माही बाँध से बाँसवाड़ा-प्रतापगढ़ जिले के 334 गाँवों की वृहद् पेयजल परियोजनाओं का शिलान्यास किया गया। इन परियोजनाओं पर कुल 701 करोड़ रुपये लागत आना अनुमानित है। एकीकृत तारानगर-झुंझुनूं-सीकर-खेतड़ी पेयजल परियोजना 56.20 सितम्बर 2013 को एकीकृत तारानगर-झुंझुनूं-सीकर-खेतड़ी पेयजल परियोजना का शिलान्यास हुआ। इसके तहत इंदिरा गांधी नहर से झुंझुनूं जिले के 5 कस्बे- झुंझुनूं, बग्गड़, मण्डावा, खेतड़ी, गोठड़ा और 258 गाँवों को पेयजल पहुंचाया जायेगा। बीसलपुर पेयजल परियोजना से बस्सी एवं चाकसू तहसीलों को पानी 57.20 सितम्बर 2013 को बस्सी तहसील के 210 गाँवों की क्षेत्रीय जलप्रदाय योजना एवं चाकसू तहसील के 267 गाँवों की क्षेत्रीय जल प्रदाय योजना का शिलान्यास हुआ। इन योजनाओं को बीसलपुर पेयजल परियोजना से जल उपलब्ध कराया जायेगा। बाड़मेर जिले की गुढ़ामालानी तहसील के 177 गाँवों के लिये परियोजना 58.बाड़मेर जिले की गुढ़ामालानी तहसील के 177 गाँवों के लिये 160 करोड़ की पेयजल परियोजना आरम्भ की गई है। यह परियोजना 2015 तक बनकर पूरी होगी। इसमें 114 किमी. पाइन लाइन बिछाई जायेगी। 3 पम्पिंग स्टेशन और 6 स्वच्छ जलाशय बनाये जायेंगे तथा 177 गाँवों में आधारभूत ढांचे का निर्माण किया जायेगा। इसका निर्माण 2041 की अनुमानित जनसंख्या के अनुमान से किया जा रहा है। 7 जून 2013 को ढीमडी गाँव में इसका इसका शिलान्यास हुआ। जालौर पेयजल योजना 59.6 जून 2013 को 62.20 करोड़ रुपये लागत वाली नर्मदा आधारित जालौर शहर की पुनर्गठित पेजयल परियोजना का शिलान्यास हुआ। इससे जालौर शहर एवं 14 ग्रामों के लिये पेयजल की आपूर्ति की जायेगी। इसे 2041 की अनुमानित जनसंख्या के लिये बनाया जायेगा तथा इसका कार्य वर्ष 2015 में पूरा होगा। नर्मदा डी. आर. सांचौर-रानीवाड़ा कलां - जसवंतपुरा परियोजना 60.जालोर जिले के 138 गाँवों एवं सांचौर शहर के लिये 223 करोड़ रुपये की लागत वाली नर्मदा डी.आर. सांचौर-रानीवाड़ा कलां-जसवंतपुरा परियोजना बनाई गई है। 7 जून 2013 को इसका शिलान्यास किया गया। इसके अंतर्गत 125 कि.मी. पाइप लाइन बिछाई जायेगी। 6 पम्पिंग स्टेशन एवं 1050 एम.एल. क्षमता का रॉ-वाटर रिजर्वायर एवं 43.5 एम.एल.डी. क्षमता के जलशोधन संयंत्र का निर्माण करवाया जायेगा। इस परियोजना का निर्माण वर्ष 2041 की अनुमानित जनसंख्या के लिये किया गया है। जवाई-पाली कलस्टर पेयजल परियोजना 61.3 अक्टूबर 2013 को जवाई बाँध से पाली जिले के मारवाड़ जंक्शन तथा निकटवर्ती 82 गाँवों एवं सुमेरपुर विधानसभा क्षेत्र के 26 गाँवों की जवाई-पाली क्लस्टर पेयजल परियोजना का शिलान्यास किया गया है। इस परियोजना पर 152.46 करोड़ रुपये की लागत आयेगी। जैसलमेर जिले के लिये दो नई पेयजल परियोजनाएँ 62.1 सितम्बर 2013 को पोकरण-फलसूण्ड-बालोतरा-सिवाना लिफ्ट पेयजल परियोजना के अंतर्गत जैसलमेर जिले की पोकरण तहसील के 177 गाँवों की कलस्टर परियोजना व पैकेज 2, पार्ट-ए पोकरण से संतरा भाकरी तक पेयजल ट्रांसमिशन मुख्य परियोजना का शिलान्यास हुआ। इस पर 542.22 करोड़ रुपये लागत आयेगी। इसी दिन पोकरण-फलसूण्ड-बालोतरा-सिवाना लिफ्ट पेयजल परियोजना के अंतर्गत नाचना से बीलया तक मुख्य ट्रांसमिशन परियोजना का भी शिलान्यास किया गया। इस पर 357.11 करोड़ रुपये लागत आनी अनुमानित है। चम्बल-सवाईमाधोपुर-नादौती पेयजल परियोजना 63.करौली जिले के 510 गाँवों एवं सवाईमाधोपुर जिले के 416 गाँवों को पेयजल उपलब्ध करवाने के लिये चम्बल-सवाईमाधोपुर-नादौती पेयजल परियोजना आरम्भ की गई है। इसके प्रथम चरण में 478.91 करोड़ रुपये स्वीकृत किये गये हैं। बाड़मेर लिफ्ट परियोजना फेज द्वितीय, भाग-ब 64.बाड़मेर जिले के 67 गाँवों एवं उनकी ढाणियों के लिये 125 करोड़ रुपये की लागत वाली बाड़मेर-रावतसर-खरन्टीया पेयजल परियोजना आरम्भ की गई है। यह बाड़मेर लिफ्ट परियोजना फेज द्वितीय का भाग-ब है। 7 जून 2013 को इसका शिलान्यास किया गया। इस परियोजना में इंदिरागांधी नहर-बाड़मेर आउटलेट से 67 गाँवों को पानी मिलेगा। यह 2015 तक पूरी होगी। इसमें 352 किमी पाइप लाइन बिछाई जायेगी तथा एक पम्पिंग स्टेशन एवं 22 उच्च जलाशय बनाये जायेंगे। इसका निर्माण 2041 की अनुमानित जनसंख्या के अनुमान से किया जा रहा है।


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