Blogs Home / Blogs / राजस्थान ज्ञान कोष प्रश्नोत्तरी लेखक - डॉ. मोहन लाल गुप्ता / राजस्थान ज्ञानकोश प्रश्नोत्तरी : राज्य में गुर्जर आंदोलन
  • राजस्थान ज्ञानकोश प्रश्नोत्तरी : राज्य में गुर्जर आंदोलन

     07.12.2021
    राजस्थान ज्ञानकोश प्रश्नोत्तरी  : राज्य में गुर्जर आंदोलन

    राजस्थान ज्ञानकोश प्रश्नोत्तरी - 46

    राजस्थान ज्ञानकोश प्रश्नोत्तरी : राज्य में गुर्जर आंदोलन

    1.प्रश्न - राजस्थान में गुर्जर आंदोलनरत क्यों हैं?

    उत्तर - गुर्जरों की मांग है कि वे भी मीणा जाति के समान जनजाति सूची में रखे जाने की योग्यता रखते हैं। जहाँ-जहाँ मीणा समुदाय रहता है, वहाँ-वहाँ गुर्जर समुदाय भी पाया जाता है। मीणा जाति भी कृषि एवं पशुपालन पर निर्भर है और गुर्जर समुदाय का भी मुख्य कार्य यही है। मीणा जाति एवं गुर्जर जाति में आर्थिक एवं शैक्षिक पिछड़ापन एक जैसा है। इन सब कारणों के आधार पर गुर्जर जाति को भी मीणा जाति के समान अनुसूचित जन जाति में सम्मिलित किया जाये।

    2.प्रश्न - गुर्जरों ने अनुसूचित जनजाति में सम्मिलित होने के लिये आंदोलन कब आरम्भ किया?

    उत्तर - राजस्थान के गुर्जरों ने 1981 से आंदोलन चला रखा है। 29 मई 2007 से 4 जुलाई 2007 तक गुर्जरों ने अनुसूचित जाति वर्ग में सम्मिलित होने के लिये विशाल एवं हिंसक आंदोलन किया जिसकी लपटें पूरे उत्तरी भारत में देखी गयीं। राजस्थान, उत्तर प्रदेश, दिल्ली तथा हरियाणा इससे विशेष रूप से प्रभावित हुए।

    3.प्रश्न - गुर्जर जाति को अनुसूचित जन जाति में सम्मिलित क्यों नहीं किया जा रहा?

    उत्तर - राज्य सरकार ने विभिन्न जातियों द्वारा अनुसूचित जाति की सूची में सम्मिलित किये जाने वाले दावों का परीक्षण करवाया तथा पाया कि गुर्जर जाति अनुसूचित जनजाति की सूची में सम्मिलित किये जाने की पात्रता नहीं रखती। यह जाति प्रमुखतः दूध बेचने का काम करती है। इसकी माली हालत अच्छी है तथा यह जाति अन्य समुदायों से सम्पर्क स्थापित करने में कोई संकोच नहीं करती। इस जाति में आदिम जातियों के लक्षण भी नहीं पाये जाते हैं। इस जाति की संस्कृति अन्य समुदायों से अलग नहीं है।

    4.प्रश्न - राज्य सरकार ने गुर्जर जाति को अन्य पिछड़ा वर्ग में कब सम्मिलित किया

    उत्तर - भैंरोसिंह शेखावत सरकार ने 8 अगस्त 1994 को ‘राज्य अन्य पिछड़ा वर्ग आयोग’ की अनुशंसा पर सामाजिक एवं शैक्षिक पिछड़ेपन के आधार पर कई अन्य जातियों के साथ गुर्जर जाति को अन्य पिछड़ा वर्ग में सम्मिलित किया।

    5.प्रश्न - जसराज चौपड़ा समिति का गठन क्यों हुआ?

    उत्तर - गुर्जरों की मांगों पर विचार करने के लिये हाई कोर्ट के सेवानिवृत्त जज जसराज चौपड़ा की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया गया।

    6.प्रश्न - जस्टिस जसराज चौपड़ा समिति ने अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को कब सौंपी।

    उत्तर - 17 दिसम्बर 2007 को समिति ने रिपोर्ट दी। इसमें 294 पृष्ठ हैं जिनमें से 192 पृष्ठों में अनुशंसाएं हैं। शेष 102 पृष्ठों में सम्बन्धित दस्तावेज और संलग्नक हैं।

    7.प्रश्न - समिति की रिपोर्ट में क्या कहा गया है?

    उत्तर - समिति ने गुर्जरों को जनजातीय आरक्षण के योग्य नहीं माना तथा कहा कि राज्य में बसने वाली मीणा जाति सहित कई अन्य जातियाँ जिन्हें वर्तमान में जनजाति वर्ग में आरक्षण की सुविधा मिल रही है, वे जनजातीय वर्ग से आरक्षण की सुविधा पाने की योग्यता नहीं रखतीं। अतः जनजाति वर्ग में आरक्षण देने के आधार की समीक्षा हो तथा इसे बदला जाये ताकि समाज के सभी वर्गों के साथ न्याय हो सके। सवाईमाधोपुर, अलवर, राजसमन्द सहित लगभग आधा दर्जन जिलों में बसे गुर्जरों में जनजातीय गुण भी पाये गये हैं। सवाईमाधोपुर जिले के खण्डार और डांग क्षेत्र के गुर्जर बहुल क्षेत्र आदिम श्रेणी के काफी निकट हैं। इसी जिले की बौंली तहसील और अलवर जिले के छिंद क्षेत्र में भी भौगोलिक एकाकीपन के लक्षण हैं। उदयपुर संभाग में बसे हेराका गुर्जर वर्ग में जनजातियों के चिह्न मिले हैं। भीलवाड़ा और चित्तौड़गढ़ जिलों में जाति पंचायत का प्रचलन है। कोटा और बूँदी जिलों के देसी गुर्जर दूसरे क्षेत्रों से आये गुर्जरों से विवाह नहीं करते। राजस्थान में गुर्जरों के पास राज्य का 20 प्रतिशत पशुधन है तथा प्रति गुर्जर परिवार औसतन 6.45 बीघा जमीन उपलब्ध है जबकि प्रदेश में प्रति परिवार औसतन 6.67 बीघा जमीन उपलब्ध है। गुर्जरों के पास 47.67 लाख पशु हैं जिनमें से 18.29 लाख बकरियां, 5.71 लाख गाय एवं बैल, 13.21 लाख भैंस, 10.27 लाख भेड़, 16,655 ऊँट, 2,474 घोड़े तथा 529 गधे हैं। चौपड़ा समिति ने माना है कि कृषि भूमि तथा पशुधन के इस विपुल स्वामित्व को देखते हुए राजस्थान के गुर्जर अधिक पिछड़ी स्थिति में नहीं हैं। राज्य की 13 तहसीलों में रहने वाले केवल 8 लाख गुर्जर अर्थात् गुर्जरों की एक तिहाई आबादी अति पिछड़ी हुई अवस्था में हैं। शेष गुर्जरों की स्थिति इतनी खराब नहीं है।

    8.प्रश्न - पीलूपुरा आंदोलन क्या था?

    उत्तर - 23 मई 2008 से कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला के नेतृत्व में गुर्जर आंदोलन रेल रोको अभियान के रूप में आरंभ हुआ। इस आंदोलन के मुख्य केन्द्र पीलूपुरा (भरतपुर जिला), भरतपुर तथा सिकंदरा चौराहा (दौसा) रहे। इस आंदोलन में 34 गुर्जरों की जानें गयीं। आंदोलनकारियों ने एक पुलिस कांस्टेबल की हत्या कर दी। यह आंदोलन 26 दिन चला। 18 जून 2008 को गुर्जरों एवं सरकार में समझौता हो गया।

    9.प्रश्न - पीलूपुरा समझौता के बाद उसके क्रियान्वयन की खास बातें क्या हैं?

    उत्तर - राजस्थान विधानसभा ने 16 जुलाई 2008 को विधेयक पारित करके गुर्जरों, राइकों, बनजारों एवं गाड़िया लुहारों को अनुसूचित जाति से बाहर 5 प्रतिशत विशेष आरक्षण का प्रावधान किया। निर्धन सवर्णों को 14 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया गया। इस प्रावधान से राज्य में वर्टिकल आरक्षण 50 प्रतिशत से अधिक अर्थात् 68 प्रतिशत हो जाने के कारण, राजस्थान हाईकोर्ट ने 13 अक्टूबर 2009 को राज्य सरकार के निर्णय पर रोक लगा दी। अप्रेल 2010 में गुर्जरों ने अपनी मांग में परिवर्तन करते हुए कहा कि हमें पहले से ही निर्धारित 50 प्रतिशत की सीमा के भीतर ही अलग से 5 प्रतिशत आरक्षण दिया जाये।

    10.प्रश्न - इन्द्रसेन इसरानी की अध्यक्षता में सात सदस्यीय कमेटी क्यों गठित की गई?

    उत्तर - राजस्थान हाईकोर्ट के निर्देश पर 18 अप्रेल 2010 को राज्य सरकार ने सेवानिवृत्त न्यायाधीश इन्द्रसेन इसरानी की अध्यक्षता में सात सदस्यीय कमेटी गठित की। इस समिति ने मई 2010 में अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को दी। इस समिति ने चौपड़ा आयोग की सिफारिशों को लागू करने की सिफारिश की है।

    11.प्रश्न - गुर्जर आरक्षण की वर्तमान स्थिति क्या है?

    उत्तर - राज्य में 1 प्रतिशत आरक्षण विशेष पिछड़ा वर्ग (एसबीसी) में दिया गया है। इसमें चार घुमक्कड़ जातियों- गुर्जरों, राइकों, बनजारों एवं गाड़िया लुहारों को शामिल किया गया है।


  • Share On Social Media:
Categories
SIGN IN
Or sign in with
×
Forgot Password
×
SIGN UP
Already a user ?
×