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  • कैसे जोड़ें अपनी आयु में 15 साल!

     02.06.2020
    कैसे जोड़ें अपनी आयु में 15 साल!

    हमारी नई वैबसाइट - भारत का इतिहास - www.bharatkaitihas.com

     कैसे जोड़ें अपनी आयु में 15 साल!


    क्या आपने लम्बी जिंदगी जीने के लिए स्वयं को तैयार किया है!

    यदि आप अपनी आयु में गुणात्मक सुधार करने की इच्छा रखते हैं तो कृपया इस आलेख को शुरु से अंत तक ध्यान से पढ़ें। हो सके तो दो-चार या अधिक बार पढ़ें तथा इसमें से महत्वपूर्ण बातों को बिंदुओं के रूप में नोट कर लें और उन्हें आजमाएं।

    मानव शरीर 120 से 140 साल तक जीवित रहने के लिए बना है। हमारे शास्त्रों में इच्छा मृत्यु से लेकर सैंकड़ों साल की आयु वाले योगियों एवं चिरंजीवी मनुष्यों के उदाहरण उपलब्ध हैं किंतु वैज्ञानिकों के पास अभी तक 122 साल की अधिकतम आयु वाले इंसान का ही प्रामाणिक रिकॉर्ड है।

    वातावरण में उपलब्ध ऑक्सीजन की मात्रा, धरती का तापक्रम, मनुष्य के लिए उपलब्ध भोजन की गुणवत्ता तथा परिश्रम करने के घण्टे, मनुष्य के मन में सुरक्षा का भाव आदि के आधार पर मनुष्यों की आयु का औसत बदल जाता है।

    वर्तमान समय में सिंगापुर, स्विट्जरलैण्ड, मकाओ तथा इटली आदि यूरापीय देशों में मनुष्य की औसत आयु 83 साल है जबकि लिसोथो, स्वाजीलैण्ड, नाइजीरिया, जाम्बिया एवं माली आदि गरीब अफ्रीकी एवं एशियाई देशों में मनुष्य की औसत आयु 44 से 53 साल के बीच है। अतः लम्बी आयु को अमीरी, शिक्षा और ठण्डी जलवायु से जोड़कर देखा जा सकता है तथा छोटी आयु को गरीबी, अशिक्षा एवं गर्म जलवायु से जोड़ा जा सकता है।

    भारत एक गर्म जलवायु वाला विकासशील देश है तथा शिक्षा का स्तर मध्यम है। वर्ष 1947 में भारत को अंग्रेजों से आजादी मिली, उस समय भारत में मनुष्य की औसत आयु केवल 31 साल थी। वर्तमान समय में भारत में मनुष्य की औसत आयु 68.3 वर्ष है। यह ठण्डे एवं अमीर देशों से लगभग 15 साल कम तथा गर्म एवं निर्धन देशों से लगभग 15 साल अधिक है।

    इन सब बातों को यदि तार्किक आधार पर समझा जाए तो कहा जा सकता है कि यदि भारत की शासन व्यवस्था, अर्थ व्यवस्था, शिक्षा का स्तर और स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार हो, लोगों को रहने के लिए ठण्डा और शांत वातावरण मिले तथा काम के घण्टों में कमी आए तो एक आम भारतीय की आयु में कम से कम 15 साल तक की वृद्धि की जा सकती है।

    शासन व्यवस्था तथा अर्थव्यवस्था में सुधार, शिक्षा एवं स्वास्थ्य सुविधाओं का प्रसार आदि कार्य तो सरकार एवं समाज द्वारा सामूहिक रूप से ही किए जा सकते हैं किंतु कुछ उपाय करके हम स्वयं भी अपनी औसत आयु में 15 साल अथवा उससे अधिक वर्ष जोड़ सकते हैं।

    इस आलेख में ऐसे ही कुछ उपाय बताए गए हैं। लम्बी आयु का मूल मंत्र इस तथ्य में निहित है कि शरीर को स्वस्थ्य एवं सक्रिय रखा जाए। स्वस्थ एवं दीर्घायु बनने के लिए जल, वायु, ध्वनि, निद्रा, व्यायाम और अन्न आदि का बेहतर प्रबन्धन करना आवश्यक होता है।

    शयन तथा शैय्या त्याग

    मनुष्य को सामान्यतः रात्रि में 9 से 10 बजे के बीच सो जाना चाहिए तथा 7 से 8 घण्टे की नींद लेकर प्रातः 4 बजे से 6 बजे के बीच उठ जाना चाहिए। यदि जल्दी सोना संभव न हो तो भी 7 से 8 घण्टे की नींद अवश्य लेनी चाहिए।

    जल सेवन का तरीका समझें

    सुबह उठते ही पानी पीना चाहिए। रात्रि में पानी कम और दिन में अधिक पीना चाहिए। मल-मूत्र त्यागने तथा स्नान से पहले पानी पीना चाहिए, मल-मूत्र त्यागने तथा स्नान के तुरंत बाद पानी नहीं पीना चाहिए। भोजन करने से तुरंत पहले या तुरंत बाद में पानी नहीं पीना चाहिए। भोजन खाने एवं पानी पीने में कम से कम आधे से पौन घण्टे का अंतर होना चाहिए। प्रतिदिन 2 से 3 लीटर अर्थात् 8 से 12 गिलास जल पीना चाहिए। एक बार में चौथाई से एक तिहाई लीटर अर्थात् लगभग 1 गिलास पानी पीना चाहिए। सुरक्षित स्रोतों से प्राप्त एवं साफ जल ही पिया जाना चाहिए। जल हमेशा घूंट-घूंट करके तथा बैठकर पीना चाहिए।

    वायु सेवन का लाभ उठाएं

    प्रातः काल में कम से कम आधा घण्टा साफ वातावरण अर्थात् किसी पार्क, खेत, उद्यान, मैदान आदि में घूमने से शरीर को ऑक्सीजन की अच्छी मात्रा मिलती है। श्वास पर नियंत्रण करने से शरीर की ऊर्जा के स्तर में वृद्धि होती है। दिन में कुछ समय लम्बी-लम्बी सांस लेनी चाहिए। या कुछ मिनट के लिए प्राणायाम करना चाहिए। दिन में जब भी समय मिले, तुलसी, पीपल, बड़, हरी घास एवं फूलदार वनस्पति के निकट रहना चाहिए। जहां वायु में धूल, धुआं, बदबू तथा गर्मी हो, वहां अधिक समय नहीं रहना चाहिए। हल्का व्यायाम करें खुले स्थान पर प्रतिदिन दस से पंद्रह मिनट तक अंग संचान अर्थात् हल्का व्यायाम, सूर्य नमस्कार, स्ट्रैचिंग आदि करनी चाहिए। इससे शरीर की मांसपेशियों में रक्त का संचालन बढ़ता है जिससे शरीर में ऑक्सीजन के स्तर में वृद्धि होती है। हल्की धूप का सेवन करें सुबह सूर्य निकलने के साथ ही कम से कम 10 मिनट तक हल्की धूप का सेवन करने से शरीर को विशिष्ट प्रकार की ऊर्जा प्राप्त होती है। इससे बहुत से रोग नहीं होते तथा काम करते समय शरीर में थकावट नहीं आती। तेल की मालिश करें धूप सेवन के समय यदि शरीर पर तिल या सरसों के तेल की मालिश करें तो समय का अच्छा उपयोग होगा। इससे मांसपेशियों में रक्त का समुचित संचार होगा। त्वचा की चमक बनी रहेगी एवं उसमें लम्बे समय तक झुर्रियां नहीं पड़ेंगी। मेडीटेशन करें अपनी दिनचर्या में ईश्वर का ध्यान, पूजा, कीर्तन, किसी भी धार्मिक ग्रंथ का पाठ, मंदिर दर्शन, तीर्थ सेवन, यज्ञ, हवन जैसी गतिविधियों को सम्मिलित करने से मस्तिष्क एवं शरीर पर प्रतिदिन होने वाले रेडिएशन इफैक्ट्स कम होते हैं। चिंतन संतुलित होता है एवं मनुष्य को शांति का अनुभव होता है। मनुष्य अपने मन में जितनी अधिक शांति और संतुष्टि का अनुभव करता है, उसकी आयु उतनी ही अधिक बढ़ती है तथा व्यक्ति में निर्णय लेने की क्षमता का विकास होता है। ध्यान करने से रोग और शोक मिटते हैं। ध्यान से शरीर, मन और मस्तिष्क को शांति, स्वास्थ्य और प्रसन्नता का अनुभव होता है। वैदिक यज्ञ-हवन में प्रयुक्त जड़ी-बूटियों के धुएं से मनुष्य की जीवनी शक्ति पुष्ट होती है। ध्वनि प्रबंधन करें मनुष्य की आयु पर ध्वनियों का बहुत प्रभाव पड़ता है। कर्णकटु, कर्कश, तेज आवाज, गाली-गलौच, चीख-पुकार, मशीनों की खड़खड़ जैसी ध्वनियां जीवनी शक्ति को कमजोर करती हैं जबकि कर्णप्रिय, सुमधुर एवं धीमी आवाजें जीवनी शक्ति को पुष्ट करती हैं। अतः सितार वादन, बांसुरी वादन, शहनाई वादन, भजन, शबद-कीर्तन, रामधुन जैसी ध्वनियां सुनें। ईश्वर को समर्पित मन्त्र-ध्वनियों से शरीर की विभिन्न ग्रन्थियों से ऐसा स्राव निकलता है जो कोशिकाओं के असमय क्षरण को रोक देता है। स्वयं भी धीरे बोलने का अभ्यास करें। मीठी वाणी बोलें, अच्छे शब्दों का प्रयोग करें। जबर्दस्ती मुस्कुराएं मुस्कुराने से हमारी मांसपेशियों का तनाव दूर होता है। जब भी याद आ जाए, मुस्कुराएं। किसी के मिलते ही मुस्कुराकर अभिवादन करने की आदत डालें। बच्चों को देखकर मुस्कुराएं, बीमारों को देखकर मुस्कुराएं। बूढ़ों को देखकर मुस्कुराएं। मुस्कान का मधुर उजाला न केवल आपके जीवन में अपितु दूसरों के जीवन में भी आशा और सकारात्मकता का प्रसार करेगा। बच्चों के साथ समय बिताएं बच्चों की आंखों एवं उनके कण्ठ से निकली ध्वनियों से ऐसी सकारात्मक तरंगें निकलती हैं जो वृद्धावस्था को रोक देती हैं। अतः प्रतिदिन कुछ समय बच्चों के बीच बिताना चाहिए। उनके साथ रहने से हमारे शरीर में ऐसे हार्मोन्स लम्बे समय तक बने रहेंगे जो मनुष्य को दीर्घायु प्रदान करते हैं। तुलसी का पत्ता तुलसी के एक पत्ते का नियमित रूप से सेवन करें। पंचामृत बनाकर पीएं। सिर पर चंदन का टीका लगाएं। इनमें रेडिएशन इफैक्ट्स कम करने की शक्ति होती है। तुलसी का पत्ता चबाने से दांत खराब हो जाते हैं इसलिए इसे चाय या सब्जी आदि में डाल कर प्रयोग करें। विशिष्ट वनस्पतियों का सेवन नीम एवं गिलोय रक्त शोधक एवं शक्ति वर्धक होते हैं। गर्मियों में नीम के नए पत्त चबाएं। सर्दी अथवा गर्मी किसी भी मौसम में गिलोय का छोटा सा टुकड़ा तोड़कर खाएं। महिलाओं को शतावरी का नियमित सेवन करना चाहिए। बच्चों को शंखपुष्पी का शरबत बना कर देना चाहिए। पुरुषों के लिए अश्वगंधा का सेवन शक्तिवर्द्धक होता है। दिन भर में थोड़ी मात्रा आँवला तथा विधारा की भी प्रयुक्त करनी चाहिए। भोजन का प्रबन्धन स्वस्थ मनुष्य को दिन में कम से कम दो बार नाश्ता और दो बार भोजन करना चाहिए। कभी भी एक साथ पेट भरके नहीं खाना चाहिए। अपने भोजन में सब तरह की खाद्य सामग्री शामिल करनी चाहिए। अर्थात् दाल, सब्जी, दही, विभिन्न प्रकार के अनाजों के आटे से बनी चपातियां, अंकुरित अनाज, चावल, सलाद, आदि। इनमें से कभी कुछ तथा कभी कुछ खाना चाहिए। एक साथ सभी चीजें खाने से बचना चाहिए। घर में बना हुआ शुद्ध, स्वादिष्ट एवं सात्विक भोजन करना चाहिए। फास्ट फूड, जंक फूड, पिज्जा, बर्गर, कोल्ड ड्रिंक, मांसाहार, अण्डा, मछली आदि के सेवन से बचना चाहिए। भोजन तैयार करने में नमक, मिर्च, तेल, खटाई का कम प्रयोग करना चाहिए। जितनी भूख हो उससे थोड़ा कम भोजन करना चाहिए। अर्थात् भरपेट भोजन नहीं करना चाहिए। संभव हो तो सप्ताह में या पखवाड़े में एक दिन केवल एक समय भोजन करना चाहिए। खुशबूदार मसाले जीरा, सौंफ, धनिया, हल्दी, राई, हींग, दाना मेथी, पत्ता मेथी, धनिया पत्ता, करी पत्ता, पुदीना, कलौंजी, प्याज, लहसुन आदि खुशबूदार मसालों का नियमित रूप से प्रयोग करना चाहिए। फल एवं सलाद का नियमित सेवन नियमित रूप से कच्ची सलाद तथा फलों का सेवन करना चाहिए। सलाद का सेवन करने से कब्ज नहीं होती तथा फलों का सेवन करने से उच्च रक्तचाप एवं मधुमेह जैसे रोग नियंत्रण में रहते हैं। जीवन भर कम से कम एक फल का प्रतिदिन सेवन करने से कैंसर जैसी बीमारियों से बचा जा सकता है। दूध-दही एवं घी शरीर के लिए अत्यंत आवश्यक अपने भोजन में दही एवं घी का समावेश अवश्य करना चाहिए। सुबह के नाश्ते में अथवा रात्रि में सोने से पहले हल्का गर्म दूध अवश्य पीना चाहिए। रात में सोने से पहले दूध पीने से पेट की अम्लीयता कम होती है, खाना जल्दी पचता है तथा नींद अच्छी आती है। दूध दही के सेवन से शरीर को विटामिन ए तथा कैल्शियम की पूर्ति होती है जबकि घी का नियमित प्रयोग करने से जोड़ों के दर्द नहीं होते और जोड़ों का प्रोपर लुब्रिकेशन होता है। पनीर की जगह खाएं सूखे मेवे भोजन में पनीर बहुत कम मात्रा में प्रयोग करना चाहिए। यह मुश्किल से पचता है। इसकी जगह सूखे मेवों का सेवन करें। इनमें विशिष्ट प्रकार के ऑयल होते हैं जो हमारे शरीर की विभिन्न प्रकार की मांसपेशियों एवं मस्तिष्क को ऊर्जा देते हैं। अच्छा साहित्य पढ़ें जीवन में प्रतिदिन कुछ अच्छा पढ़ें। अपनी रुचि का साहित्य पढ़ने से मस्तिष्क को स्फूर्ति मिलती है, साथ ही ज्ञान का भण्डार भी बढ़ता है। सोने से पहले धोएं हाथ-पैर रात्रि में सोने से पहले हाथ-पैर मुंह धोने से शरीर को आराम मिलता है, नींद अच्छी आती है। स्वयं से पूछें सवाल प्रतिदिन सोने से पहले स्वयं से कुछ सवाल करें कि आज हमने क्या अच्छा किया और क्या बुरा किया। अगले दिन से अच्छी बातों को करने और बुरी बातों को न करने का संकल्प दोहराएं और ईश्वर को प्रणाम करके सोएं तथा उन्हें एक अच्छे दिन के लिए धन्यवाद कहें। प्रातः आंख खुलने पर ईश्वर को प्रणाम करके बिस्तर छोड़ें तथा ईश्वर से मांगें कि हमारा तथा हमारे परिवार का जीवन लम्बा हो, अच्छा हो तथा सुखी हो। इस प्रकार करें दिन का विभाजन इस आलेख में बहुत सारी बातें कही गई हैं जिन्हें सुनने से ऐसा लगता है कि मनुष्य पूरे दिन यही सब करता रहेगा तो फिर काम कब करेगा! इस आलेख में बताई गई दिनचर्या का प्रबंधन करना बहुत आसान है। दिन में आठ घण्टे काम करें, आठ घण्टे निद्रा एवं विश्राम करें तथा आठ घण्टे अपने शरीर, मन एवं रिश्तों को स्वस्थ एवं दीर्घायु बनाने में लगाएं। एक बार जब हम अपनी दिनचर्या को व्यवस्थित कर लेते हैं तो प्राणायाम, व्यायाम, भ्रमण, धूप सेवन, तेल मालिश आदि कार्यों में एक घण्टे से अधिक समय नहीं लगता है। इस आलेख को ध्यान से पढ़ने के लिए धन्यवाद। आप इसे यूट्यब चैनल ळसपउचे व िप्दकपंद भ्पेजवतल इल क्तण् डवींदसंस ळनचजं पर भी देख सकते हैं। हम चाहते हैं कि संसार में प्रत्येक प्राणी, स्वस्थ, सुखी एवं प्रसन्न रहे।

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