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  • राजकीय कार्यालयों में नैतिकता एवं शिष्टाचार

     06.06.2017
    राजकीय कार्यालयों में नैतिकता एवं शिष्टाचार

    राजकीय कार्यालयों में नैतिकता एवं शिष्टाचार

    इस आलेख में निम्नलिखित प्रश्नों का उत्तर जानने का प्रयास किया गया है-

    1. नैतिकता क्या है?

    2. शिष्टाचार क्या है?

    3. नैतिकता और शिष्टाचार में क्या अंतर है?

    4. कार्यालय में नैतिकता क्या है?

    5. क्या भारतीय सरकारी कार्यालयों में नैतिकता देखने को मिलती है?

    6. कार्यालय में शिष्टाचार क्या है?

    7. क्या भारतीय सरकारी कार्यालयों में शिष्टाचार देखने को मिलता है?

    8. क्या हमने कभी अपने मन से सवाल किए हैं कि हम अपने कार्यालय में नैतिकता और शिष्टाचार का वातावरण बनाएं?

    9. भारत के सरकारी कार्यालयों में शिष्टाचार एवं नैतिकता की समस्या क्यों है?

    10. कार्यालयों में नैतिकता नहीं होने के क्या दुष्परिणाम हो सकते हैं? 1

    1. भारतीय सरकारी कर्मचारी ऐसे क्यों हैं?

    12. कृपया अब बताएं कि आपकी अपने बारे में क्या धारणा है- (अ.) क्या आप शिष्ट हैं, (ब.) क्या आप नैतिक हैं?

    1. नैतिकता क्या है?

    ʘ सामान्यतः मानव जीवन के शाश्वत मूल्य ही, नैतिकता हैं। ये हर देश में, हर काल में और हर व्यक्ति के लिए लगभग एक से रहते हैं!

    ʘ यहाँ लगभग शब्द का प्रयोग किया गया है, तो क्या ये बदलते भी हैं?

    ʘ सदा सत्य बोलो, दूसरे के धन का अपहरण मत करो, भूखे को भोजन दो, किसी का दिल मत दुखाओ........ ये सब नैतिक मूल्य हैं। हर युग में एक से रहते हैं, कभी नहीं बदलते।

    ʘ कुछ नैतिक मूल्य ऐसे भी होते हैं जो देश, काल और पात्र के साथ बदल सकते हैं जैसे राष्ट्र-प्रेम। उदाहरण के लिए कोई व्यक्ति अपना देश छोड़कर किसी दूसरे देश की नागरिकता प्राप्त करता है। यहाँ राष्ट्र-प्रेम, शाश्वत नैतिक मूल्य होते हुए भी अपने अर्थ बदल लेता है। मान लीजिए कि किसी समय उन दोनों देशों में युद्ध होता है, तो वह व्यक्ति किस राष्ट्र के विजय की कामना करेगा! निःसंदेह यह उन परिस्थितियों पर निर्भर करेगा, जिनके कारण उसने पुराने राष्ट्र का त्यागकर नए राष्ट्र की नागरिकता ली थी। उदाहरण के लिए हम सानिया मिर्जा और अदनान सामी के नामों पर विचार करें, इनके मन में राष्ट्र-प्रेम की क्या परिभाषा होती होगी !

    ʘ जब मानवता और राष्ट्र दोनों में से एक चुनना हो तो मानवता का चयन ही नैतिकता है। जब राष्ट्र और अपने परिवार में से एक का चयन करना हो तो राष्ट्र का चयन नैतिकता है। हालांकि इस पर बहस हो सकती है। एक सैनिक को शत्रु राष्ट्र पर परमाणु बम डालने के लिए दिया जाए तो वह अवश्य सोचेगा कि यहां नैतिकता क्या है?

    ʘ यही कारण है कि देश, काल और पात्र के साथ नैतिकता बदल सकती है।

    2. क्या लोग वास्तव में नैतिक हैं?

    ʘ हम सब जानते हैं कि विश्व में समस्त प्राणी अपनी संतान से अथाह प्रेम करते हैं। बंदरिया अपने बच्चे को तब तक छाती से चिपकाए रहती है या पीठ पर लादे रहती है जब तक कि वह स्वयं अपनी रक्षा करने में सक्षम नहीं हो जाता। यदि किसी बंदरिया को उसके बच्चे सहित पानी के हौद में डाला जाए तो वह बच्चे को अपनी पीठ पर चढ़ा लेगी ताकि बच्चा पानी में न डूब जाए। अब यदि हौद में पानी का स्तर बढ़या जाए तो बंदरिया बच्चे को अपने सिर रख रखकर खड़ी हो जाएगी। यदि पानी का स्तर बंदरिया की नाक की ऊंचाई तक बढ़ाया जाए तो बंदरिया उस बच्चे को हौद में रखकर स्वयं उस पर खड़ी हो जाएगी और अपने प्राण बचाने का प्रयास करेगी। संसार में अधिकतर लोगों में नैतिकता का सम्बन्ध बंदरिया और उसके बच्चे के जैसा है।

    ʘ संसार में सबकी नैतिकता बंदरिया जैसी नहीं है। इसीलिए संसार में नैतिकता सदैव जीवित रहती है। यही आदमी की अंतरआत्मा का दरवाजा खटखटाती है और उसे सही मार्ग पर लाने के लिए प्रेरित करती है।

    3. शिष्टाचार क्या है?

    ʘ मनुष्य का वह समस्त आचरण जो कुछ भी मर्यादा में हो, जिसके कारण दूसरों को परेशानी का अनुभव न हो, जिससे वातावरण अच्छा बनता हो, शिष्टाचार कहलाता है। इसमें मनुष्य के चलने, उठने, बोलने, भोजन करने, कुल्ला करने, शयन करने के ढंग से लेकर दूसरों का अभिवादन करने, उनके साथ लेन-देन करने का ढंग सम्मिलित होता है।

    4. नैतिकता और शिष्टाचार में क्या अंतर है?

    ʘ नैतिकता और शिष्टाचार में काफी अंतर है जिसे ठीक-ठीक अनुभव करते हुए भी शब्दों में या परिभाषा में बांध पाना कठिन है।

    ʘ मोटे तौर पर कहा जा सकता है कि नैतिकता और शिष्टाचार में परिमाण अर्थात् मात्रा का अंतर है। जिस बात का प्रभाव ज्यादा मात्रा में होता है, वह सामान्यतः नैतिकता का मामला होती है और जिस बात का प्रभाव कम मात्रा में होता है वह नैतिकता न रहकर शिष्टाचार बन जाती है।

    ʘ आप अपना काम करवाने के लिए किसी को रिश्वत देते हैं तो यह नैतिकता का मामला है और आप अपना काम करवाने के लिए किसी को धन्यवाद देते हैं, यह शिष्टाचार का मामला है।

    ʘ यदि कोई अध्यापक किसी छात्र को ट्यूशन पढ़ने के लिए दबाव बनाने हेतु गाली-गलौच करता है तो यह नैतिकता का मामला है और यदि छात्र के उज्जवल भविष्य की कामना से उसे कटु शब्द कहता है तो यह शिष्टाचार का मामला है।

    ʘ यदि कोई चपरासी आपके कार्यालय का डोक्यूमेंट किसी अन्य व्यक्ति को किसी लालच में अवैधानिक रूप से देने के लिए दौड़भाग करता है तो यह नैतिकता का मामला है। और यदि वही डोक्यूमेंट वैधानिक रूप से देने के लिए यह सोचकर दौड़भाग करता है कि किसी व्यक्ति को दुबारा चक्कर नहीं लगाना पड़े तो यह शिष्टाचार का मामला है।

    ʘ ऑफिस में शराब पीना नैतिकता का मामला है जबकि सिगरेट पीना कुछ सालों पहले तक शिष्टाचार का मामला था, अब यह कानूनी मामला है।

    ʘ किसी व्यक्ति से सेवा लेकर उसे धन्यवाद नहीं देना शिष्टाचार का मामला है न कि नैतिकता का।

    5. कार्यालय में नैतिकता क्या है?

    ʘ समय पर आना नैतिकता है न कि शिष्टाचार।

    ʘ अपना निर्धारित काम समय पर पूरा करना नैतिकता है न कि शिष्टाचार।

    ʘ काम के बदले पुरस्कार, रिश्वत, टिप, कमीशन आदि की मांग करना नैतिकता है न कि शिष्टाचार।

    ʘ किए जा रहे काम के वास्तविक लक्ष्यों को प्राप्त करना नैतिकता है न कि शिष्टाचार।

    ʘ कार्यालय की स्टेशनरी/फर्नीचर/अन्य सामग्री घर नहीं ले जाना नैतिकता है न कि शिष्टाचार।

    ʘ महिला सहकर्मी के साथ फ्लर्ट की कोशिश करना अनैतिकता है जबकि उसके कपड़ों की सामाान्य प्रशंसा करना शिष्टाचार का उल्लंधन है।

    6. क्या भारतीय सरकारी कार्यालयों में नैतिकता देखने को मिलती है?

    ʘ पब्लिक डीलिंग वाले भारतीय सरकारी कार्यालयों में नैतिकता के पालन की स्थिति क्या है, इस पर अधिक बोलने की आवश्यकता नहीं है!

    ʘ आप में से कितने लोग हैं जो बिना जान पहचान के भी आरटीओ ऑफिस में अपना ड्राइविंग लाइसेंस बनवा सकते हैं या रिन्यू करवा सकते हैं!

    ʘ कितने लोग भूमि क्रय करने के लिए सरकार द्वारा निर्धारित फार्म स्वयं भरकर बिना वकील या दलाल के, भूमि का पंजीयन करवा सकते हैं?

    ʘ क्या आप सरकारी अस्पताल में जाकर डॉक्टर को दिखाकर संतुष्ट हो पाते हैं। आपमें से कितने लोग हैं जिसने आज तक किसी सरकारी डॉक्टर के घर जाकर और फीस देकर अपना इलाज नहीं करवाया?

    ʘ क्या आप किसी भारतीय मंत्री या अधिकारी के कार्यालय में जाकर यह सही सही जान सकते हैं कि मंत्री या अधिकारी वास्तव में किस दिन और किस समय अपने ऑफिस में मिलेंगे!

    ʘ आपमें कितने लोग हैं जिन्होंने अपना पासपोर्ट बनवाने के लिए पुलिस कर्मचारी को रुपए दिए या नहीं दिए!

    ʘ नौकरी के लिए पुलिस वैरीफिकेशन के लिए कितने लोगों ने पैसे दिए या नहीं दिए?

    ʘ रेलवे स्टेशन पर कुली कितने पैसे लेता है, कितने निर्धारित हैं, पहले स्टेशनों पर लिखा रहता था, क्या अब किसी ने लिखा हुआ देखा है?

    ʘ प्राइवेट स्कूटर स्टैण्ड पर नगर निगम या रेलवे या रोडवेज द्वारा कार, स्कूटर के लिए कितना शुल्क निर्धारित होता है, वह कितना लेता है?

    ʘ ये सब सरकारी कार्यालयों की नैतिकता के उल्लंघन के मामले हैं।

    7. कार्यालय में शिष्टाचार क्या है?

    ʘ राजस्थान सरकार ने कोड ऑफ कण्डक्ट बना रखा है जिसका पालन प्रत्येक अधिकारी एवं कर्मचारी को करना होता है इसमें नैतिकता और शिष्टाचार सम्बन्धी आचरण ही निर्धारित किए गए हैं।

    ʘ कार्यालय के बाहर एवं प्रत्येक कक्ष के बाहर, अधिकारी एवं कर्मचारी की टेबल पर उसका नाम, पदनाम लिखा हुआ होना चाहिए।

    ʘ यदि अधिकारी या कर्मचारी के लिए वर्दी निर्धारित है तो वर्दी पर भी नेमप्लेट होनी चाहिए।

    ʘ कार्यालय के बाहर लिखें कि यह कितने बजे खुलता है और कितने बजे बंद होता है।

    ʘ कार्यालय के बाहर लिखें कि यहां जनता से सम्बन्धित कौनसे कार्य होते हैं।

    ʘ कार्यालय के बाहर लिखें कि जनता अपने किस कार्य के लिए किस अधिकारी या कर्मचारी से मिले।

    ʘ कार्यालय के बाहर लिखें कि यदि आप इस कार्यालय के किसी अधिकारी या कर्मचारी से असंतुष्ट हैं तो आपको किससे सम्पर्क करना चाहिये और किस समय?

    ʘ कार्यालय के बाहर सूचना के अधिकार के तहत चस्पा की जाने वाली सूचनाएं लिखें।

    ʘ कार्यालय के बाहर लिखें कि इस कार्यालय में कितने अधिकारी और कर्मचारी काम करते हैं, उनमें से आज कितने और कौन-कौन अवकाश पर है।

    ʘ जन सामान्य के लिए छाया, पेयजल एवं बैठने की समुचित व्यवस्था करें।

    ʘ ऑफिस भीतर एवं बाहर से साफ-सुथरा हो। बाथरूम रोज धुलें। उनमें पानी हो।

    ʘ ऑफिस समय पर पहुंचना जरूरी क्यों? कुछ पुराने बाबू कुर्सी पर कोट टांगकर या मेज पर चश्मा रखकर चले जाते थे। ऐसा न करें।

    ʘ ऑफिस में टेलिफोन और सैलफोन का प्रयोग कब, कितना, कैसे करें। घर के टेलिफोन ऑफिस में नहीं निबटाएं।

    ʘ टेलिफोन उठाते ही अपने कार्यालय या संस्था का नाम बताएं।

    ʘ यदि सामने वाला पूछे कि आप कौन बोल रहे हैं तो अपना नाम एवं पदनाम बताएं। अपना नाम बताने में शर्म क्यों आती है? बड़े-बड़े अधिकारी अपना नाम बताते हैं।

    ʘ मैं आपकी क्या सेवा/सहायता कर सकता हूं, जैसे शब्द बोलें। मशीन की तरह नहीं, इंसान की तरह।

    ʘ ईमेल देखते रहने की आदत डालें। पर्सनल नहीं, ऑफिशियल।

    ʘ ऑफिस आवर्स में सोशियल वैबसाइट्स फेसबुक, ट्विटर, लिंक्डइन आदि का व्यक्तिगत प्रयोग न करें। इससे काम से ध्यान हटता है।

    ʘ कार्यालयों में पार्टियों का आयोजन कैसे करें। लंच को सामूहिक भोज एवं सरकारी समय की बर्बादी का जरिया न बनाएं।

    ʘ साथी अधिकारियों एवं कर्मचारियों की आलोचना एवं निंदा से बचें। अन्यथा आप भी इसका शिकार हो जाएंगे। वातावरण दूषित होगा। लोगों की कार्यक्षमता घटेगी।

    ʘ पॉलिटिक्स, क्रिकेट, फिल्म आदि को लेकर डिस्कशन्स न करें।

    ʘ अपने कुत्ते को ऑफिस में न लाएं।

    ʘ अपने छोटे बच्चों को ऑफिस में न लाएं। क्रैच या डे बोर्डिंग स्कूल में डालें।

    ʘ उपहार लेने सम्बन्धी निर्देशों का पालन करें।

    ʘ अपने कर्मचारियों अथवा जनता से बात करते समय अपने पद को अपनी वाणी पर हावी नहीं रखें।

    ʘ अधीनस्थ कर्मचारी को गलती करते ही टोकें। अन्यथा यह आदत बन जाएगी।

    ʘ किसी भी वरिष्ठ अधिकारी, साथी अथवा अधीनस्थ को अनावश्यक उपदेश नहीं दें।

    ʘ अपने आचरण से दूसरों को प्रेरित करने का प्रयास करें। (प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा पुस्तक के विमोचन के बाद रैपर को जेब में रख लेने का उदाहरण)

    ʘ अपने कार्य, दायित्व, अधिकार, नियम, सरकारी गतिविधियों, योजनाओं, सरकार में हो रहे परिवर्तनों की जानकारी रखें।

    ʘ किसी दूसरे कर्मचारी का टिफन न खाएं।

    ʘ कार्यालय के किसी भी व्यक्ति से पैसे उधार नहीं मांगें न किसी को दें।

    ʘ कार्यालय में शराब, सिगरेट, गुटखा, अफीम, भांग का प्रयोग न तो स्वयं करें, न किसी अन्य को करने दें।

    ʘ आपकी हेयर स्टाइल, कपड़े बटन बंद करने का ढंग, जूते-मोजों का रंग, सैलफोन का कवर, मोबाइल की रिंग टोन/एसएमएस टोन, आपके पैन का रंग भी आपके शिष्ट होने अथवा न होने की घोषणा करते हैं। ये आपके व्यक्त्वि की चुगली करते हैं।

    ʘ आपका ईमेल एड्रेस आपके शिष्ट होने की पहचान हो सकता है।

    8. क्या भारतीय सरकारी कार्यालयों में शिष्टाचार देखने को मिलता है?

    9. क्या हमने कभी अपने मन से सवाल किए हैं कि हम अपने कार्यालय में नैतिकता और शिष्टाचार का वातावरण बनाएं?

    10. भारत के सरकारी कार्यालयों में शिष्टाचार एवं नैतिकता की समस्या क्यों है?


    ʘ भारत एक सॉफ्ट स्टेट है। यहां कानून उतने कड़े नहीं हैं जितने कि अन्य देशों में हैं।

    ʘ हालांकि रिश्वत खाते हुए पाए जाने पर या वित्तीय कदाचार का दोषी पाए जाने पर अनेक टॉप लेवल ब्यूरोक्रेट्स, पॉलिटीशियन, पुलिस अधिकारी और मिलिट्री जनरल भी जेलों में बैठे हैं। मुख्यमंत्री भी जेलों में बंद हैं।

    ʘ फिर भी भ्रष्टाचार और कदाचार की बीमारी घटने की बजाय बढ़ रही है तो उसके पीछे कौनसा बड़ा कारण है?

    ʘ लोगों में नैतिक शिक्षा का अभाव है। रामायण, महाभारत की कथाएं घरों और स्कूलों में सुनाई जाती थीं। आज कौन सुनाता है!

    ʘ पहले लोग भगवान से डरते थे, अब भगवान का डर मंदिर में जाकर प्रसाद चढ़ाने तक सीमित होकर रह गया है। लोग सोचते थे कि यदि दूसरे का धन हड़पेंगे तो अगले जनम में चुकाना पड़ेगा। अब पण्डित से वास्तु-शांति करवाकर समस्त सुख प्राप्त करने की प्रवृत्ति हो गई है।

    ʘ हजारों साल तक विदेशी आक्रमणों को झेलते रहने, ब्रिटिश काल में भारतीयों की सम्पत्ति का अपहरण किए जाने से भारत में गरीबी की सुरंगें बहुत गहरी हो गई हैं।

    ʘ गरीबी के कारण लोगों की मानसिकता में स्थाई परिवर्तन आ गए हैं। अब यहां गरीबी एक आदत बन चुकी है। लोगों को कितना भी पैसा मिल जाए, उन्हें यही लगता है कि उन्हें और पैसे की आवश्यकता है। इसके लिए वे नैतिकता का उल्लंघन करते हैं। जब कार्यालय में कुछ लोग अनैतिक रास्तों से पैसा कमाते हैं तो बाकी के लोग शिष्टाचार का उल्लंघन करते हुए अनुशासनहीनता का रास्ता पकड़ लेते हैं।

    ʘ लातूर में आए भूकम्प के लिए दुनिया भर से सहायता सामग्री आई। यह सामग्री वरिष्ठ अफसरों की निगरानी में बांटी जा रही थी। कुछ दिनों बाद मीडिया की हैडलाइन इस प्रकार थीं- राहत सामग्री बांटने वालों ने ही पहनी, विदेशी पैंण्टें।

    ʘ इस तरह की घटनाओं से जनता में भ्रष्टाचार के प्रति स्वीकृति बढ़ती है। सिस्टम पर से विश्वास घटता है।

    11. कार्यालयों में नैतिकता नहीं होने के क्या दुष्परिणाम हो सकते हैं?

    ʘ स्वीडिश अर्थशास्त्री गनर माइर्डल ने अपनी पुस्तक एशियन ड्रामा में सॉफ्ट स्टेट की परिभाषा दी है कि उन दक्षिण एशियाई देशों को सॉफ्ट स्टेट कहते हैं जहां सरकारी कर्मचारी अनुशासनहीनता का आचरण करते हैं जिसके कारण समाज में अपराध पनपते हैं। यहां सरकारी कर्मचारी से आशय टॉप ब्यूरोक्रेट्स, मध्यम स्तर के अधिकारी, कर्मचारी, पार्षद, पंच-सरपंच तथा एमएलए, एमपी, मंत्री आदि उन सब लोगों से है जिन पर जनता का काम करने की जिम्मेदारी है और जो किसी भी सेवा के बदले सरकार से वेतन लेते हैं अर्थात् ठेकेदार, सप्लायर और अनुबंध पर लगे कर्मचारी भी। गनर द्वारा प्रस्तुत इस परिभाषा के अनुसार भारत निश्चित ही सॉफ्ट स्टेट है।

    ʘ शिक्षा, चिकित्सा, सड़क, बिजली, पानी जैसे पब्लिक यूटिलिटी विभागों से लेकर पुलिस, प्रशासन और न्याय से जुड़े विभिन्न विभागों तक में भारतीय कर्मचारियों में हर स्तर पर अनुशासनहीनता और भ्रष्टाचार व्याप्त है। जनता अपने न्यायोचित कामों के लिए तरसती रहती है जिनके न होने पर और समाज में रिश्वत, मारपीट, हत्या, बलात्कार तथा लूट जैसे अपराध पनपते हैं। ʘ सरकारी विभागों के कर्मचारियों द्वारा समय पर काम न करने, ढंग से काम न करने, काम से बचने के बहाने ढूंढने तथा छोटे-छोटे कामों के लिये जनता से रिश्वत की मांग करने आदि प्रवृत्तियों के कारण अपराधियों के हौंसले हर समय बुलंद रहते हैं तथा देश में अपराध का ग्राफ काफी ऊंचा बना रहता है।

    ʘ कर्मचारियों में नैतिकता का अभाव होने के कारण आपराधिक अनुसंधान समय पर पूरे न होते, उनके वांछित परिणाम नहीं आते, गवाह मुकरते हैं तथा न्यायालयों में मुकदमों के निर्णय होने में लम्बा समय लगता है इस कारण अपराधियों के हौंसले कभी पस्त नहीं पड़ते।

    ʘ 1960 के दशक से ही भारत में हत्याओं का आंकड़ा बहुत ऊंचा बना हुआ है। वर्ष 2007-08 में भारत विश्व का सर्वाधिक हत्याओं वाला देश बन गया। उस वर्ष भारत में पाकिस्तान की तुलना में तीन गुनी और अमरीका की तुलना में दो गुनी मानव हत्याएं हुई थीं। उस वर्ष देश में 50 लाख अपराध दर्ज हुए थे जिनमें से 32,719 मामले मानव हत्याओं के थे।

    ʘ वर्ष 2014 में भारत में 33,981 हत्याएं रिपोर्ट हुईं जिनमें से 3,332 व्यक्ति घर में ही हत्या के शिकार हुए। असंतोष, अत्याचार और झगड़ों के कारण भारत में प्रतिवर्ष लगभग 1 लाख 35 हजार लोग आत्महत्या करते हैं। इनमें से विवाह, दहेज, विवाह पूर्व प्रेम सम्बन्ध, विवाहेतर प्रेम सम्बन्ध, तलाक एवं पारिवारिक विवादों को लेकर सर्वाधिक आत्महत्याएं होती हैं।

    ʘ भारत में हिंसा के कुल मामलों में से एक तिहाई अपराध घरेलू हिंसा के होते हैं, जिनमें से एक चौथाई मामले 15 से 49 साल की महिलाओं के प्रति घर के ही निकट रिश्तेदारों द्वारा किए जाने वाले यौन शोषण के होते हैं। भारत में होने वाले अपराधों में चौथा नम्बर महिलाओं और बच्चों के साथ होने वाले बलात्कार का है। वर्ष 2012 में भारत में बलात्कार के लगभग 25 हजार मामले रिपोर्ट हुए जिनमें से 98 प्रतिशत मामलों में पीड़ित महिला के साथ उसके किसी परिचित ने ही बलात्कार किया।

    ʘ भारत में प्रत्येक एक लाख बच्चों में से 7,200 बच्चों के साथ बलात्कार होता है। यह आंकड़ा काफी ऊंचा है। वर्ष 2014-15 में हुए एक अध्ययन के अनुसार भारत में बलात्कार के केवल 5-6 प्रतिशत मामले ही रिपोर्ट किए जाते हैं।

    ʘ बलात्कार के अधिकांश मामले सामाजिक प्रवंचना एवं पुलिस के दुर्व्यवहार के कारण महिलाओं एवं बच्चों द्वारा रिपोर्ट ही नहीं किए जाते। फिर भी भारत में बच्चों के विरुद्ध होने वाले लगभग एक लाख अपराध हर वर्ष पुलिस थानों में दर्ज होते हैं। महिलाओं के विरुद्ध होने वाले साढ़े तीन लाख अपराध लगभग हर साल पुलिस थानों मे रिपोर्ट होते हैं।

    ʘ हरियाणा में दो साल पहले आरक्षण आंदोलन में असामाजिक तत्वों ने महिलाओं के साथ सामूहिक बलात्कार किए। यहां तक कि एक देवर ने अपनी भाभी के साथ सामूहिक बलात्कार की घटना को अंजाम दिया। ऐसा करने की हिम्मत क्यों हुई! क्योंकि उन्हें मालूम है कि पुलिस प्रशासन अपना काम इतने घटिया तरीके से करेंगे कि कोर्ट कचहरी भी उनका कुछ नहीं बिगाड़ सकेंगी।

    ʘ स्थिति इतनी भयावह है कि बहुत से देशों ने अपने नागरिकों को यह एडवाइजरी जारी की हुई है कि भारत में जाते समय वे संभावित बलात्कार से सावधान रहें। यहां तक कि समूह में यात्रा करते समय भी महिलाएं भारत में बलात्कार की शिकार हो सकती हैं इसलिये एकांत स्थानों पर तथा रात्रि में सार्वजनिक वाहनों से यात्रा न करें तथा भारतीयों की तरह कपड़े पहनें।

    ʘ उन्होंने यह सलाह नहीं दी कि संकट में पड़ने पर भारत की इन एजेंसियों से सम्पर्क करें। उन देशों का भारतीय एजेंसियों पर वैसा विश्वास ही नहीं है।

    ʘ समाज में असंतोष, अलगाव, उपद्रव, आंदोलन, असमानता, असामंजस्य, अराजकता, आदर्श विहीनता, अन्याय, अत्याचार, अपमान, असफलता अवसाद, अस्थिरता, अनिश्चितता, संघर्ष, हिंसा उस समाज में अधिक होते हैं जहां सरकारी कर्मचारी लोगों का काम नहीं करते। उनके साथ बुरा व्यवहार करते हैं। उन्हें सही सलाह नहीं देते।

    ʘ व्यक्ति में एवं समाज में साम्प्रदायिकता, जातीयता, भाषावाद, क्षेत्रवाद, हिंसा की संकीर्ण कुत्सित भावनाओं व समस्याओं के मूल में उत्तरदायी कारण हमारे भीतर नैतिक और चारित्रिक पतन अर्थात नैतिक मूल्यों का क्षय एवं अवमूल्यन है।

    ʘ देश की सबसे बड़ी शैक्षिक संस्था-राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद के द्वारा उन मूल्यों की एक सूची तैयार की गयी है जो व्यक्ति में नैतिक मूल्यों के परिचायक हो सकते हैं. इस सूची में 84 मूल्यों को सम्मिलित किया गया है.

    12. भारतीय सरकारी कर्मचारी ऐसे क्यों हैं?

    ʘ हिन्दुस्तान टाइम्स तथा सी-4 नामक संस्था द्वारा कुछ वर्ष पहले करवाए गए एक सर्वेक्षण में पाया गया कि भारत में 52 प्रतिशत लोग अपने काम से संतुष्ट नहीं हैं। उनमें नया चैलेंज स्वीकार करने के प्रति कभी उत्साह नहीं होता। ऐसे लोग अपनी नौकरी बचाए रखने के लिए कार्य करते हैं तथा उनके द्वारा किए गए काम के परिणाम औसत से नीचे होते हैं।

    ʘ भारत में 29 प्रतिशत कर्मचारी, काम से बचने के लिए कार्यालय में अपना और दूसरों का समय नष्ट करते हैं। ऐसे लोग दण्ड या प्रताड़ना या वेतन कटौती का खतरा उत्पन्न होने पर मजबूरी में ही काम करने को तैयार होते हैं तथा उनके द्वारा किए गए काम के परिणाम देश की प्रगति को अवरुद्ध करते हैं और जनता के मूलभूत अधिकारों पर बुरा असर डालते हैं।

    ʘ वर्ष 2011-12 में अमरीका एवं कनाडा में टॉवर्स वेस्टन एवं नेशनल बिजनिस गु्रप द्वारा एक शोध में पाया गया कि कर्मचारियों में उत्साह एवं प्रसन्नता तथा उनके द्वारा किए गए कार्यों के परिणामों में सीधा सम्बन्ध होता है। इसलिए वहां 66 प्रतिशत कम्पनियां अपने कर्मचारियों के उत्साहवर्द्धन के कार्यक्रम चलाती हैं।

    ʘ वर्ष 2012 में कॉन्टीनेंटल यूरोप एथिक्स एट वर्क नामक अध्ययन में यह पाया गया कि 77 प्रतिशत कर्मचारियों ने उन कम्पनियों को चुनने का प्रयास किया जो नैतिक संस्कृति के सकारात्मक मानकों के लिए जानी जाती हैं न कि अधिक वेतन देने के लिए। क्योंकि नैतिक संस्कृति वाली कम्पनियों में उन्हें अपना भविष्य अधिक सुरक्षित लगता है।

    ʘ इन कम्पनियों के कर्मचारी अपने साथियों को सुरक्षात्मक कवर देते हुए पाए गए, अर्थात् वे अपने कमजोर साथी को ज्ञान, दक्षता, सूचना आदि देकर मजबूत बनाने का प्रयास करते हैं तथा उसका काम पूरा हो सके इसके लिए भरपूर सहायता करते हैं। यहां तक कि उसकी अनुपस्थिति में कम्पनी को नुक्सान नहीं हो, इसके लिए वे उसका काम भी करते हैं।

    ʘ क्या भारत के कर्मचारी भी ऐसा करते हैं ?

    ʘ हां करते हैं लेकिन तभी जब वह उसकी जाति, उसके क्षेत्र या उसके रिश्ते वाला हो।

    ʘ भारतीय सरकारी कर्मचारियों के बारे में कहा जाता है कि वे अपनी क्षमता का उच्चतम पदर्शन केवल नौकरी प्राप्त करते समय करते हैं। उसके बाद तो जैसे-जैसे समय बीत जाता है, वे अपनी क्षमता का प्रदर्शन बिना काम किए अपनी नौकरी बचाए रखने में करते दिखाई देते हैं।

    13. कृपया अब बताएं कि आपकी अपने बारे में क्या धारणा है ?

    ʘ (अ.) क्या आप शिष्ट हैं,

    ʘ (ब.) क्या आप नैतिक हैं? -डॉ. मोहनलाल गुप्ता,


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