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  • अध्याय - 57 सार्दूल संग्रहालय बीकानेर

     20.12.2018
    अध्याय - 57 सार्दूल संग्रहालय बीकानेर

    अध्याय - 57

    सार्दूल संग्रहालय बीकानेर


    सार्दुल संग्रहालय बीकानेर के लालगढ़ पैलेस के एक भाग में स्थित है। इस संग्रहालय में प्राचीन अस्त्र-शó, राजसी पोशाकें तथा देशी-विदेशी सिक्कों के साथ-साथ कला, संस्कृति और इतिहास से सम्बन्धित विभिन्न प्राचीन एवं दुर्लभ वस्तुओं का संग्रह है।

    बीकानेर नरेश सार्दुलसिंह के जीवनकाल में लालगढ़ पैलेस का एक हिस्सा सार्दुल-महल कहलाता था। बाद में उसी हिस्से में सार्दुल संग्रहालय बना दिया गया। लालगढ़ पैलेस के ऊपरी हिस्से में बने इस संग्रहालय की सीढियां चढ़ते ही एक के बाद एक क्रम से लगाए गए छायाचित्र दिखाई देते हैं। सीढ़ियों के ठीक ऊपर कैमरे से खींचा गया बीकानेर नरेश सरदारसिंह का छायाचित्र लगा हुआ है। कहा जाता है कि राजस्थान में कैमरे से लिया गया यह पहला चित्र है।

    सार्दुल म्यूजियम में प्रवेश करते ही एक तरफ बीकानेर के सभी महाराजाओं के शासनकाल, महाराजा का उसके पूर्ववर्ती महाराजा से सम्बन्ध, राज्यारोहण की तिथि आदि की विस्तृत सूचि लगी हुई है। दूसरी तरफ बीकानेर नरेशों की मिनीएचर पेन्टिंग्स भी लगी हुई हैं। बीकानेर रियासत के जनजीवन, दर्शनीय स्थल, सेठ-सेठानियों, कलाकारों आदि के चित्र भी प्रदर्शित हैं।

    संग्रहालय में बीकानेर स्टेट के सिक्कों के साथ-साथ महाराजा करणीसिंह द्वारा एकत्र किए गए विदेशी सिक्कों का भी अनुपम संग्रह प्रदर्शित है। इनमें बर्मा, फ्रांस, बैल्जियम, कनाडा, टर्की, जापान, चीन, इटली आदि देशों की मुद्राएं सम्मिलित हैं। बीकानेर स्टेट के राजस्व एवं जुडीशियल स्टाम्प, स्टेट के नियम कानूनों की प्रतियां, बीकानेर स्टेट द्वारा दूसरे स्टेटों को लिखे गए महत्वपूर्ण पत्र एवं चित्र भी संग्रहालय में अलग से सुरक्षित रखे हुए हैं। बीकानेर महाराजा तथा उनके दरबारियों के बैठने के क्रम एवं व्यवस्था को दर्शाने वाले दुर्लभ रेखाचित्र भी संग्रहालय की अमूल्य निधि हैं।

    संग्रहालय में, बीकानेर की जेलों के कैदियों द्वारा निर्मित सुन्दर गलीचे भी प्रदर्शित किए गए हैं। गलीचों में धागों से सुन्दर एवं कलात्मक चित्र बुने गए हैं। राजस्व वसूल करने के लिए ऊँट पर रखकर ले जाया जाने वाला एक क्विंटल वजनी पीतल का टोकणा भी प्रदर्शित किया गया है। एक कक्ष में पुरानी फिल्मों का संग्रहालय अलग से बना हुआ है, जिसमें तत्कालीन महाराजाओं द्वारा उस समय देखी जाने वाली फिल्मों को सुरक्षित रखा हुआ है। इसी कक्ष में 35 एम.एम. का साउन्ड फिल्म प्रोजेक्टर भी रखा हुआ है। ई.1921 में न्यूयार्क, अमेरीका में बने इस फिल्म प्रोजेक्टर का उपयोग तत्कालीन शासकों द्वारा अपने निजी उपयोग के लिए किया जाता था। कक्ष से लगती हुई गैलरी में दुल्हन को ले जाने हेतु प्रयुक्त होने वाली खुबसूरत डोली बीकानेर का स्टेट कोच प्रदर्शित है। स्टेट कोच के घोड़े को बांधी जाने वाली लगाम, गद्दी, कोचवान की पोशाक तथा लैस आदि भी प्रदर्शित की गई हैं।

    संग्रहालय में सुप्रसिद्ध चित्रकार ए. एच. मूलर तथा महाराजा करणीसिंह द्वारा बनाए गए चित्र एवं महाराजा करणीसिंह द्वारा उपयोग में लिए जाने वाले वाटर कलर, ब्रश, कैमरे से लिए गए बीकानेर के दर्शनीय स्थलों के चित्र, गोल्फ स्टिक, मेजर जनरल की वर्दी, कैमरे, पुस्तकें, पत्र-पत्रिकाएं तथा करणीसिंह एवं उसकी बहन द्वारा बाल्यकाल में उपयोग में लिए गए खिलौने भी इस कक्ष में संजोकर रखे हुए हैं।

    महाराजा गंगासिंह (ई.1887-1943) एवं महाराजा सार्दुलसिंह (ई.1943-49) द्वारा शिकार में मारे गए विभिन्न जानवरों के चित्र भी प्रदर्शित किए गए हैं। शेर, बाघ आदि जंगली जानवरों के निर्जीव शरीरों में मसाले भरकर उन्हें शोकेस में सुरक्षित रखा गया है। इस कक्ष की उल्लेखनीय वस्तुओं में विभिन्न प्रकार के हवाई जहाजों के मॉडल, महाराजाओं द्वारा प्रयुक्त टेलीफोन, रिकॉर्ड प्लेयर तथा रेलवे स्टेशन का मॉडल आदि रखे गए हैं।

    सार्दुल म्यूजियम में बनी 'प्रिंसेज गैलरी' में बीकानेर के राजकुमारों एवं राजकुमारियों के चित्रों के साथ ही अन्य रियासतों के राजकुमारों एवं राजकुमारियों के हस्ताक्षर सहित चित्र प्रदर्शित हैं। महाराजा गंगासिंह के यूरोपियन मित्रों के साथ चित्र, महाराजा की चांदी की कुर्सी, स्टेट में आने वाले मेहमानों के लिए रेलवे स्टेशन पर लगने वाली चांदनी और जाजम, हिन्दी, संस्कृत एवं राजस्थानी की दुर्लभ पुस्तकों का संग्रह भी है। संग्रहालय के एक हिस्से में अनूप संस्कृत पुस्तकालय के एक भाग के रूप में महाराजा अनूपसिंह (ई.1669-98) द्वारा दक्षिण से लायी गई दुर्लभ संस्कृत पुस्तकों को संजोकर रखा हुआ है।

    संग्रहालय में संस्कृत के 6 हजार 682 ग्रंथ, राजस्थानी की हस्तलिखित 359 पांडुलिपियां एवं हिन्दी की 554 पांडुलिपियां संगृहीत हैं। इस लाइब्रेरी में हिन्दी एवं अंग्रेजी की लगभग 12 हजार पुस्तकों का अद्भुत संग्रह उपलब्ध है।

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