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     02.06.2020
    राजस्थान के प्रमुख संग्रहालय  - भूमिका

    भूमिका


    हमारी नई वैबसाइट - भारत का इतिहास - www.bharatkaitihas.com

    संग्रहालय किसी भी नृवंश, देश, प्रांत अथवा नगर के इतिहास, संस्कृति, विज्ञान, कला, लेखन आदि विभिन्न क्षेत्रों में हुए विकास को दिखाने वाला विश्वसनीय दर्पण है। यह दर्शक के समय, श्रम एवं धन की बचत करता है, उसकी बौद्धिक उत्सुकता को परिष्कृत करता है एवं जिज्ञासाओं को शांत करता है। वर्तमान युग में संग्रहालय, सम्पूर्ण विश्व में पर्यटकों के आकर्षकण का मुख्य केन्द्र बनते जा रहे हैं।

    विश्व भर के अनेक देशों से 1 करोड़ से अधिक पर्यटक प्रतिवर्ष भारत आते हैं। विदेशी पर्यटक भारत की आय में 27 बिलियन अमरीकी डॉलर का योगदान करते हैं। यह योगदान भारत के सकल घरेलू उत्पाद में 6.88 प्रतिशत का होता है। प्रत्येक विदेशी पर्यटक भारत में एक-दो अथवा कुछ संग्रहालयों का अवलकोन अवश्य करता है। इस कारण संग्रहालय विदेशी मुद्रा अर्जित करने के सशक्त एवं विश्वसनीय स्रोत बनते जा रहे हैं।

    कहा जा सकता है कि संग्रहालय, विदेशी पर्यटकों के लिए सच्चे राजदूत का काम करते हैं। विदेशी पर्यटकों के साथ-साथ देशी पर्यटक, इतिहास, कला एवं विज्ञान के विद्यार्थी, शिक्षक एवं जनसाधारण भी अपने जीवन में संग्रहालयों का भ्रमण एवं अवलोकन अवश्य करते हैं। संग्रहालयों को देखने से ज्ञान समृद्ध होता है और यह एक अनूठा अनुभव भी होता है। वर्तमान समय के कई महान नगर अपने श्रेष्ठ संग्रहालयों के कारण विश्व भर में जाने जाते हैं।

    राजस्थान में प्रतिवर्ष लगभग 15 लाख विदेशी एवं 4 करोड़ स्वदेशी पर्यटक आते हैं। इन पर्यटकों की सुविधा के लिए पूरे राज्य में सरकारी क्षेत्र में 18 संग्रहालय स्थापित किए गए हैं। अनेक निजी संस्थाएं, व्यक्ति एवं परिवार भी अपने संग्रहालयों का संचालन करते हैं। इस पुस्तक में इन संग्रहालयों में संगृहीत सामग्री के साथ-साथ उनकी विशेषताओं को भी समाहित करने का प्रयास किया गया है।

    पाठकों की सुविधा के लिए पुस्तक के प्रारंभ में संग्रहालय की अवधारणा का विकास, आदिम संग्रहालयों के चिह्न, परग्रही जीवों द्वारा छोड़े गए संग्रहालय, राजस्थान में संग्रहालयों की स्थापना का इतिहास तथा राजस्थान के संग्रहालयों की आधारभूत सामग्री का परिचय दिया गया है।

    आशा है यह पुस्तक शिक्षकों, शोधार्थियों, विद्यार्थियों, पर्यटकों एवं विभिन्न वर्गों के पाठकों के लिए उपयोगी सिद्ध होगी।

    - डॉ. मोहनलाल गुप्ता

    63, सरदार क्लब योजना

    वायुसेना क्षेत्र जोधपुर

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