Blogs Home / Blogs / राजस्थान के प्रमुख संग्रहालय / अध्याय - 28 प्राकृतिक इतिहास संग्रहालय, जयपुर
  • अध्याय - 28 प्राकृतिक इतिहास संग्रहालय, जयपुर

     02.06.2020
    अध्याय - 28 प्राकृतिक इतिहास संग्रहालय, जयपुर

    अध्याय - 28


    प्राकृतिक इतिहास संग्रहालय, जयपुर

    हमारी नई वैबसाइट - भारत का इतिहास - www.bharatkaitihas.com

    जयपुर के रामनिवास उद्यान के मध्य बने जंतुआलय (जू) के दक्षिणी भाग के एक भवन में प्राकृतिक इतिहास संग्रहालय अर्थात् नेचुरल हिस्ट्री म्यूजियम की स्थापना की गई है। जीव जगत के जीवन-व्यवहार तथा उनकी आवासीय पारिस्थितिकी को प्रदर्शित करने वाले संग्रहालय को 'प्राकृतिक इतिहास संग्रहालय' कहा जाता है। इस संग्रहालय में जीवों एवं वनस्पतियों की उत्पत्ति और विकास का वृत्तांत दर्शाया गया है।
    इस संग्रहालय की स्थापना और विकास का उद्देश्य जंतुआलय भ्रमण करने हेतु आने वाले पर्यटकों को जीव जगत के अतीत एवं वर्तमान के बारे में जानकारी देना है।

    विश्व के अनेक देशों में विगत तीन शताब्दियों से ऐसे संग्रहालयों के निर्माण हो रहा है। भारत में ऐसे संग्रहालयों की स्थापना का कार्य विगत सौ-सवा सौ वर्षों से हो रहा है। आज से लगभग 125 साल पहले बम्बई में बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसायटी द्वारा ऐसा ही संग्रहालय स्थापित किया गया था जो आज विश्व के श्रेष्ठतम प्राकृतिक इतिहास संग्रहालयों में से एक है। राजस्थान में राजा-महाराजाओं द्वारा बनवाए गए संग्रहालयों में एक प्रकोष्ठ इस विषय पर भी बनवाए गए हैं। जोधपुर, मण्डोर, जयपुर, जैसलमेर, कोटा तथा बीकानेर में रियासतों द्वारा बनवाए गए पुरातत्व संग्रहालयों में बने ये 'खण्ड' राजस्थान में जैविक सम्पदा के संरक्षण एवं संग्रहण की गाथा कहते हैं। स्वतंत्रता प्रापित के पश्चात नई दिल्ली में बारह खम्भा रोड पर स्थित फिक्की भवन में राष्ट्रीय प्राकृतिक इतिहास संग्रहालय बनाया गया जो सजीव जगत की अद्भुत कहानी कहता है।

    जयपुर में बना यह संग्रहालय, अन्य पुरातत्व एवं लोककला संग्रहालयों से सर्वथा भिन्न है। यह जीव-जन्तुओं, पक्षियों तथा प्राकृतिक संसार की जानकारी देने वाला एक अनोखा संग्रहालय है। इसका निर्माण 1980 के दशक में किया गया। इसके निर्माण का श्रेय प्रसिद्ध वन्यजीव विशेषज्ञ पद्मश्री कैलाश सांखला को जाता है जो भारतीय वन सेवा के वरिष्ठ अधिकारी तथा राज्य के मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक थे। उन्होंने विभिन्न मॉडलों, तस्वीरों, चार्ट तथा मानचित्रों की सहायता से इस संग्रहालय को साकार रूप दिया। जयपुर चिड़ियाघर (जंतुआलय) के शताब्दी समारोह के अवसर पर इसे और सुसज्जित किया गया तथा इसे और अधिक जनोपयोगी बनाया गया।

    एक विशाल हॉल में बने इस संग्रहालय को तीन भागों मे विभक्त किया गया है। प्रथम खण्ड में विभिन्न प्रकार के चित्रों के माध्यम से जंगल के राजा बाघ (टाईगर) के प्राकृतिक आवास को दर्शाया गया है। अर्थात् बाघ कैसी वन्य परिस्थितियों में निवास करता है, कैसे उन्मुक्त जीवन व्यतीत करता है, आदि जानकारियाँ दी गई है। इसके साथ एक प्रकोष्ठ में बघेरा (पैंथर), भालू, चिंकारा, काला हिरण, मगरमच्छ, पाटागोह आदि वन्यजीवों के भूसा भरे मॉडल्स को प्राकृतिक अवस्था में दर्शाया गया है। मृत पशुओं की त्वचा में मसाला भरकर रखा गया है जिससे वे हूबहू जीवित प्राणी जैसे प्रतीत होते हैं। इस खण्ड में दीवार पर जंगल की पेटिंग की गई है।

    संग्रहालय के मध्य बने खण्ड में प्रदेश की जैव विविधता को दर्शाने के लिए विभिन्न चार्ट्स, मॉडल्स तथा सूचना पट्ट लगाए गए हैं। भारत में लुप्त होते बाघों के संरक्षण हेतु चलाई जा रही 'प्रोजेक्ट टाईगर' योजना तथा देश के विभिन्न बाघ अभयारण्यों की जानकारी एक सूचना पट्ट पर दी गई है। राजस्थान के विभिन्न वन्यजीव अभयारण्यों की सूचना तथा वहाँ के प्रमुख आकर्षणों को छायाचित्रों के माध्यम से प्रदर्शित किया गया है। एक बड़ी मेज पर भू-आकृति का मॉडल बनाकर वन परिस्थितियों की जानकारी प्रस्तुत की गई है। कुछ चित्रों के पैनल इस तरह बनाए गए हैं कि प्रकाश की पारदर्शिता से उन्हें सहज रूप में देखा जा सकता है। राज्य में विभिन्न स्थानों पर पाए जाने वाले जीव-जन्तुओं की सचित्र जानकारी दी गई है।

    संग्रहालय के तृतीय खण्ड में विभिन्न प्रकार के जीव-जन्तुओं, पक्षियों तथा प्राकृतिक दृश्यों के छायाचित्र प्रदर्शित किए गए हैं। इनमें भरतपुर पक्षी अभयारण्य की पक्षी प्रजनन स्थली के चित्र, बाघ के पानी पीने के चित्र, भांति-भांति की चिड़ियों के चित्र तथा भारतीय पक्षियों के चित्र आदि सम्मिलित हैं। दीवार पर चित्रित वन में उन्मुक्त विचरण करते मृग झुण्डों के दृश्य बहुत लुभावने लगते हैं। अल्बर्ट म्यूजियम हॉल के निकट, रामनिवास बाग में स्थित होने से इस संग्रहालय में दर्शकों का तांता लगा रहता है।

    हमारी नई वैबसाइट - भारत का इतिहास - www.bharatkaitihas.com

  • अध्याय - 28

    अध्याय - 28

    अध्याय - 28


    Share On Social Media:
Categories
SIGN IN
Or sign in with
×
Forgot Password
×
SIGN UP
Already a user ?
×