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  • अध्याय - 54 नेशनल वुडन फॉसिल पार्क जैसलमेर

     19.05.2020
    अध्याय - 54 नेशनल वुडन फॉसिल पार्क जैसलमेर

    अध्याय - 54 नेशनल वुडन फॉसिल पार्क जैसलमेर

    लगभग 18 करोड़ वर्ष पूर्व, राजस्थान नम एवं गर्म जलवायु वाला स्थान था तथा घने जंगलों से परिपूर्ण था। यहाँ विशाल घने जंगल हुआ करते थे। लगभग 18 करोड़ वर्ष पूर्व के घने एवं भरे-पूरे जंगल पृथ्वी की आन्तरिक उथल-पुथल के कारण चट्टानी परतों के नीचे दब गए। जैसलमेर से 18 किलोमीटर दूर अव्वल गांव के निकट नेशनल वुडन फॉसिल पार्क स्थित है। वर्ष 1976 में 'आर्कोलोलिकल सर्वे आफ इंडिया' के वैज्ञानिकों ने एक सर्वेक्षण के दौरान 15 काष्ठ जीवाश्म के तनों को खोज निकाला। इन काष्ठ जीवाश्मों को संरक्षित कर वुडन फॉसिल पार्क के रूप में विकसित किया गया।

    वुडन फॉसिल पार्क में काष्ठ जीवाश्मों की लम्बाई एक मीटर से 10 मीटर तक है तथा चौड़ाई 30 सेन्टीमीटर से एक मीटर तक है। ये काष्ठ जीवाष्म लाठी शैल समूह (आयु लगभग 18 करोड़ वर्ष) के बलुआ शिलाओं से मेल खाते हैं जो इस बात का प्रमाण है कि यह स्थान 18 करोड़ वर्ष पूर्व नम एवं गर्म जलवायु वाला था। इसी कारण यह स्थान जंगलों से भरा-पूरा था।

    लाठी समूह की अवसादीकरण की क्रिया के फलस्वरूप वृक्षों के तनों की मुलायम छाल गल गई। कठोर तने वाला भाग अत्यधिक दबाव के कारण सिलिका आदि से मिलकर काष्ठ जीवाश्म की शिलाएं बन गया। इस प्रक्रिया के परिणामस्वरूप इन तनों की आन्तरिक संरचना में कोई विशेष अन्तर नहीं आया। ये वृक्षों के तने उसी रूप में दबे रह गए जिन्हें काष्ठ जीवाश्मों के रूप में पहचाना जा सकता है।

    इन अवशेषों की सुरक्षा के लिए उन्हें लोहे की जालियों से ढका गया है। जैसलमेर का यह नेशनल वुडन फॉसिल पार्क राष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर आने के कारण पर्यटकों के आकर्षण का केन्द्र बना हुआ है। व्यावहारिक रूप में यह पार्क नहीं है अपितु काष्ठ जीवाश्मों 'वुडन फॉसिल' का संग्रहालय है।

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