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  • अध्याय - 61 नाहटा कला संग्रहालय सरदारशहर

     21.12.2018
    अध्याय - 61 नाहटा कला संग्रहालय सरदारशहर

     अध्याय - 61


    नाहटा कला संग्रहालय, सरदारशहर

    यह संग्रहालय चूरू जिले के सरदारशहर के विख्यात नाहटा परिवार का निजी संग्रहालय है। सरदार शहर के मध्य में घण्टाघर के निकट नाहटा हवेली स्थित है। इसी हवेली के एक कक्ष में यह छोटा सा संग्रहालय बना हुआ है। इस संग्रहालय में लगभग एक हजार कलाकृतियां एवं ऐतिहासिक सामग्री संजोई गई है। संग्रहालय का लगभग दो-तिहाई हिस्सा मालचन्द जांगिड़ और उसके परिवार के सदस्यों द्वारा बनाई गई कलाकृतियों तथा हाथीदांत की कलाकृतियों से समृद्ध है। चूरू शहर का मालचंद जांगिड़ का परिवार चंदन की लकड़ी और हाथीदांत पर बारीक काम के लिए विश्वविख्यात है।

    इस परिवार में स्वर्गीय मालचंद जांगिड़ ने लगभग एक सौ वर्ष पूर्व, चन्दन की लकड़ी पर नक्काशी का कार्य आरम्भ किया था। उसकी प्रथम कलाकृति चंदन की लकड़ी से बना हुआ एक कलात्मक बादाम था जो आज भी सरदार शहर के संग्रहालय की शोभा बढ़ा रहा है। इस परिवार की कलाकृतियों की उत्कृष्टता का अनुमान इस बात से लगाया जा सकता है कि स्वर्गीय मालचंद जांगिड़ के बेटे और पोते को राष्ट्रपति द्वारा पुरस्कृत किया गया।

    काष्ठकला की सूक्ष्म कृतियों में भारत का एक मानचित्र भी है जिसमें देश के दर्शनीय स्थलों को दर्शाया गया है। लकड़ी की घड़ी में ताजमहल, करणी माता का मंदिर, लकड़ी से ही निर्मित तरबूज की फांक में पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की सवारी, लकड़ी से बने विशालाकाय कद्दू में महाराणा प्रताप और चित्तौड़ का विजयस्तम्भ, तलवार, आभूषण आदि नाना प्रकार की कलाकृतियां इस संग्रहालय में रखी हुई हैं। ऊँट पर सवार राजस्थानी दम्पत्ति, तलवार में शिवाजी, महाराणा प्रताप, पृथ्वीराज चौहान, राजस्थानी शाक सब्जी और भोजन, हवेलियों की बनावट, राजस्थान की संगीत परम्परा, ऊँट पर बीकानेर नरेश गंगासिंह की सवारी का दृश्य आदि अनेक कलाकृतियों को संजोया गया है।

    इसी कक्ष में बीकानेर के शासकों- गंगासिंह, सार्दूलसिंह और करणीसिंह के मुंह बोलते चित्र हैं। स्वर्गीय शुभकरण नाहटा एवं उनके परिजनों की तस्वीरें भी लगी हुई हैं। रानी विक्टोरिया, गांधीजी, नेहरू आदि के आकर्षक चित्र लगे हुए हैं। शारीरिक आकृति को नाना रूपों में दिखाने वाले बेल्जियम के शीशे, विदेश से लाए गए ताम्बे के कलश, चीन की कलात्मक पॉटरी, राजप्रासादों से लाई गई प्राचीन कुर्सियां, अखरोट की लकड़ी से बनी कलात्मक गोल मेज भी संग्रहालय की शोभा बढ़ा रही हैं। शेर की एक मुखाकृति भी दर्शकों को अपनी ओर आकर्षित करती है। इस शेर का शिकार महाराजा गंगासिंह ने किया था। जैन संस्कृति एवं जैन तीर्थंकरों की झांकी भी चित्रों एवं अष्टधातु की प्रतिमाओं के माध्यम से प्रदर्शित की गई है।

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