Blogs Home / Blogs / राजस्थान के प्रमुख संग्रहालय / अध्याय - 51 राजकीय संग्रहालय जैसलमेर
  • अध्याय - 51 राजकीय संग्रहालय जैसलमेर

     19.05.2020
    अध्याय - 51 राजकीय संग्रहालय जैसलमेर

    अध्याय - 51


    राजकीय संग्रहालय जैसलमेर

    विश्व प्रसिद्ध थार रेगिस्तान में 12वीं सदी में राव जैसल द्वारा बसाए गए जैसलमेर नगर में राजकीय संग्रहालय की आधारशिला 5 दिसम्बर 1979 को रखी गई और 14 फरवरी 1984 को विधिवत् उद्घाटन करवा कर जन-साधारण के लिए खोला गया। संग्रहालय में काष्ठ-जीवाश्म, पाषाणकालीन हथियार, शिलालेख, ताम्रपत्र, परिधान, जैसलमेर के पाषाण से निर्मित कलाकृतियां, सिक्के, हस्तशिल्प तथा इस क्षेत्र के स्मारकों, स्थलों और पर्यटन स्थलों की पुरासामग्री प्रदर्शित की गई है।

    जीवाश्म

    थार रेगिस्तान आज से लगभग 18 करोड़ वर्ष पहले हरा-भरा जंगल था। उससे पहले यहाँ द्रुमकुल्य नामक समुद्र लहराता था। जब यह समुद्र सूख गया तो उसके गर्भ में निवास करने वाले जीव-जन्तुओं एमोनाइट, सीप आदि जीवाश्म में बदल गए। इसी प्रकार समुद्र के किनारे खड़े जंगलों में खड़े पेड़ भी जीवाश्म में बदल गए। जैसलमेर के राजकीय संग्रहालय में इन जीवाश्मों का प्रदर्शन किया गया है। ये जीवाश्म लगभग 4.5 से लेकर 18 करोड़ वर्ष तक पुराने हैं। इन्हें प्रामाणिक जानकारी के साथ प्रदर्शित किया गया है।

    पाषाणकालीन हथियार

    इस क्षेत्र के आदि मानव द्वारा निर्मित 50,000 वर्ष प्राचीन पुरापाषाण और उत्तर पाषाण कालीन हथियार संग्रहालय में प्रदर्शित हैं जो आदिमानव के विकास की कहानी कहते हैं। ये हथियार लूनी नदी घाटी में निवास करने वाले आदिमानव द्वारा प्रयुक्त किए गए थे। यहाँ प्रयुक्त प्रस्तर उपकरणों एवं औजारों को तिलवाड़ा के उत्खनन से प्राप्त किया गया है।

    प्रतिमाएँ

    संग्रहालय में लोद्रवा से प्राप्त 12वीं सदी की प्रतिमाएँ प्रदर्शित की गई हैं जिनमें अर्द्धनारीश्वर, सुर-सुंदरी, चंवरधारी विष्णु, प्रणयलीन प्रतिमा, कार्तिकेयी, स्थानक कुबेर आदि की मूर्तियां प्रमुख हैं। किराडू से प्राप्त पत्र लिखती तथा पैर से कांटा निकालती सुरसुन्दरी की प्रतिमाएँ प्रदर्शित की गई हैं। किराडू की मूर्तियों में समृद्ध कला-सौष्ठव स्पष्ट परिलक्षित होता है। सुर-सुन्दरियों की भाव-भंगिमाएं खजुराहो की याद दिलाती हैं मानो इन प्रतिमाओं में नारी देह का सम्पूर्ण सौन्दर्य साकार हो उठा हो। किराडू से प्राप्त विष्णु की त्रिभंग-मुद्रा की प्रतिमा उल्लेखनीय है। बूंदी से प्राप्त गणेश प्रतिमा एवं नवग्रह फलक प्रदर्शित किए गए हैं। खड़े गणेश की एक प्रतिमा उल्लेखनीय है।

    जैसलमेर से प्राप्त शिवपार्वती की प्रतिमा विशेष निधि के रूप में प्रदर्शित की गई है। धूलमनी (गंगानगर) से प्राप्त द्वितीय शताब्दी ईस्वी का कुषाण-कालीन मिट्टी का बना ऊँटनुमा अंलकृत खिलौना प्रदर्शित है। पार्श्वनाथ जैन मंदिर के सूत्रधार द्वारा तैयार की गई महिषासुर मर्दिनी की प्रतिमा भी दर्शनीय है जो जैसलमेर में संवत् 1475 में तैयार कराकर पूगल ले जाई गई थी।

    शिलालेख एवं ताम्रलेख

    बाड़मेर क्षेेत्र के ग्राम मांगला का वि. संवत् 1239 का ताम्रपत्र इस क्षेत्र में परामार शासकों द्वारा मांगतेश्वरी देवी के मंदिर बावड़ी, कुओं के निर्माण की जानकारी देता है। ग्राम कुलधरा से वि.सं. 1795 के स्मृति लेख से ज्ञात होता है कि उस काल में माता-पिता के स्वर्गवास के पश्चात्, पुत्रों द्वारा इस प्रकार के स्मृति लेख लगाए जाने की परम्परा रही थी।

    सिक्के

    जैसलमेर संग्रहालय में सिंध के अरब गर्वनरों के सिक्के, जैसलमेर राज्य के अखेशाही सिक्के, जोधपुर राज्य के सिक्के एवं पंचमार्क गधैया सिक्के प्रदर्शित किए गए हैं।

    कलात्मक परिधान

    इस क्षेत्र की कसीदाकारी विख्यात रही है। इस माध्यम से यहाँ के कलाकारों ने दैनिक उपयोग की वस्तुओं सहित वस्त्रों को लघु दर्पणों एवं सुई की कसीदाकारी से अलंकृत किया है।घोड़े और ऊँट की पोशाकों को भी कसीदाकारी से अलंकृत किया गया है। दैनिक उपयोग में लाये जाने वाले कसीदाकरी से अलंकृत वस्त्र भी प्रदर्शित किए गए हैं।

    विविध

    संग्रहालय में हस्तशिल्प से निर्मित झरोखा प्रदर्शित किया गया हैं। ऊँट के चमडे़ पर सोने का काम, चित्रित खांडा, इडाणी, कठपुतलियां, मथनी, लघुचित्र, काष्ठकला के नमूने, जैसलमेर पत्थर के प्लेट, फूलदान, कमलदान, पेपरवेट, कप-प्लेट आदि प्रदर्शित हैं। विलुप्त होते राज्य पक्षी गोडवाण को स्टफ कराकर प्रदर्शित किया गया है। सौन्दर्य की प्रतिमूर्ति मूमल का चित्र भी महेन्द्र के साथ प्रदर्शित किया गया है।

    हमारी नई वैबसाइट - भारत का इतिहास - www.bharatkaitihas.com

  • अध्याय - 51

    <"/> अध्याय - 51

    <"> अध्याय - 51

    <">
    Share On Social Media:
Categories
SIGN IN
Or sign in with
×
Forgot Password
×
SIGN UP
Already a user ?
×