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  • अध्याय - 41 बिड़ला तकनीकी संग्रहालय पिलानी

     02.06.2020
    अध्याय - 41 बिड़ला तकनीकी संग्रहालय पिलानी

    अध्याय - 41 

    हमारी नई वैबसाइट - भारत का इतिहास - www.bharatkaitihas.com

    बिड़ला तकनीकी संग्रहालय पिलानी इस संग्रहालय की स्थापना ई.1954 में की गई थी। इसके लिए ई.1964 में भव्य भवन बनाया गया तथा ई.1970 में इसे नए भवन में स्थानांतरित किया गया। यह लगभग 50 हजार वर्ग फुट क्षेत्रफल में स्थित है। इस संग्रहालय में स्वतंत्र भारत में विज्ञान एवं तकनीकी क्षेत्र में हो रहे विकास एवं उपलब्धियों को दर्शाने वाली दीर्घाएं स्थापित की गई हैं।


    कोयला खान दीर्घा

    संग्रहालय में कोल माइन्स का प्रदर्शन पूरे एशिया में अकेला माना जाता है। इसमें खान से कोयला निकालने एवं अन्य खनिज निकालने का तरीका एवं शोधन की विधियां दिखाई गई हैं। बटन दबाते ही विभिन्न रंगों की रोशनी में कोयला, खान एवं खनिज दिखाई देते हैं जिन्हें देखना एक रोमांचक अनुभव है।

    विद्युत शक्ति

    इस दीर्घा में भाप का इंजन, टर्बाइन, कोयले से विद्युत उत्पादन, बांध एवं नदी घाटी परियोजनाएं, आण्विक ऊर्जा आदि की जानकारी दी गई है। आज के युग में विद्युत की कमी को दूर करने के लिए किस प्रकार ऊर्जा प्राप्त करें तथा इसका सदुपयोग कैसे किया जाए, इसकी भी जानकारी मिलती है।

    खनिज धातु

    इस दीर्घा में दिखाया गया है कि भूगर्भ में छिपे खनिज अयस्क से धातु किस प्रकार प्राप्त की जा सकती है। लौहअयस्क से लोहा प्राप्त करने एवं लोहे को इस्पात में परिवर्तित करने की विधि बताई गई है। इसके अलावा यहाँ एल्यूमिनियम बनाने और विभिन्न प्रकार की मशीनरी का भी प्रदर्शन किया गया है।

    यातायात (सामान ढुलाई)

    सामान ढुलाई के संसाधन के अभाव में मनुष्य की प्रगति संभव नहीं है। इस दीर्घा में सड़क, रेलवे तथा यातायात के विभिन्न साधनों के साथ समुद्री जहाज के विभिन्न भागों यथा इंजन, यात्री कक्ष, मनोरंजन कक्ष एवं सामान रखने की जगह का प्रदर्शन किया गया है। इसके अतिरिक्त अन्य यातायात साधनों के विकास को भी दर्शाया गया है।

    अंतरिक्ष विजय

    इसमें एक अंधेरी सुरंग बनी हुई है जिसमें सैलानियों के प्रवेश करते ही अंतरिक्ष के समान दृश्य दिखाई देता है। देखने वालों को ऐसा लगता है जैसे वह अंतरिक्ष में सैर कर रहे हैं। उन्हें चंद्रमा एवं तारे साकार रूप से देखने का आभास होता है। इस प्रदर्शन में चंद्रमा पर अपोलो यान किस तरह से उतरा तथा भविष्य में बसने वाले लूनर सिटी (चांद-तारों का शहर) की बसावट की कल्पना की गई है।

    खान एवं भूगर्भ खनन

    इस दीर्घा में भारत एवं विश्व की महत्वपूर्ण खानों के मॉडल बनाकर प्रदर्शित किए गए हैं। महत्वपूर्ण खनिजों के नमूने एवं उनकी विस्तृत जानकारी के साथ खानों के नक्शे भी दर्शाए गए हैं।

    इलैक्ट्रोनिकी युग

    वैज्ञानिक युग में इंसान की जीवन शैली में काफी परिवर्तन आया है जिसे यहाँ प्रदर्शित किया गया है। यहाँ मनुष्य की आकृति में बनाया हुआ एक रोबोट है जो माइक्रो प्रोसेसर से नियंत्रित है। यह रोबोट दर्शकों का अभिवादन करता है एवं इलैक्ट्रोनिक दीर्घा का वृत्तांत सुनाता है। इसमें कम्प्यूटर पहेलियां, वीडियो और स्लाइड प्रदर्शन एवं संगीत फव्वारा भी बना हुआ है।

    रसायन एवं रसायन शास्त्र

    इस दीर्घा में भूगर्भ से निकलने वाले कच्चे तेल एवं गैस की विधियां तथा उन्हें संयंत्र द्वारा संशोधित करने की विधि का प्रदर्शन किया गया है। सीमेंट, कागज, रबड़, सोड़ा, कैल्शियम कार्बाइड तथा दूसरे अन्य महत्वपूर्ण उत्पाद बनाने की विधियों की सम्पूर्ण प्रक्रिया को नक्शे एवं चार्टों के माध्यम से दर्शाया गया है।

    वस्त्र निर्माण

    वस्त्र निर्माण के तहत कॉटन, जूट, रेयन एवं अन्य धागे बनाने के बारे में बताया गया है। पुराने वस्त्र बनाने की जुलाहा पद्धति से लेकर आधुनिक मशीनों से वस्त्र बनाने की विधि प्रदर्शित की गई है।

    यूरेका गैलेरी (साइंस गैलेरी)

    साइंस गैलेरी में भौतिक विज्ञान के सिद्धांतों को प्रदर्शित किया गया है। इसमें यांत्रिक, ऊष्मा, ध्वनि, प्रकाश, चुम्बकत्व एवं विद्युत प्रगति की प्रदर्शनियां हैं। विज्ञान की अन्य शाखाओं के सिद्धांत जैसे गणित आदि का प्रदर्शन भी है।

    अस्त्र-शस्त्र

    इस दीर्घा में पुराने हथियारों को प्रदर्शित किया गया है। राजपूताना के परम्परागत अस्त्र-शस्त्रों एवं पेंटिंग के माध्यम से हल्दीघाटी के युद्ध के दृश्य दिखाए गए हैं।

    आर्ट गैलेरी

    म्यूजियम में आर्ट गैलेरी दर्शनीय है। इस दीर्घा में चित्रकला एवं मूर्तिकला के माध्यम से परम्परागत एवं आधुनिक पाश्चात्य शैली का प्रभावशाली चित्रांकन किया गया है। इसमें सुदूरवर्ती भारतीय चित्रकला एवं मूर्तियों के चित्र लगे हुए हैं जिनमें बंगाल स्कूल पेंटिंग, महत्वपूर्ण मंदिरों एवं पुराने वस्त्र निर्माण का चित्रण किया गया है।

    -डॉ. मोहनलाल गुप्ता

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