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  • अध्याय - 26 वैक्स म्यूजियम जयपुर

     01.07.2018
    अध्याय - 26 वैक्स म्यूजियम जयपुर

    अध्याय - 26 वैक्स म्यूजियम जयपुर


    राजस्थान सरकार के पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग द्वारा जयपुर के नाहरगढ़ में जयपुर वैक्स म्यूजियम की स्थापना की गई है। इस दुर्ग का निर्माण अठारहवीं शताब्दी ईस्वी में जयपुर के कच्छवाहा राजाओं द्वारा किया गया था। इस संग्रहालय में इतिहास, कला, संस्कृति, सिनेमा, खेल, विज्ञान आदि क्षेत्रों के प्रसिद्ध व्यक्तियों के मोम एवं सिलिकॉन के पुतले रखे गए हैं।

    इस संग्रह के पुतलों का निर्माण प्रसिद्ध मोमशिल्पी सुशांत रे द्वारा किया गया है। संग्रहालय के रॉयल खण्ड में जयपुर एवं राजस्थान के अन्य रजवाड़ों के प्रसिद्ध राजाओं एवं रानियों के मोम के पुलते रखे गए हैं। ये पुतले इतने सजीव जान पड़ते हैं मानो अभी बोल पड़ेंगे। प्रत्येक पुतले के साथ उस व्यक्ति के युग का परिवेश जीवित करने का प्रयास किया गया है।

    इस संग्रहालय की सजावट अंतर्राष्ट्रीय मानदण्डों के अनुसार की गई है। इस संग्रहालय की संकल्पना वर्ष 2006 में पिंकसिटी फिल्म फैस्टीवल के दौरान अनूप श्रीवास्तव द्वारा की गई। उस समय फिल्म अभिनेता अमिताभ बच्चन के पुतले का अनावरण किया गया। इस प्रकार के पुतलों का संग्रह बनाने के लिए सुशांत रॉय आदि अन्य कलाकारोें को इस परियोजना से जोड़ा गया। शीघ्र ही इस संग्रह के लिए 32 पुतले बना लिए गए। संग्रहालय में एक रॉयल दरबार का निर्माण किया गया है।

    इसमें प्रसिद्ध महाराजाओं एवं महारानियों के मोम के पुतले प्रदर्शित किए गए हैं। महाराजाओं एवं महारानियों के पुतलों की स्थापना के लिए कक्ष बनाने हेतु नाहरगढ़ में स्थित शीश महल की दीवारों एवं स्तम्भों का जीर्णोद्धार किया गया तथा उनमें पुनः अच्छी गुणवत्ता के शीशे जड़े गए ताकि मध्यकालीन रियासती ठाठ का पुननिर्माण किया जा सके ताकि इसे देखकर दर्शक को उसी युग का आभास हो सके। इस कक्ष में एक ऐसा दर्पण रखा गया है जिसमें देखने पर ऐसा आभास होता है मानो राजसी वस्त्र धारण कर लिए हैं। इस दर्पण को इसी वैक्स म्यूजियम के कलाकारों ने तैयार किया है।

    एक अन्य कक्ष जिसमें पहले योद्धा विश्राम किया करते थे, उसे भी शीशमहल में परिवर्तित किया गया है। उसमें श्वेत, नीले, लाल, पीले, हरे कांच के 25 लाख टुकड़े लगाए गए हैं। इसे लगाने में 80 दक्ष कलाकारों ने 180 दिन तक काम किया। इस कक्ष में प्रवेश करते ही 23 कैरेट स्वर्ण मिश्रित जवाहरातों से बनी पट्टियों की रंगोली बनाई गई है। इस कक्ष में पेंटिंग्स, पालकी, झूमर, तथा अन्य कलाकृतियां रखी गई हैं।

    टीकड़ी कांच के टुकड़ों का प्रयोग करके सुंदर पुष्पाकृतियों का निर्माण किया गया है। संग्रहालय में सुप्रसिद्ध वैज्ञानिक आइंस्टीन, अंतरिक्ष यात्री कल्पना चावला, जयपुर की महारानी गायत्री देवी, फिल्म अभिनेता गोविंदा, तिब्बती बौद्ध धर्मगुरु दलाई लामा, भारत के प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी, भारत के राष्ट्रपति अब्दुल कलाम, नर्तक माइकल जैक्सन आदि विश्व प्रसिद्ध व्यक्तियों एवं स्पाईडरमैन जैसे फैंटेसी पात्रों के मोम के पुतले रखे गए हैं।


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