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  • अध्याय - 17 शिल्पग्राम संग्रहालय उदयपुर

     27.06.2018
    अध्याय - 17 शिल्पग्राम संग्रहालय उदयपुर

    अध्याय - 17 शिल्पग्राम संग्रहालय उदयपुर


    शिल्पग्राम संग्रहालय, उदयपुर नगर के पश्चिम में हवाला गांव के निकट ग्रामीण शिल्प एवं लोककला परिसर ‘शिल्पग्राम’ में स्थित है। यह संग्रहालय अरावली पर्वतमालाओं के ग्रामीण परिवेश के बीच स्थित होने से दर्शकों को अनूठा अनुभव प्रदान करता है। इसकी स्थापना 70 एकड़ भूमि में की गई है।

    यह अरावली उपत्यकाओं के ग्रामीण तथा आदिम संस्कृति एवं जीवन शैली को दर्शाने वाला एक जीवन्त संग्रहालय है। इस परिसर में पश्चिमी भारत के पांच राज्यों की पारंपरिक वास्तु कला को दर्शाने वाली झौंपड़ियाँ निर्मित की गई हैं जिनमें इन राज्यों के भौगोलिक एवं सांस्कृतिक परिवेश तथा आदिवासियों के रहन-सहन को दर्शाया गया है।

    इस संग्रहालय में ग्रामीण अंचल में बनने वाली हस्तशिल्प कलाकृतियां प्रदर्शित की गई हैं जिन्हें दर्शक खरीद भी सकते हैं। यहाँ हथकरघों पर कार्य करते हुए बुनकरों को देखना बहुत रोमांचकारी होता है। मोलेला के कलाकारों द्वारा बनाई गई टैराकोटा कलाकृतियां भी प्रदर्शित की गई हैं। इस परिसर में राजस्थान की सात झौंपड़ियाँ हैं। दो झौंपड़ियाँ बनुकरों का आवास हैं जिनका प्रतिरूप राजस्थान के रेगिस्तान में स्थित गांव ‘रामा’ (जिला जालोर) तथा ‘सम’ (जिला जैसलमेर) से लिया गया है।

    मेवाड़ के पर्वतीय अंचल में रहने वाले कुंभकार की झौंपड़ी उदयपुर जिले के गांव ‘ढोल’ से ली गई है। दो अन्य झौंपड़ियाँ दक्षिणी राजस्थान की भील तथा सहरिया आदिवासियों की हैं जो मूलतः कृषक हैं। शिल्पग्राम में गुजरात राज्य की प्रतीकात्मक बारह झौंपड़ियाँ हैं। इनमें से छः झौंपड़ियाँ गुजरात प्रांत के कच्छ क्षेत्र के ‘बन्नी’ तथा ‘भुजोड़ी’ गांव से ली गई हैं।

    बन्नी झोंपड़ियों में रहने वाली रेबारी, हरिजन एवं मुस्लिम जाति के परिवारों की 2-2 झौंपड़ियाँ है जो कांच की कशीदाकारी, भरथकला तथा रोगनकाम के सिद्धहस्त शिल्पी माने जाते हैं। लांबड़िया उत्तर गुजरात के गांव ‘पोशीना’ के मृण-शिल्पी का आवास है जो विशेष प्रकार के घोड़े बनाते हैं। इसी के समीप पशिचमी गुजरात के छोटा उदयपुर क्षेत्र के ‘वसेड़ी’ गांव के बुनकर का आवास है।

    गुजरात के आदिम-कृषक-समुदाय का प्रतिनिधित्व करने वाली राठवा और डांग जनजातियों की झौंपड़ियाँ हैं जो अपने पारंपरिक वास्तु-शिल्प एवं भित्ति-अलंकरणों के कारण सबसे अलग दिखाई देती हैं। लकड़ी की श्रेष्ठ नक्काशी से तराशी गई पेठापुर हवेली गुजरात के गांधीनगर जिले की काष्ठ कला का बेजोड़ नमूना है।

    शिल्पग्राम में शिल्प-बाजार, मृण-कला संग्रहालय, कांच जड़ित कार्य, भित्तिचित्र, बच्चों के लिए झूले, घोड़ा एवं ऊँट की सवारी आदि मुख्य आकर्षण हैं। यह प्रतिदिन प्रातः 11 बजे से सायं 7.00 बजे तक दर्शकों के लिए खुला रहता है।


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