Blogs Home / Blogs / ब्रिटिश शासन में राजपूताने की रोचक एवं ऐतिहासिक घटनाएँ
  • राजाओं के भाग्य से द्वितीय विश्वयुद्ध आरंभ हो गया!

     06.09.2017
    राजाओं के भाग्य से द्वितीय विश्वयुद्ध आरंभ हो गया!

    लगभग 10 वर्षों तक भारतीय नेताओं एवं ब्रिटेन की गोरी सरकार ने देशी रियासतों को ब्रिटिश भारत के साथ मिलाकर भारत संघ के निर्माण के अथक प्रयास किये। कांग्रेस भारत संघ के माध्यम से देश की मुक्ति का रास्ता खोज रही थी तो गोरी सरकार भारत संघ के माध्यम से भारत के राष्ट्रीय आंदोलन के साथ अवरो

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  • नेताओं ने गोरों को हटाने के लिये राजाओं का मनोबल तोड़ने का निश्चय किया!

     06.09.2017
    नेताओं ने गोरों को हटाने के लिये राजाओं का  मनोबल तोड़ने का निश्चय किया!

    10 वर्ष के भारी प्रयासों के उपरांत भी कांग्रेस ब्रिटिश भारत के 11 प्रांतों एवं रियासती भारत के 562 राज्यों का एकीकरण नहीं करवा पाई। राजाओं ने इसे विफल करके रख दिया। इससे राष्ट्रीय नेताओं के मन में खीझ उत्पन्न होना स्वाभाविक ही था। अब वे राज्यों के अस्तित्व की आवश्यकता एवं वैधता पर चोट

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  • राजाओं और नेताओं के मध्य वाक्युद्ध आरंभ हो गया!

     08.09.2017
    राजाओं और नेताओं के मध्य वाक्युद्ध आरंभ हो गया!

    मार्च 1940 में नयी दिल्ली में वायसराय की अध्यक्षता में चैम्बर ऑफ प्रिसेंज की बैठक हुई जिसमें एक प्रस्ताव पारित किया गया कि भारत के राजा अपने राज्यों की सम्प्रभुता की गारण्टी, संधि में प्रदत्त अधिकारों की सुरक्षा तथा ब्रिटिश प्रभुसत्ता के किसी अन्य भारतीय सत्ता को स्थानांतरण से पू

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  • प्यारेलाल ने महाराजा गंगासिंह को मुँहतोड़ जवाब दिया

     08.09.2017
    प्यारेलाल ने महाराजा गंगासिंह को मुँहतोड़ जवाब दिया

    बीकानेर गंगासिंह ने चैम्बर ऑफ प्रिंसेज में दिये गये भाषण में तीन प्रमुख बातें कही थीं- एक तो यह कि राजा लोग ब्रिटिश साम्राज्यवाद की उपज नहीं हैं अपितु ब्रिटिश भारत ब्रिटिश सम्राज्यवाद की उपज है। दूसरी यह कि अधिकांश रियासतें अपने राजाओं की बलिष्ठ भुजाओं की ऋणी हैं इसलिये उन्हें मिटाया नहीं ज

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  • द्वितीय विश्वयुद्ध में राजपूताने के कई राजा मोर्चे पर गये

     11.10.2017
    द्वितीय विश्वयुद्ध में राजपूताने के कई राजा मोर्चे पर गये

    3 सितम्बर 1939 को द्वितीय विश्वयुद्ध आरंभ हुआ। ब्रिटिश सरकार को राजाओं से आदमी, धन तथा सामग्री के रूप में सहायता की आशा थी। राजपूताने के राजाओं ने इस आशा को व्यर्थ नहीं जाने दिया। उन्होंने ब्रिटिश सरकार की भरपूर सहायता की। जोधपुर महाराजा इससे पूर्व ही 26 अगस्त 1939 को वायसराय को तार भेजक

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  • गोरी सरकार ने भारतीयों को मूर्ख बनाने के लिये स्टैफर्ड क्रिप्स को भेजा!

     22.09.2017
    गोरी सरकार ने भारतीयों को मूर्ख बनाने के लिये स्टैफर्ड क्रिप्स को भेजा!

    दिसम्बर 1941 में द्वितीय विश्वयुद्ध में अमरीका का प्रवेश हुआ जिससे ब्रिटिश सरकार पर भारत प्रकरण को सुलझाने के लिये अंतर्राष्ट्रीय दबाव बढ़ने लगा। अमरीकी राष्ट्रपति इलियट रूजवेल्ट ने भारत की स्वतंत्रता के लिये ब्रिटिश सरकार पर दबाव बनाया। ब्रिटिश सरकार अमरीकी सरकार की सलाह की अन

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  • आजादी के बाद भी अंग्रेज भारत में ब्रिटिश सेनाएं रखना चाहते थे!

     23.09.2017
    आजादी के बाद भी अंग्रेज भारत में ब्रिटिश सेनाएं रखना चाहते थे!

    क्रिप्स योजना में प्रावधान किया गया था कि यदि भारत की आजादी के बाद भी भारतीय राज्य, भारत संघ में सम्मिलित नहीं होते और ब्रिटिश क्राउन के सहयोगी बने रहते हैं तो गोरी सरकार ई.1818 में राज्यों के साथ की गयी संधियों के तहत उन राज्यों की रक्षा करने के लिये उन राज्यों में इम्पीरियल ट्रूप्स

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  • सुभाषचंद्र बोस की सफलता से घबरा उठी कांग्रेस!

     24.09.2017
    सुभाषचंद्र बोस की सफलता से घबरा उठी कांग्रेस!

    द्वितीय विश्वयुद्ध आरंभ होने के समय कांग्रेस अंग्रेजों से भारत को आजाद किये जाने के लिये संघर्ष कर रही थी तथा साथी ही देश को मुस्लिम लीग और 565 भारतीय राजाओं के हाथों खण्ड-खण्ड किये जाने से रोकने के प्रयास कर रही थी किंतु अगस्त 1942 के आते आते उसे एक नये मोर्चे पर जूझना पड़ा। इस नये मोर्च

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  • राजाओं ने नरेन्द्र मण्डल से सामूहिक त्यागपत्र दे दिया!

     25.09.2017
    राजाओं ने नरेन्द्र मण्डल से सामूहिक त्यागपत्र दे दिया!

    विश्वयुद्ध में इंगलैण्ड की लगातार पतली होती जा रही हालत, क्रिप्स मिशन की असफलता तथा भारत छोड़ो आंदोलन की पृष्ठ भूमि में अक्टूबर 1943 में लॉर्ड वेवेल भारत के नये वायसराय एवं गवर्नर जनरल नियुक्त किये गये। उन्होंने घोषणा की कि मैं अपने थैले में बहुत सी चीजें ला रहा हूँ। जिस समय वेवेल भा

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  • सुभाष बाबू के प्रेत ने नेताजी के बलिदान का बदला मांगना आरंभ कर दिया

     26.09.2017
    सुभाष बाबू के प्रेत ने नेताजी के बलिदान का बदला मांगना आरंभ कर दिया

    द्वितीय विश्वयुद्ध में अंग्रेजों की भारी क्षति हुई। युद्ध के दौरान इंगलैण्ड पर अेकेले भारत का ही 500 अरब का कर्जा हो गया। युद्ध आरंभ होते समय ई.1939 में भारतीय सेना में 25 लाख सैनिक थे जो ई.1945 में घटकर 12 लाख ही रह गये थे। इनमें से ब्रिटिश सैनिकों की संख्या युद्ध के पश्चात् 11,400 रह गयी थी जो 1947 म

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