Blogs Home / Blogs / ब्रिटिश शासन में राजपूताने की रोचक एवं ऐतिहासिक घटनाएँ
  • राजाओं को पता नहीं था कि अखिल भारतीय संघ बनने से वे नष्ट हो जायेंगे

     26.08.2017
    राजाओं को पता नहीं था कि अखिल भारतीय संघ बनने से वे नष्ट हो जायेंगे

    अखिल भारतीय संघ की स्थापना के प्रति भारतीय राजाओं तथा मुस्लिम समुदाय द्वारा अधिक उत्साह दिखाया गया। यह एक अलग बात थी कि दोनों ही पक्षों के उत्साह दिखाने के कारण अलग-अलग थे। मुस्लिम लीग के प्रतिनिधि मुहम्मद अली जिन्ना तथा मुहम्मद शफी ने तेज बहादुर सप्रू द्वारा संघीय भारत (फेडरल इ

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  • पहले गोलमेज सम्मेलन में राजाओं ने देश को एक बनाने की पैरवी की

     26.08.2017
    पहले गोलमेज सम्मेलन में राजाओं ने देश को एक बनाने की पैरवी की

    प्रथम गोल मेज सम्मेलन में कांग्रेस सम्मिलित नहीं हुई थी किंतु बहुत से कांग्रेसी नेता अन्य संस्थाओं के माध्यम से इस सम्मेलन में सम्मिलित हुए। वे इस सम्मेलन की कार्यवाही पर पूरी तरह दृष्टि रखे हुए थे। मुस्लिम लीग अपनी राजनीतिक रोटियां सेकने में लगी हुई थी। गौरांग महाप्रभुओं द्वा

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  • दूसरे गोलमेज सम्मेलन में जयनाराण व्यास ने महाराजा गंगासिंह का भाण्डा फोड़ा

     26.08.2017
    दूसरे गोलमेज सम्मेलन में जयनाराण व्यास ने महाराजा गंगासिंह का भाण्डा फोड़ा

    ब्रिटिश राजनीतिज्ञ अनुभव करते थे कि जब तक भारत के लिये नये ढांचे का निर्माण करने के कार्य में कांग्रेस की भागीदारी नहीं होगी, तब तक भारत में किसी प्रकार के संवैधानिक सुधार की बात करने का कोई अर्थ नहीं है। अतः ई.1931 में गांधी और लार्ड इरविन के मध्य एक समझौता हुआ तथा 7 दिसम्बर 1931 को द्वित

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  • तीसरे गोलमेज सम्मेलन को राजाओं ने विफल कर दिया

     27.08.2017
    तीसरे गोलमेज सम्मेलन को  राजाओं ने विफल कर दिया

    दो गोलमेज सम्मेलनों की असफलता के बाद गोरी सरकार द्वारा तीसरा गोलमेज आयोजित करने की तैयारी की गयी। ई.1932 में दिल्ली में भारतीय नरेशों तथा मंत्रियों की बैठक बुलाई गयी जिसमें उन अनिवार्य सुरक्षणों को निर्धारित कर दिया गया जिनके अंतर्गत नरेश लोग संघ में मिलने के लिये तैयार थे। नरेन्द

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  • गोरों ने भारत का भाग्य राजाओं के पास गिरवी रखने की योजना बनायी

     29.08.2017
    गोरों ने भारत का भाग्य राजाओं के पास  गिरवी रखने की योजना बनायी

    तीन गोल मेज सम्मेलनों के बाद 15 मार्च 1933 को ब्रिटिश सरकार ने एक श्वेत पत्र प्रकाशित किया। ब्रिटिश संसद के दोनों सदनों की एक संयुक्त प्रवर समिति द्वारा इस श्वेत पत्र का अध्ययन किया गया। लार्ड लिनलिथगो इस समिति के अध्यक्ष थे। ब्रिटिश भारत तथा देशी राज्यों के 27 व्यक्ति इस समिति के साथ

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  • धौलपुर नरेश नरेन्द्र मण्डल के चांसलर पद का चुनाव हार गये

     29.08.2017
    धौलपुर नरेश नरेन्द्र मण्डल के चांसलर पद का चुनाव हार गये

    राजपूताने की धौलपुर रियासत के महाराजराणा सर रामसिंह के.सी.आई.ई.को गोरे बादशाह की सेना में कैप्टेन का अवैतनिक पद प्राप्त था। जब वे मृत्यु को प्राप्त हुए तो उनके भाई हिज हाइनेस रईसुद्दौला सिपहदारुलमुल्क राजा ए हिन्द महाराजाधिराज श्री सवाई महाराजा राणा लोकेन्द्र बहादुर दिलेरजंग देव उदयभान स

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  • गोरों ने तेल और पानी के मिश्रण की तरह भारत संघ बनाना चाहा

     30.08.2017
    गोरों ने तेल और पानी के मिश्रण की तरह  भारत संघ बनाना चाहा

    भारत संघ के निर्माण के लिये बनी संयुक्त प्रवर समिति की रिपोर्ट के आधार पर ब्रिटेन की गोरी सरकार ने भारत सरकार विधेयक का निर्माण किया तथा इसे ब्रिटिश संसद में रख दिया। विधेयक पर हाउस ऑफ कामंस में 43 दिन तथा हाउस ऑफ लार्ड्स में 13 दिन बहस चली। कंजरवेटिव पार्टी के नेता विंस्टन चर्चिल ने

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  • राजा लोग आदेश देने के लिये बने थे, आदेश लेने के लिये नहीं!

     31.08.2017
    राजा लोग आदेश देने के लिये बने थे, आदेश लेने के लिये नहीं!

    माइकल ब्रीचर ने लिखा है कि भारत सरकार अधिनियम 1935 में प्रावधान किया गया था कि ब्रिटिश भारत और स्वेच्छा से शामिल होने वाली देशी रियासतों के ढुलमुल अखिल भारतीय संघ में पूर्ण उत्तरदायित्व युक्त सरकार का निर्माण हो। संघीय विधान में रियासतों को अत्यंत महत्व दिया गया था। इससे बड़ी विचित

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  • वायसराय सौदा बेचने के अनिच्छुक लोगों से मोलभाव कर रहा था!

     01.09.2017
    वायसराय सौदा बेचने के अनिच्छुक लोगों से मोलभाव कर रहा था!

    ई.1936 में लॉर्ड विलिंगडन के बाद मारकीस ऑफ लिनलिथगो को भारत का वायसराय बनाया गया। लिनलिथगो संयुक्त प्रवर समिति के अध्यक्ष भी रह चुके थे। वे अपने कार्यकाल में भारत संघ के उद्घाटन की इच्छा लेकर भारत आये। उन्हें भारतीय राजाओं से सहानुभूति थी। वे ऐसा कुछ नहीं करना चाहते थे जिससे राजाओं

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  • बड़े राजाओं ने देश को एक नहीं होने दिया!

     05.09.2017
    बड़े राजाओं ने देश को एक नहीं होने दिया!

    जून 1937 में बीकानेर नरेश गंगासिंह ने लंदन में घोषणा की कि हम ब्रिटेन के साथ अपने सम्बन्ध समाप्त करने की अपेक्षा लड़ना पसंद करेंगे। उसी वर्ष बीकानेर में आयोजित अपने जुबली दरबार के अवसर पर लॉर्ड लिनलिथगो को ब्रिटिश सम्राट के प्रति अपनी स्वामिभक्ति का विश्वास दिलाते हुए महाराजा ने कह

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