Blogs Home / Blogs / ब्रिटिश शासन में राजपूताने की रोचक एवं ऐतिहासिक घटनाएँ
  • राजपूताने ने तात्यां टोपे तथा लक्ष्मीबाई को शरण नहीं दी

     21.07.2017
    राजपूताने ने तात्यां टोपे तथा लक्ष्मीबाई को शरण नहीं दी

    1857 की क्रांति के समय अलवर रियासत का शासक विनयसिंह गंभीर रूप से बीमार चल रहा था। उसने चिमनसिंह के नेतृत्व में 800 पैदल, 400 घुड़सवार तथा 4 तोपें आगरा भिजवायीं ताकि आगरा के दुर्ग में घिरे हुए अंग्रेजों को बाहर निकाला जा सके। 11 जुलाई 1857 को अलवर राज्य की सेना पर नीमच तथा नसीराबाद के विद्रोही सै

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  • ब्रिटिश सरकार राजाओं के साथ प्रिय बालकों जैसा व्यवहार करने लगी

     21.07.2017
    ब्रिटिश सरकार राजाओं के साथ  प्रिय बालकों जैसा व्यवहार करने लगी

    1857 के सैनिक विद्रोह को अगस्त 1858 तक अंग्रेजों और राजपूताने के देशी राज्यों की सम्मिलित ताकत ने कुचल दिया। कर्नल स्लीमैन की वह भविष्यवाणी सत्य सिद्ध हुई थी कि राजा लोग एक दिन संकट में सहायक स्वरूप प्रमाणित होंगे। इसके बाद ब्रिटिश सरकार ने भारत के शासन पर अपना सीधा नियंत्रण स्थापित क

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  • अंग्रेजों ने नरेशों की सलामियाँ कई बार घटाई बढ़ाईं

     22.07.2017
    अंग्रेजों ने नरेशों की सलामियाँ कई बार घटाई बढ़ाईं

    1857 के सैनिक विद्रोह के समय जोधपुर पर महाराजा तखतसिंह शासन कर रहा था। स्वर्गीय राजा मानसिंह की इच्छा के अनुसार तखतसिंह को अहमदनगर से लाकर जोधपुर का राजा बनाया गया था। वह जोधपुर के महाराजा अजीतसिंह के आठवें पुत्र महाराजा आनन्द सिंह का पोता था। 1 दिसम्बर 1843 को तखतसिंह बड़ी धूमधाम से जो

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  • राष्ट्र के प्रत्येक अंग पर ब्रिटिश शिकंजा कस गया

     23.07.2017
    राष्ट्र के प्रत्येक अंग पर ब्रिटिश शिकंजा कस गया

    1857 की क्रांति के विफल हो जाने के बाद अंग्रजों ने भारत के प्रत्येक अंग पर कब्जा कसना आरंभ किया। देशी राज्यों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने के लिये गवर्नर जनरल के सीधे नियंत्रण में एक राजनीतिक विभाग का गठन किया गया। इस विभाग में नियुक्ति के लिये इण्डियन पोलिटिकल सर्विस का गठन कि

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  • उच्च अंग्रेज जाति को भारत में प्रशिक्षण लेना स्वीकार नहीं था

     24.07.2017
    उच्च अंग्रेज जाति को भारत में प्रशिक्षण लेना स्वीकार नहीं था

    गवर्नर जनरल लार्ड कार्नवालिस (ई.1786-1797) ने भारतीय युवकों को सार्वजनिक दायित्वों एवं प्रशासनिक अधिकारों वाली नौकरी से वंचित करने के लिये नियम बनाया कि 50 पौण्ड या उससे अधिक वार्षिक वेतन वाली सेवाओं पर भारतीयों को नहीं रखा जायेगा। इससे भारतीयों के लिये उच्च पदों वाली नौकरियों के मार्

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  • ब्रिटेन का राजा ईस्ट इण्डिया कम्पनी से उपहार लेता था!

     25.07.2017
    ब्रिटेन का राजा ईस्ट इण्डिया कम्पनी से उपहार लेता था!

    ई.1818 से 1857 तक देशी रजवाड़ों में ईस्ट इण्डिया कम्पनी की ओर से जिन पोलिटिकल एजेण्टों व अधिकारियों की नियुक्ति हुई उनके बारे में भी कुछ जान लेना उचित रहेगा। इस काल में ईस्ट इण्डिया कम्पनी द्वारा नियुक्त पोलिटिकल एजेण्टों से लेकर अजमेर में पदस्थापित राजपूताना का ए. जी. जी. (एजेण्ट टू दी ग

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  • किसी भी बदसूरत बुढ़िया को डाकन मान कर मारा जा सकता था

     26.07.2017
    किसी भी बदसूरत बुढ़िया को डाकन मान कर मारा जा सकता था

    उन्नीसवीं सदी में राजपूताने में समाधि लेने के प्रथा प्रचलित थी। समाधि लेने वाला व्यक्ति या तो गड्ढे में बैठकर मिट्टी के नीचे दब जाता था या फिर जल समाधि ले लेता था। अंग्रेज इसे मानव बलि के समान ही समझते थे। उन्होंने इस प्रथा पर रोक लगाने के लिये प्रयास आरंभ किये।

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  • 54 रुपये में खरीदी जा सकती थी 11 वर्ष की लड़की

     27.07.2017
    54 रुपये में खरीदी जा सकती थी 11 वर्ष की लड़की

    यह कहना एक पक्षीय होगा कि अंग्रेजों ने राजपूताना की रियासतों के आंतरिक प्रशासन में हस्तक्षेप करके रियासतों के आर्थिक, प्रशासनिक एवं सामाजिक ताने-बाने को छिन्न-भिन्न करने का ही काम किया। इसके विपरीत अनेक अंग्रेज अधिकारियों ने रियासती जनता के मध्य व्याप्त अमानवीय प्रथाओं को पहच

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  • ब्रिटिश राजमुकुट ने देशी राज्यों पर अपनी परमोच्चता थोपी

     29.07.2017
    ब्रिटिश राजमुकुट ने देशी राज्यों पर  अपनी परमोच्चता थोपी

    सन् 1858 की असफल सैनिक क्रांति के पश्चात् अंग्रेजों की समझ में अच्छी तरह आ गया कि वे भारत से निष्कासित किये जाने से बाल-बाल बचे हैं। उन्हें केवल देशी रजवाड़ों के राजाओं ने बचाया है। इसलिये अब उन्होंने भारत में शासन करने का ऐसा तरीका अपनाया कि जो रजवाड़े नष्ट होने से बच गये हैं उन रजवाड़ो

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  • राजपूत राजाओं ने अंग्रेजों के विरुद्ध रूस के जार से सहायता मांगी

     07.09.2018
    राजपूत राजाओं ने अंग्रेजों के विरुद्ध  रूस के जार से सहायता मांगी

    ई.1818 में राजपूताना के शासक विभिन्न कारणों से ईस्ट इण्डिया कम्पनी से संधि करने को विवश हुए थे किंतु 1857 के सैनिक विद्रोह के बाद कम्पनी का स्थान ब्रिटिश ताज ने ले लिया। इसके बाद अंग्रेज जाति राजपूताना रियासतों की निरंकुश मालिक हो गयी। भारत में पदस्थापित अंग्रेज अधिकारियों को अब कम्प

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