Blogs Home / Blogs / ब्रिटिश शासन में राजपूताने की रोचक एवं ऐतिहासिक घटनाएँ
  • गोरे भारत से सम्मानजनक पलायन का रास्ता ढूंढने लगे!

     27.09.2017
    गोरे भारत से सम्मानजनक पलायन का  रास्ता ढूंढने लगे!

    15 मार्च 1946 को ब्रिटिश प्रधानमंत्री क्लेमेंट एटली द्वारा कैबीनेट मिशन को भारत भेजने की ऐतिहासिक घोषणा की गयी जिसने भारत के 565 राजाओं की भूमिका एवं भारतीय राजनीतिक प्रगति के लिये एक नवीन ध्वनि तथा रेखा निश्चित की। भूतकाल से बिल्कुल उलट, इस बार ब्रिटिश सरकार राजाओं से अपेक्षा कर रही

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  • राजाओं ने एक-एक करके अपने पत्ते खोलने आरंभ कर दिये!

     27.09.2017
    राजाओं ने एक-एक करके अपने पत्ते खोलने आरंभ कर दिये!

    कैबीनेट मिशन भारत को आजादी देने का सर्वसम्मत फार्मूला ढूंढने के लिये भारतीय राजाओं से वार्ता कर रहा था। दल के सदस्य स्टैफर्ड क्रिप्स का मानना था कि तकनीकी रूप से कैसी भी स्थिति हो किंतु जिस दिन आजाद भारत की नयी सरकार को सत्ता का हस्तांतरण किया जाये उससे पहले, ब्रिटिश भारत तथा रिया

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  • गोरी सरकार राजाओं को लावारिस बालक की तरह छोड़कर न जाये!

     27.09.2017
    गोरी सरकार राजाओं को लावारिस बालक की तरह छोड़कर न जाये!

    कैबीनेट मिशन ने 16 मई 1946 को अपनी योजना प्रकाशित की। इसे कैबीनेट मिशन प्लान तथा संयुक्त भारत योजना भी कहते हैं। इसके द्वारा संघीय संविधान का निर्माण किया जाना प्रस्तावित किया गया जिसके तहत भारत संघ की व्यवस्था जानी थी। प्रस्तावित संघ में सरकार के तीनों अंग- विधायिका, कार्यपालिका तथ

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  • कैबीनेट मिशन ने भारत को विभाजन की ओर धकेल दिया

     27.09.2017
    कैबीनेट मिशन ने भारत को विभाजन की ओर धकेल दिया

    वायसराय के राजनीतिक सलाहकार सर कोनार्ड कोरफील्ड भारतीय राजाओं के पक्ष में थे। उन्हें भारतीय नेता फूटी आँख नहीं सुहाते थे। उन्हें भय था कि स्वतंत्र भारत में कांग्रेस, राजाओं तथा उनके राज्यों को निगल जायेगी। इसलिये राजाओं की मदद की जानी आवश्यक है। उन्होंने 8 जून 1946 को बम्बई में आयो

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  • जिन्ना ने कैबीनेट मिशन योजना को अस्वीकार कर दिया

     27.09.2017
    जिन्ना ने कैबीनेट मिशन योजना को अस्वीकार कर दिया

    कैबीनेट मिशन योजना में एक अंतरिम सरकार के गठन का भी प्रस्ताव किया गया था। इस सरकार में वायसराय को छोड़कर शेष सभी पदों को भारतीयों से भरा जाना था। जातीय-दलीय कोटे से 14 सदस्यों की सम्मिलित सरकार बननी थी जिसमें कांग्रेस के 5 सवर्ण हिंदू सदस्य, मुस्लिम लीग के 5 सदस्य, परिगणित हिंदू जाति क

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  • अंग्रेजों ने भारी मन से भारत से विदा होने का मन बनाया!

     27.09.2017
    अंग्रेजों ने भारी मन से भारत से विदा होने का मन बनाया!

    युद्ध समाप्ति की पृष्ठ भूमि में भेजे गये कैबीनेट मिशन की असफलता के बाद ब्रिटिश सरकार पर भारत को स्वतंत्र करने के लिये अंतर्राष्ट्रीय दबाव पड़ने लगा। ब्रिटेन की संसद में विपक्ष के नेता विंस्टन चर्चिल किसी भी सूरत में भारतीय स्वतंत्रता के पक्षधर नहीं थे किंतु उन्होंने भी अमरीकी द

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  • ब्रिटेन का राजा भारतीय राजाओं के लिये चिंतित था!

     27.09.2017
    ब्रिटेन का राजा भारतीय राजाओं के लिये चिंतित था!

    जब ब्रिटेन ने अंतिम रूप से भारत छोड़ने का निर्णय लिया तथा सत्ता हस्तांतरण की तिथि निश्चित की तो आश्चर्यजनक रूप से न तो व्हाइट हॉल ने और न ही भारतीय राजाओं ने संधियों का उल्लेख किया जबकि अब तक राजा इन संधियों की दुहाई देकर ही भारत की आजादी का मार्ग अवरुद्ध करते आये थे।

    जिस समय मा

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  • डिकी गधे से दुम रखवा सकता था तो राजाओं से ताज भी!

     26.11.2017
    डिकी गधे से दुम रखवा सकता था  तो राजाओं से ताज भी!

    माउण्टबेटन के भारत में आने के ठीक पहले रावलपिंडी में सिक्खों का कत्ल हो चुका था। मुसलमानों के प्रति अपनी घृणा को न तो सिक्ख छिपाते थे और न मुसलमान सिक्खों को सहन करने को तैयार थे। सिक्खों की दलील थी, जब आजादी आयेगी तो हम लोगों का क्या होगा?

    लैरी कांलिंस व दॉमिनिक लैपियर ने लिखा

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  • एडविना ने माउंटबेटन को भारत विभाजन के लिये तैयार किया!

     26.11.2017
    एडविना ने माउंटबेटन को भारत विभाजन के लिये तैयार किया!

    माउंटबेटन ने एटली सरकार को 2 अप्रेल 1947 को अपनी पहली रिपोर्ट भेजी जिसमें उन्होंने लिखा कि भारत का आंतरिक तनाव सीमा से बाहर जा चुका है। चाहे कितनी भी शीघ्रता से काम किया जाये, गृहयुद्ध आरंभ हो जाने का पूरा खतरा है।

    अधिकतर कांग्रेसी नेता भारत विभाजन के विरुद्ध थे किंतु वे मुस्लिम लीग के कठोर

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  • गोरे हमेशा के लिये देश छोड़ कर चले गये

     26.11.2017
    गोरे हमेशा के लिये देश छोड़ कर चले गये

    लॉर्ड माउण्टबेटन ने चीफ ऑफ दी स्टाफ लॉर्ड इस्मे तथा जार्ज एबेल से कैबीनेट योजना के अंतर्गत भारत विभाजन पर आधारित एक योजना बनवायी जिसमें प्रस्ताव किया गया कि हिन्दू एवं मुस्लिम बहुल जनसंख्या के आधार पर दो राष्ट्रों का निर्माण हो। यदि किसी ब्रिटिश भारतीय प्रांत की जनता चाहे तो भा

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