Blogs Home / Blogs / ब्रिटिश शासन में राजपूताने की रोचक एवं ऐतिहासिक घटनाएँ
  • मैं नाथद्वारा जाकर सन्यासी हो जाउंगा, स्वामी पर हथियार नहीं उठाऊंगा

     27.06.2017
    मैं नाथद्वारा जाकर सन्यासी हो जाउंगा, स्वामी पर हथियार नहीं उठाऊंगा

    जब कोटा का महाराव किशोरसिंह अपने आदमियों पृथ्वीसिंह तथा गोरधन दास को साथ लेकर कोटा से रंगबाड़ी चला गया और वहाँ से जालिमसिंह पर हमला करने की तैयारियां करने लगा तो पोलिटिकल एजेण्ट ने जालिमसिंह से पूछा कि अब वह क्या करेगा?

    इस पर जालिमसिंह ने उत्तर दिया कि मैं नाथद्वारा जाकर सन्य

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  • मेवाड़ से अलग हो गए डूंगरपुर, बांसवाड़ा, प्रतापगढ़ और शाहपुरा

     28.06.2017
    मेवाड़ से अलग हो गए डूंगरपुर, बांसवाड़ा, प्रतापगढ़ और शाहपुरा

    अंग्रेजों के भारत में आगमन के समय मेवाड़ राजवंश धरती भर के राजवशों में सबसे पुराना था। डूंगरपुर, बांसवाड़ा, प्रतापगढ़ और शाहपुरा राज्य भी पहले मेवाड़ के ही हिस्से थे। महाराणा सामंतसिंह के वंशजों ने बारहवीं शताब्दी में वागड़ राज्य की स्थापना की थी। इसकी राजधानी वटपद्रक थी जो बड़ौदा कहल

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  • एक दूसरे को लूटते थे सिरोही और जोधपुर राज्य

     29.06.2017
    एक दूसरे को लूटते थे सिरोही और जोधपुर राज्य

    राजपूताने और गुर्जरात्रा की सीमाओं पर चौहानों की एक पुरानी और प्रसिद्ध रियासत सिरोही के नाम से जानी जाती थी। सिरोही का अर्थ होता है- शीश काटने वाली अर्थात् तलवार। सिरोही राज्य का क्षेत्रफल 1,994 वर्ग मील था। सिरोही का राजवंश देवड़ा चौहानों के नाम से प्रसिद्ध था।

    ई.1760 में महाराव व

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  • अंग्रेजों ने भारत मुगलों से नहीं, हिंदुओं से प्राप्त किया

     30.06.2017
    अंग्रेजों ने भारत मुगलों से नहीं, हिंदुओं से प्राप्त किया

    लॉर्ड वेलेजली के समय में अलवर, भरतपुर तथा धौलपुर राज्यों के साथ की गयी संधियां अब तक चली आ रही थीं। लॉर्ड हेस्टिंग्स (ई.1813 से 1823) द्वारा पद संभालने के समय अलवर, भरतपुर और धौलपुर को छोड़कर प्रायः समस्त राजपूताना अंग्रेजी नियन्त्रिण से बाहर था।

    लॉर्ड हेस्टिंग्स के समय में ईस्ट इण्

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  • पिण्डारियों एवं मराठों से कई गुना अधिक राशि वसूल की अंग्रेजों ने

     01.07.2017
    पिण्डारियों एवं मराठों से  कई गुना अधिक राशि वसूल की अंग्रेजों ने

    ईस्ट इण्डिया कम्पनी द्वारा राजपूत राज्यों के साथ की गयी संधियों के आरंभ होने से राजपूताने में एक नये युग का सूत्रपात हुआ। राज्यों को मराठों और पिण्डारियों से छुटकारा मिला तथा ईस्ट इण्डिया कम्पनी के अधिकारी देशी राज्यों में रेजीडेण्ट एवं पोलिटिकल एजेण्ट बन कर आये जिससे मराठों औ

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  • जयपुर महाराजा को विश्वास था कि कम्पनी उसके राज्य की रक्षा करेगी

     02.07.2017
    जयपुर महाराजा को विश्वास था कि कम्पनी उसके राज्य की रक्षा करेगी

    आम्बेर राज्य के 34वें कच्छवाहा राजा जगतसिंह (ई.1803-1818) ने 12 दिसम्बर 1803 को ईस्ट इण्डिया कम्पनी के साथ संधि की किंतु ई.1805 में अंग्रेजों द्वारा संधि को भंग कर दिया गया। ई.1816 में भी ईस्ट इण्डिया कम्पनी तथा जयपुर राज्य के बीच पुनः संधि हुई किंतु यह संधि भी अंग्रेजों द्वारा खिराज की भारी रकम मा

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  • कैप्टन स्टेवार्ड जबर्दस्ती जयपुर राज्य का पोलिटिकल एजेण्ट बन गया

     04.07.2017
    कैप्टन स्टेवार्ड जबर्दस्ती  जयपुर राज्य का पोलिटिकल एजेण्ट बन गया

    राजमाता भटियानी तथा प्रधानमंत्री ठाकुर बैरीसाल सिंह के झगड़ों पर अंकुश लगाने के लिये ईस्ट इण्डिया कम्पनी ने कैप्टन स्टेवार्ड को जयपुर में पोलिटिकल एजेण्ट नियुक्त किया। जयपुर में इस नियुक्ति का सर्वत्र विरोध हुआ किंतु राजमाता भटियानी की एक न चली। स्टेवार्ड ने 17 अप्रेल 1821 को जयपु

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  • संधि की शर्तों से बचने के लिए जोधपुर के राजा मानसिंह ने पागल होने का नाटक किया

     05.07.2017
    संधि की शर्तों से बचने के लिए जोधपुर के राजा मानसिंह ने पागल होने का नाटक किया

    क्षेत्रफल की दृष्टि से मारवाड़ रियासत राजपूताने की सबसे बड़ी रियासत थी तथा भारत वर्ष की देशी रियासतों में इसका तीसरा स्थान था। भारत भर में केवल हैदराबाद एवं जम्मू-कश्मीर ही इससे बड़ी रियासतें थीं। जब मारवाड़ में राठौड़ों की तीसवीं पीढ़ी के राजा विजयसिंह (1752-1793) की पासवान गुलाबराय का पुत

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  • कबूतर पर गोली चलाने वाले हमारे राज्य में नहीं रह सकते

     06.07.2017
    कबूतर पर गोली चलाने वाले  हमारे राज्य में नहीं रह सकते

    जोधपुर नरेश मानसिंह ने अंग्रेजों से संधि तो कर ली थी किंतु वह संधि की शर्तों का पालन नहीं करता था। वह मारवाड़ में उत्पात मचा रहे नाथों के विरुद्ध कोई कार्यवाही नहीं करना चाहता था। नाथों के कहने पर वह नित्य ही राज्य के दीवान को बदल देता था जिससे राज्यकार्य शिथिल हो गया तथा मेरवाड़ा की

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  • महाराजा मानसिंह ने शरीर पर राख लपेट ली

     07.07.2017
    महाराजा मानसिंह ने शरीर पर राख लपेट ली

    अक्टूबर 1839 से ईस्ट इण्डिया कम्पनी ने जोधपुर दुर्ग पर अधिकार कर रखा था। 29 फरवरी 1840 को कर्नल सदरलैण्ड जोधपुर आया तथा उसने अगले ही दिन अर्थात् 1 मार्च 1840 को जोधपुर का दुर्ग फिर से महाराजा को सौंप दिया। इस प्रकार पाँच महीने रहकर अंग्रेजी सेना चली गई। कर्नल सदरलैण्ड ने अजमेर जाने से पहले प

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