Blogs Home / Blogs / ब्रिटिश शासन में राजपूताने की रोचक एवं ऐतिहासिक घटनाएँ
  • राजाओं को और दुर्बल बनाओ ताकि वे अंग्रेजी हुकूमत के लिये खतरा न बनें

     17.06.2017
    राजाओं को और दुर्बल बनाओ ताकि  वे अंग्रेजी हुकूमत के लिये खतरा न बनें

    19 वीं सदी के प्रथम दशक में भारत की देशी रियासतें एक ओर तो परस्पर युद्धों, जागीरदारों के झगड़ों तथा उत्तराधिकार के षड़यंत्रों में उलझी हुई थीं तथा दूसरी तरफ मराठों, फ्रैंच सेनाओं, पिण्डारियों, सिंधी मुसलमानों और पठानों के आक्रमणों से जर्जर हो रही थीं।

    अधिकांश रियासतें प्रशासन

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  • कर्नल टॉड की पुस्तक ने राजपूताने का नाम बदलकर राजस्थान कर दिया

     18.06.2017
    कर्नल टॉड की पुस्तक ने राजपूताने का  नाम बदलकर राजस्थान कर दिया

    कर्नल जेम्स टॉड का जन्म 20 मार्च 1782 को इंगलैण्ड के इंग्लिस्टन नामक स्थान पर हुआ था। उसके किसी पूर्वज ने स्कॉटलैण्ड के राजा रॉबर्ट दी ब्रूस के बच्चों को इंगलैण्ड के राजा की कैद से छुड़ाया था इस कारण टॉड परिवार को नाइटबैरोनेट की उपाधि तथ लोमड़ी का चिह्न धारण करने का अधिकार मिला हुआ था।
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  • 60 जोंकें खून चूसती रहीं और कर्नल टॉड राजपूताने का इतिहास सुनता रहा

     20.06.2017
    60 जोंकें खून चूसती रहीं और कर्नल टॉड  राजपूताने का इतिहास सुनता रहा

    1805 से लेकर 1817 तक पूरे 12 वर्ष की अवधि में कर्नल टॉड ने लगभग पूरा राजपूताना देख लिया था। उस काल में राजपूताने के भूगोल, इतिहास तथा राजपूताने की राजनीतिक परिस्थितियों की जितनी जानकारी कर्नल टॉड को थी, उतनी ईस्ट इण्डिया कम्पनी में किसी अन्य अधिकारी को नहीं थी।

    ई.1807 तक 1813 तक लॉर्ड मिण्

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  • अंग्रेजों ने पिण्डारी अमीर खां को टोंक का नवाब बना दिया

     21.06.2017
    अंग्रेजों ने पिण्डारी अमीर खां को  टोंक का नवाब बना दिया

    भरतपुर के घेरे में अंग्रेजों से 32 हजार रुपये की रिश्वत खाकर जसवंतराव होलकर को अंग्रेजों को सौंप देने का वचन देने वाला अमीरखां अब भी होलकर की सेना में घुड़सवार सेना का प्रधान बना हुआ था। इतना ही नहीं उसने होलकर से सिरोंज की जागीर भी हथिया ली थी। ईस्वी 1810 में अमीर खां नागपुर के मोर्चे प

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  • लोहे के पिंजरे में सोता था झाला जालिमसिंह

     22.06.2017
    लोहे के पिंजरे में सोता था झाला जालिमसिंह

    झाला जालिम सिंह 21 वर्ष की आयु से कोटा राज्य की रक्षा और सेवा करता आ रहा था। ईस्वी 1764 में उसने कोटा को जयपुर के दांतों में पिस जाने से बचाया था। महाराव शत्रुशाल (द्वितीय) झाला जालिमसिंह पर जान छिड़कते थे। यही कारण था कि सामंत लोग ईष्यावश जालिमसिंह के विरुद्ध महाराव गुमानसिंह के कान भरा

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  • मैं नाथद्वारा जाकर सन्यासी हो जाउंगा, स्वामी पर हथियार नहीं उठाऊंगा

     27.06.2017
    मैं नाथद्वारा जाकर सन्यासी हो जाउंगा, स्वामी पर हथियार नहीं उठाऊंगा

    जब कोटा का महाराव किशोरसिंह अपने आदमियों पृथ्वीसिंह तथा गोरधन दास को साथ लेकर कोटा से रंगबाड़ी चला गया और वहाँ से जालिमसिंह पर हमला करने की तैयारियां करने लगा तो पोलिटिकल एजेण्ट ने जालिमसिंह से पूछा कि अब वह क्या करेगा?

    इस पर जालिमसिंह ने उत्तर दिया कि मैं नाथद्वारा जाकर सन्य

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  • मेवाड़ से अलग हो गए डूंगरपुर, बांसवाड़ा, प्रतापगढ़ और शाहपुरा

     28.06.2017
    मेवाड़ से अलग हो गए डूंगरपुर, बांसवाड़ा, प्रतापगढ़ और शाहपुरा

    अंग्रेजों के भारत में आगमन के समय मेवाड़ राजवंश धरती भर के राजवशों में सबसे पुराना था। डूंगरपुर, बांसवाड़ा, प्रतापगढ़ और शाहपुरा राज्य भी पहले मेवाड़ के ही हिस्से थे। महाराणा सामंतसिंह के वंशजों ने बारहवीं शताब्दी में वागड़ राज्य की स्थापना की थी। इसकी राजधानी वटपद्रक थी जो बड़ौदा कहल

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  • एक दूसरे को लूटते थे सिरोही और जोधपुर राज्य

     29.06.2017
    एक दूसरे को लूटते थे सिरोही और जोधपुर राज्य

    राजपूताने और गुर्जरात्रा की सीमाओं पर चौहानों की एक पुरानी और प्रसिद्ध रियासत सिरोही के नाम से जानी जाती थी। सिरोही का अर्थ होता है- शीश काटने वाली अर्थात् तलवार। सिरोही राज्य का क्षेत्रफल 1,994 वर्ग मील था। सिरोही का राजवंश देवड़ा चौहानों के नाम से प्रसिद्ध था।

    ई.1760 में महाराव व

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  • अंग्रेजों ने भारत मुगलों से नहीं, हिंदुओं से प्राप्त किया

     30.06.2017
    अंग्रेजों ने भारत मुगलों से नहीं, हिंदुओं से प्राप्त किया

    लॉर्ड वेलेजली के समय में अलवर, भरतपुर तथा धौलपुर राज्यों के साथ की गयी संधियां अब तक चली आ रही थीं। लॉर्ड हेस्टिंग्स (ई.1813 से 1823) द्वारा पद संभालने के समय अलवर, भरतपुर और धौलपुर को छोड़कर प्रायः समस्त राजपूताना अंग्रेजी नियन्त्रिण से बाहर था।

    लॉर्ड हेस्टिंग्स के समय में ईस्ट इण्

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  • पिण्डारियों एवं मराठों से कई गुना अधिक राशि वसूल की अंग्रेजों ने

     01.07.2017
    पिण्डारियों एवं मराठों से  कई गुना अधिक राशि वसूल की अंग्रेजों ने

    ईस्ट इण्डिया कम्पनी द्वारा राजपूत राज्यों के साथ की गयी संधियों के आरंभ होने से राजपूताने में एक नये युग का सूत्रपात हुआ। राज्यों को मराठों और पिण्डारियों से छुटकारा मिला तथा ईस्ट इण्डिया कम्पनी के अधिकारी देशी राज्यों में रेजीडेण्ट एवं पोलिटिकल एजेण्ट बन कर आये जिससे मराठों औ

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