Blogs Home / Blogs / ब्रिटिश शासन में राजपूताने की रोचक एवं ऐतिहासिक घटनाएँ
  • कोई तो बताये मेरी गुलाब को किसने मारा?

     06.06.2017
    कोई तो बताये मेरी गुलाब को किसने मारा?

    जिस समय अंग्रेज शक्ति देशी राज्यों की घेराबंदी करने की योजना बना रही थी, उस समय राजपूताना के देशी राज्य अनेक आंतरिक एवं बाह्य समस्याओं से जूझ रहे थे जिनमें से सबसे बड़ी और अंतहीन दिखायी देने वाली समस्या थी। राज्यों के सामंतों तथा जागीरदारों की अनुशासन हीनता और लूट खसोट की प्रवृत्

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  • भरतपुर की महारानी ने कहा, मराठा सैनिक मेरे बच्चे हैं

     06.06.2017
    भरतपुर की महारानी ने कहा,  मराठा सैनिक मेरे बच्चे हैं

    एक तरफ तो बंगाल से अंग्रेज शक्ति उत्तरी भारत को दबाती हुई चली आ रही थी तथा दूसरी ओर पिण्डारी और मराठे उत्तरी भारत को रौंदने में लगे हुए थे। यह भारतीय इतिहास के मध्यकाल का अवसान था किंतु अफगानिस्तान की ओर से विगत कई शताब्दियों से आ रही मुस्लिम आक्रमणों की आंधी अभी थमी नहीं थी। ई.1757 मे

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  • मेहता सालिमसिंह ने जैसलमेर के तीन राजकुमारों को मार डाला

     06.06.2017
    मेहता सालिमसिंह ने जैसलमेर के तीन राजकुमारों को मार डाला

    जिस समय जोधपुर, जयपुर, मेवाड़ और बीकानेर आपस में संघर्षरत थे तथा मराठों और पिण्डारियों का शिकार बन रहे थे उस समय जैसलमेर का भाटी राज्य भयानक आंतरिक कलह में उलझा हुआ था। मरूस्थलीय एवं अनुपजाऊ क्षेत्र में स्थित होने के कारण मराठों और पिण्डारियों को इस राज्य में कोई रुचि नहीं थी। इस क

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  • पिण्डारियों ने पोकरण ठाकुर का सिर काटकर राजा मानसिंह को भिजवाया

     07.06.2017
    पिण्डारियों ने पोकरण ठाकुर का सिर काटकर राजा मानसिंह को भिजवाया

    गवर्नर जनरल लार्ड कार्नवालिस (ई.1805) द्वारा देशी राज्यों में हस्तक्षेप न करने की नीति अपनाई गयी जिसके कारण न केवल मध्य भारत और राजपूताना की रियासतें पिंडारियों और दूसरे लुटेरों की क्रीड़ा स्थली बनीं बल्कि मराठों की शक्ति घटते जाने से पिंडारी बहुत शक्तिशाली बनते गये और वे अंग्रेजी

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  • मारवाड़ की स्त्रियां दो-दो पैसे में और जयपुर की स्त्रियां एक-एक पैसे में बिकीं

     09.06.2017
    मारवाड़ की स्त्रियां दो-दो पैसे में और जयपुर की स्त्रियां एक-एक पैसे में बिकीं

    मारवाड़ की स्त्रियां दो-दो पैसे में और जयपुर की स्त्रियां एक-एक पैसे में बिकीं

    मराठों और पिण्डारियों के निरंतर आक्रमणों ने राजपूताना की राजनैतिक शक्ति को तोड़कर रख दिया था जिससे त्रस्त होकर राजपूताने की रियासतों ने सिंधियों तथा पठानों क

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  • जाझ फिरंगी ने राजपूतों से एक-एक कुंआँ छीन लिया

     14.06.2017
    जाझ फिरंगी ने राजपूतों से एक-एक कुंआँ छीन लिया

     जॉर्ज टॉमस राजपूताने में जाझ फिरंगी के नाम से प्रसिद्ध हुआ। उसका जन्म ई.1756 में आयरलैण्ड में हुआ था। वह ई.1782 में एक अंग्रेजी जहाज से मद्रास आया। वह उन अंग्रेजों में से था जो ईस्ट इण्डिया कम्पनी की सेवा के लिये नहीं अपितु भारत में अपनी रोजी-रोटी की तलाश में स्वतंत्र रूप से आया करते थे

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  • सामंतों ने राजमाता की हत्या करके महारावल को कैद से आजाद करवा लिया

     14.06.2017
    सामंतों ने राजमाता की हत्या करके महारावल को कैद से आजाद करवा लिया

    डूंगरपुर एवं बांसवाड़ा के राजकुल मेवाड़ के राजवंश में से ही अलग हुए थे। मेवाड़ का महाराणा उनके साथ अपने अधीनस्थ सरदारों की तरह व्यवहार करता था जबकि ये दोनों ही राज्य अपने आप को स्वतंत्र राज्य समझते थे तथा महाराणा को भाव नहीं देते थे। इससे महाराणा इन दोनों राज्यों से कुपित रहा करते थे

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  • एक ही स्त्री से प्रेम करते थे कोटा नरेश गुमानसिंह तथा झाला जालिमसिंह

     15.06.2017
    एक ही स्त्री से प्रेम करते थे कोटा नरेश गुमानसिंह तथा झाला जालिमसिंह

    एक ही स्त्री से प्रेम करते थे कोटा नरेश गुमानसिंह तथा झाला जालिमसिंह झाला जालिमसिंह

    राजपूताने के इतिहास में अद्भुत व्यक्ति हुआ है। वह कोटा राज्य का सेनापति था। उसकी बहिन का विवाह कोटा नरेश गुमानसिंह के साथ हुआ था। इस प्रकार झाला जालिम

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  • भरतपुर ने अंग्रेजों को हिन्दुस्तानी तलवार का पानी पिलाया

     16.06.2017
    भरतपुर ने अंग्रेजों को हिन्दुस्तानी तलवार का पानी पिलाया

    भरतपुर ने अंग्रेजों को हिन्दुस्तानी तलवार का पानी पिलाया

    1757 की प्लासी विजय के बाद से ईस्ट इण्डिया कम्पनी अपनी विजय पताका फहराते हुए बंगाल से उत्तर भारत की ओर बढ़ रही थी। उत्तरी भारत में उन्हें मराठों से लोहा लेना पड़ा था जो इस पूरे क्षेत्र

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  • सालिमसिंह के अत्याचारों से तंग होकर पालीवाल ब्राह्मणों ने जैसलमेर छोड़ दिया

     16.06.2017
    सालिमसिंह के अत्याचारों से तंग होकर  पालीवाल ब्राह्मणों ने जैसलमेर छोड़ दिया

    सालिमसिंह के अत्याचारों से तंग होकर पालीवाल ब्राह्मणों ने जैसलमेर छोड़ दिया

    पल्लिका नगर के रहने वाले ब्राह्मण पालीवाल ब्राह्मण कहलाये। पल्लिका को अब पाली के नाम से जाना जाता है। पालीवाल ब्राह्मणों का बड़ा ही सम्पन्न समुदाय था। तेरहवी

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