Blogs Home / Blogs / भारत में साम्प्रदायिकता की समस्या एवं हिन्दू प्रतिरोध का इतिहास / अध्याय - 33 : भारत में रोहिंग्या मुसलमानों का खतरा
  • अध्याय - 33 : भारत में रोहिंग्या मुसलमानों का खतरा

     08.06.2018
    अध्याय - 33 : भारत में रोहिंग्या मुसलमानों का खतरा

    अध्याय - 33


    भारत में रोहिंग्या मुसलमानों का खतरा

    रोहिंग्या मुसलमान मूलतः बांग्लादेश के निवासी हैं। जिस तरह करोड़ों बांग्लादेशी भारत में घुसपैठ करते रह रहे हैं, उसी प्रकार रोहिंग्या मुसलमान भी रोजी-रोटी की तलाश में बांग्लादेश छोड़कर म्यांमार (बर्मा) के रखाइन प्रांत में घुस गए जो बर्मा-बांग्लादेश सीमा पर स्थित है। ई.1962 से 2011 तक बर्मा में सैनिक शासन रहा। इस अवधि में रोहिंग्या मुसलमान शांत बैठे रहे किंतु जैसे ही वहाँ लोकतंत्र आया, रोहिंग्या मुसलमान बदमाशी पर उतर आए। जून 2012 में बर्मा के रखाइन प्रांत में रोहिंग्या मुसलमानों ने एक बौद्ध युवती से बलात्कार किया। जब स्थानीय बौद्धों ने इसका विरोध किया तो रोहिंग्या मुसलमानों ने संगठित होकर बौद्धों पर हमला बोला। इसके विरोध में बौद्धों ने भी संगठित होकर रोहिंग्या मुसलमानों पर हमले किए। इस संघर्ष में लगभग 200 लोग मारे गए जिनमें रोहिंग्याओं की संख्या अधिक थी। तब से दोनों समुदायों में अनवरत हिंसा आरम्भ हो गई।

    बहुत से रोहिंग्या भाग कर बांगलादेश तथा भारत आ गए। रोहिंग्याओं ने अराकान रोहिंग्या रक्षा सेना का निर्माण किया तथा बौद्धों के कई गांव नष्ट करके बौद्धों के शव खड्डों में गाढ़ दिए। रोहिंग्या रक्षा सेना ने अक्टूबर 2016 में रखाइन में कई पुलिस चौकियों पर हमले किए तथा 9 पुलिस-कर्मियों की हत्या कर दी। इसके बाद बर्मा की पुलिस, रोहिंग्याओं को बेरहमी से मारने और उनके घर जलाने लगी। इस कारण बर्मा से रोहिंग्याओं के पलायन का नया सिलसिला आरम्भ हुआ। उन्होंने नावों में बैठकर थाइलैण्ड की ओर पलायन किया किंतु थाइलैण्ड ने इन नावों को अपने देश के तटों पर नहीं रुकने दिया। इसके बाद रोहिंग्या मुसलमानों की नावें इण्डोनेशिया की ओर गईं और वहाँ की सरकार ने उन्हें शरण दी। बहुत से रोहिंग्या मुसलमानों ने भागकर बांग्लादेश में शरण ली किंतु भुखमरी तथा जनसंख्या विस्फोट से संत्रस्त बांग्लादेश, रोहिंग्या मुसलमानों का भार उठाने की स्थिति में नहीं है, इसलिए रोहिंग्याओं को वहाँ भोजन, पानी रोजगार कुछ भी प्राप्त नहीं हुआ और हजारों रोहिंग्याओं ने भारत की राह पकड़ी। भारत का पूर्वी क्षेत्र पहले से ही बांग्लादेश से आए मुस्लिम शरणार्थियों से भरा हुआ है, अतः भारत नई मुस्लिम शरणार्थी प्रजा को स्वीकार करने की स्थिति में नहीं है। भारत में कम्युनिस्ट विचारधारा तथा मानवाधिकारों की पैरवी करने वाले संगठनों से जुड़े बुद्धिजीवियों ने भारत सरकार पर दबाव बनाना आरम्भ किया है कि रोहिंग्या मुसलमानों को भारत स्वीकार करे क्योंकि श्रीलंका तथा तिब्बत से आए बौद्ध शरणार्थियों को, पाकिस्तान से आए हिन्दू शरणार्थियों को एवं बांग्लादेश से आए मुस्लिम शरणार्थियों को भारत स्वीकार करता रहा है।

    बांग्लादेश तथा बर्मा से आए रोहिंग्या मुसलमान 1980 के दशक से भारत में रह रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र की शरणार्थी एजेंसी के अनुसार भारत में रोहिंग्या मुसलमानों की पंजीकृत संख्या 14 हजार से अधिक है किंतु भारतीय एजेंसियों के अनुसार भारत में लगभग 40 हजार रोहिंग्या अवैध रूप से रह रहे हैं। रोहिंग्या मुख्य रूप से भारत के जम्मू, हरियाणा, हैदराबाद, दिल्ली, राजस्थान, उत्तर प्रदेश आदि प्रदेशों में रहते हैं। जम्मू में रोहिंग्या मुसलमानों ने हिन्दुओं पर आक्रमण भी किए हैं।

    अलकायदा एवं आईएसआईएस ने कहा है कि दक्षिण एशिया में उनका धड़ा है जो बांग्लादेश-म्यांमार में मौजूद है। ऐसी अंतर्राष्ट्रीय राय बन रही है कि संभवतः इनकी जड़ें रोहिंग्या मुसलमानों में हैं। रोहिंग्याओं की अराकान रोहिंग्या रक्षा सेना का नेता कराची मे पैदा हुआ और सऊदी अरब से शिक्षा पाने के बाद वहीं से इस संगठन का संचालन कर रहा है। अतः यह आशंका होना स्वाभाविक है कि आने वाले समय में रोहिंग्याओं की संख्या भारत में तेजी से बढ़ेगी और वे हिन्दुओं के विरुद्ध चल रहे जेहाद का हिस्सा बनेंगे। इसलिए भारत के हिन्दू नहीं चाहते हैं कि बर्मा अथवा बांग्लादेश से और अधिक रोहिंग्याओं को स्वीकार किया जाए।

  • अध्याय - 33 अध्याय - 33 अध्याय - 33
    Share On Social Media:
Categories
SIGN IN
Or sign in with
 
×
Forgot Password
×
SIGN UP
Already a user ?
×