Blogs Home / Blogs / अजमेर नगर का इतिहास - पुस्तक / अजमेर का इतिहास - 91
  • अजमेर का इतिहास - 91

     02.06.2020
    अजमेर का इतिहास - 91

    आधुनिक काल में अजमेर के ऐतिहासिक व्यक्ति (3)


    हमारी नई वैबसाइट - भारत का इतिहास - www.bharatkaitihas.com

    दीनबंधु चौधरी


    दीनबंधु चौधरी का जन्म 19 दिसम्बर 1936 को डूंगरपुर जिले के खड़लाई गांव में हुआ। उनके पिता कप्तान दुर्गा प्रसाद चौधरी अजमेर के प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी थे। दीनबंधु ने गवर्नमेंट कॉलेज अजमेर से बीएससी गणित की उपाधि प्राप्त की। शिक्षा पूर्ण होने पर उन्होंने दैनिक नवज्योति के सम्पादन का काम संभाला। वर्तमान में यह समाचार पत्र अजमेर, जयपुर, कोटा तथा जोधपुर से प्रकाशित होता है तथा दीनबंधु इसके प्रबंध सम्पादक हैं। उन्होंने अजमेर के विकास के लिये कई जनआंदोलनों का नेतृत्व किया है।

    वे सिटीजन्स कौंसिल अजमेर के महासचिव हैं। उनके प्रयासों से इस संस्था ने आना सागर झील का उद्धार किया तथा इसमें से 85 लाख क्यूबिक फुट मिट्टी निकलवाई। ई.1977 में राष्ट्रपति डॉ. के. आर. नारायण ने उन्हें राष्ट्र स्तरीय मातुश्री पुरस्कार से सम्मानित किया। उन्होंने पत्रकारिता के लिये देश के कई प्रधानमंत्रियों यथा राजीव गांधी, पी. वी. नरसिंहाराव, वी. पी. सिंह, अटल बिहारी वाजपेयी, मनमोहनसिंह कि साथ कई देशों की यात्रा की है।

    यूएसएसआर के निमंत्रण पर वे विशिष्ट अतिथि के रूप में रूस की 13 दिन की यात्रा कर चुके हैं। कुवैत सरकार के निमंत्रण पर वहां भी पाँच दिन की यात्रा कर चुके हैं। वे अनेक राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं के सदस्य हैं। वे अजमेर जिला स्वतंत्रता सेनानी संघ के अध्यक्ष हैं। वे बैडमिण्टन के राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी भी रहे हैं।

    दुर्गा प्रसाद चौधरी (कप्तान)

    कप्तान दुर्गा प्रसाद चौधरी का जन्म 18 दिसम्बर 1906 को नीम का थाना के प्रसिद्ध अग्रवाल परिवार में हुआ। दुर्गा प्रसाद चौधरी स्वतंत्रता सेनानी, पत्रकार एवं समाजसेवी थे। उनके चार भाई और तीन बहिनें थीं। बड़े भाई रामनारायण चौधरी प्रख्यात स्वतंत्रता सेनानी थे। ई.1921 से 1947 के मध्य दुर्गा प्रसाद स्वाधीनता आंदोलन में संलग्न रहे। ई.1930 से 1945 तक वे कांग्रेस सेवादल के कप्तान रहे। इसलिये उन्हें कप्तान साहब के नाम से जाना गया। ई.1936 में उन्होंने अजमेर से साप्ताहिक समाचार पत्र नवज्योति का प्रकाशन एवं सम्पादन आरंभ किया।

    इस अखबार ने आजादी की लड़ाई में मशाल का काम किया। देशी रियासतों के विरुद्ध मोर्चा खोलने वाले अखबारों में यह एक अग्रणी अखबार था। अब वह समाचार पत्र दैनिक नवज्योति के नाम से निकलता है। ई.1942 में भारत छोड़ो आंदोलन में भाग लेने के कारण कप्तान साहब को जेल में बंद कर दिया गया। वे तीन वर्ष तक जेल में बंद रहे। इससे पूर्व भी वे एक बार तीन माह के लिये, दूसरी बार 6 माह के लिये तथा तीसरी बार 1 वर्ष के लिये जेल में रहे थे। ई.1962 के चीन युद्ध के दौरान वे युद्ध की रिपोर्टिंग के लिये असम में मैकमोहन रेखा पर स्थित युद्ध के मोर्चों पर भी गये। ई.1992 में उनका निधन हुआ।

    नृसिंहदास (बाबाजी)

    नृसिंह दास का जन्म 31 जुलाई 1890 को नागौर के प्रतिष्ठित अग्रवाल परिवार में हुआ। उन्होंने नागौर, बीकानेर तथा हैदराबाद में महाजनी पढ़ी। जब देश में स्वतंत्रता संग्राम की चिन्गारियां स्फुरित हुईं तो नृसिंहदास ने अपने लाखों रुपये के कारोबार को तिलांजलि दे दी तथा अपनी और अपनी पत्नी के विदेशी कपड़ों की होली जलाकर बाबाजी बन गये। उन्होंने स्वतंत्रता सेनानियों तथा क्रांतिकारियों के परिवारों एवं उनके बालकों की देखभाल, शिक्षा-दीक्षा और शादी विवाह करवाने का कार्य हाथ में लिया। बाबाजी ने कई बार बम्बई से हथियार खरीद कर क्रांतिकारियों तक पहुँचाये। मोहनदास गांधी से उनका वैचारिक मतभेद रहता था। 22 जुलाई 1957 को बाबाजी का अजमेर में निधन हुआ।

    बालकृष्ण कौल

    बालकृष्ण कौल का जन्म 18 जून 1903 को उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद कस्बे में हुआ। आपने बी.ए. तक शिक्षा प्राप्त की। केवल 17 वर्ष की आयु में ई.1920 से वे सक्रिय राजनीति से जुड़ गये। ई.1921 में असहयोग आंदोलन, 1930-31 में नमक सत्याग्रह एवं सविनय अवज्ञा आंदोलन, ई.1940-41 में व्यक्तिगत सत्याग्रह और ई.1942 में भारत छोड़ो आंदोलन में उन्होंने सक्रिय भाग लिया। वे छः साल तक जेल में रहे। ई.1952 से 1957 तक वे अजमेर विधानसभा के सदस्य रहे। इस दौरान वे ई. 1952 से 56 तक अजमेर प्रांत के गृह एवं वित्त मंत्री रहे। ई.1962 से 1967 तक राजस्थान विधानसभा के सदस्य रहे। ई.1968 में वे राज्यसभा के लिये चुने गये। वे संसद की लोकलेखा समिति के सदस्य भी रहे।

    बालकृष्ण गर्ग

    बालकृष्ण गर्ग का जन्म 9 दिसम्बर 1908 को अजमेर में हुआ। ई.1930 में वे कांग्रेस से जुड़े। ई.1942 तक उन्होंने अनेक आंदोलनों में भाग लिया तथा कई बार जेल गये। 8 से 16 अप्रेल 1940 तक अजमेर कांग्रेस के राष्ट्रीय सप्ताह में झण्डा फहराने पर बालकृष्ण गर्ग को चार माह की कठोर जेल दी गई। वे अजमेर राज्य के प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष रहे। अजमेर-मेरवाड़ा सम्मिलित कांग्रेस के उपाध्यक्ष एवं प्रधानमंत्री रहे। वे हरिजन सेवक संघ तथा भारत सेवक समाज के अध्यक्ष रहे। ई.1937 में उन्होंने अजमेर-मेरवाड़ा ग्राम सेवा मण्डल की स्थापना की। वे अजमेर नगर परिषद के सदस्य भी रहे।

    रवीन्द्र कृष्ण मजबूर

    रवीन्द्र कृष्ण मजबूर का जन्म अविभाजित भारत के उस हिस्से में हुआ था जो भारत विभाजन के बाद पाकिस्तान में चला गया। भारत विभाजन के बाद उनका परिवार पंजाब आ गया। बाद में रवीन्द्र कृष्ण अजमेर आ गये। वे इस युग के प्रमुख शायरों में से हैं। उनकी शायरी में गंभीर दर्शन एवं अध्यात्म देखने को मिलता है। उन्होंने हिन्दी, उर्दू एवं अंग्रेजी में पुस्तकें लिखीं। उनकी लिखी पुस्तकों में इन साइड दी पेन, तुम्हारी तुम जानो, सब सहना है मजबूर आदि प्रसिद्ध हैं। संत मुरारी बापू उनकी शायरी से बहुत प्रभावित हुए तथा उनसे मिलने के लिये उनके निवास पर आये। मजबूर की पत्नी सत्यकृष्णा का परिवार भी पाकिस्तान के सियालकोट से आया था। वे सेंट्रल गर्ल्स स्कूल में हिन्दी की वरिष्ठ अध्यापिका रहीं और अध्यापन एवं लोक सेवा के लिये कई बार सम्मानित हुईं।

    हमारी नई वैबसाइट - भारत का इतिहास - www.bharatkaitihas.com


  • Share On Social Media:
Categories
SIGN IN
Or sign in with
×
Forgot Password
×
SIGN UP
Already a user ?
×