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  • अजमेर का इतिहास - 86

     02.06.2020
    अजमेर का इतिहास - 86

    बीसवीं सदी में अजमेर में शिक्षा


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    बीसवीं सदी के आरंभ में ब्राह्मण शिक्षकों को ईसाई शिक्षकों द्वारा प्रतिस्थापित किया जाने लगा क्योंकि तब तक मिशन द्वारा बहुत से हिन्दुस्तानियों को ईसाई धर्म में परिवर्तित करके उन्हें शिक्षक नियुक्त करने योग्य बना लिया था। इससे ब्राह्मण शिक्षकों में असंतोष पनपा क्योंकि भारत में ब्राह्मण ही यह कार्य परम्परा से करते आ रहे थे। इसलिये सरकार ने ई.1913 में अजमेर मेरवाड़ा क्षेत्र में चल रहे 15 मिशनरी स्कूलों में केवल 9 स्कूलों को बंद कर दिया तथा मिशनरी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की संख्या 500 से घटाकर 160 कर दी।

    सरकारी स्कूलों के खुलने एवं उनमें अंग्रेजी की शिक्षा दिये जाने से देशी स्कूलों को भी अपने पाठ्यक्रमों में अंग्रेजी की शिक्षा सम्मिलित करनी पड़ी तथा इन स्कूलों का भी तेजी से विकास हुआ। धीरे-धीरे मकतब और पोसालों का स्थान ऐसी पाठशालायें लेने लगीं जिनमें वास्तविक एवं ठोस शिक्षा दी जाती थी। ई.1931-32 में शिक्षा बोर्ड द्वारा ऐसी स्कूलों को 2000 रुपये की आर्थिक सहायता दी गई। इन पाठशालाओं में सामाजिक और राष्ट्रीय चेतना के बारे में शिक्षा दी जाती थी।

    वर्तमान समय में अजमेर की शिक्षण संस्थायें

    अजमेर का राजकीय महाविद्यालय राजस्थान का पहला महाविद्यालय है। दयानन्द महाविद्यालय अपनी कृषि स्नातक शिक्षा के लिये प्रसिद्ध रहा है। इस महाविद्यालय में कृषि फार्म, डेयरी, तरणताल तथा कृषि विज्ञान की प्रयोगशालायें देखने योग्य हैं। इन दोनों महाविद्यालयों का उल्लेख प्रसंगानुसार पूर्व के अध्यायों में कर दिया गया है। महिला शिक्षा के लिये यहाँ का अंग्रजी माध्यम का सोफिया कॉलेज भारत के सर्वश्रेष्ठ कॉलेजो में गिना जाता है। इस महाविद्यालय की छात्रायें अपने आधुनिक विचारों एवं आधुनिकतम परिधानों के लिये प्रसिद्ध हैं। सावित्री कॉलेज महिलाओं का हिन्दी माध्यम कॉलेज है। आदर्शनगर में अन्ध विद्यालय भी अजमेर की महत्त्वपूर्ण शिक्षण संस्थाओं में से एक है। मूक एवं बधिरों के लिए भी एक विद्यालय लम्बे समय से कार्यरत है। मेयो कॉलेज भी भारत के शैक्षणिक जगत में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। इसका उल्लेख भी प्रसंगानुसार पूर्व के अध्याय मंू अलग से कर दिया गया है।

    महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय

    1 अगस्त 1987 को अजमेर विश्वविद्यालय की स्थापना की गई। अपनी स्थापना के साथ ही इसके कंधों पर राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में निवास कर रहे लगभग 1.5 लाख विद्यार्थियों के लिये परीक्षाएं आयोजित करने का भार आ गया। ई.1990 में अजमेर विश्वविद्यालय में इतिहास, राजनीति विज्ञान, प्राणी शास्त्र, वनस्पति शास्त्र तथा गणित विभाग आरंभ किये गये। ई.1991 में एम.फिल. की उपाधि आरंभ की गई। इसी वर्ष पर्यावरण प्रौद्यागिकी, माइक्रोबायोलोजी आदि में पीजी डिप्लोमा तथा व्यवसायोन्मुखी पाठ्यक्रम आरंभ किये गये।

    प्रयोगशालाओं की स्थापना की गई। मई 1992 में अजमेर विश्वविद्यालय का नाम बदलकर महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय किया गया। ई.1993 में इसे नये परिसर में स्थानांतरित किया गया। इस वर्ष माइक्रोबायोलॉजी विभाग, खाद्य एवं पोषण विभाग, एप्लाईड कैमिस्ट्री, प्रबंधन अध्ययन एवं कम्प्यूटर एप्लीकेशन्स विभाग आरम्भ किये गये। इसके बाद के कुछ ही वर्षों में विभिन्न विभागों में शोध कार्य, शोध पाठ्यक्रम तथा पीएचडी डिग्री हेतु प्रयोग एवं अध्ययन आरंभ किया गया। वर्तमान में इसमें 24 विभिन्न विभाग हैं।

    इस विश्वविद्यालय से राज्य के 9 जिलों के 214 राजकीय एवं निजी क्षेत्र के महाविद्यालय सम्बद्ध हैं। इस विश्वविद्यालय द्वारा वर्तमान में लगभग 1.35 लाख विद्यार्थियों के लिये प्रतिवर्ष विभिन्न परीक्षायें आयोजित करवाई जाती हैं। इसका मुख्य परिसर अजमेर से सात किलोमीटर दूर घूघरा गांव के निकट अजमेर-जयपुर सड़क पर स्थित है। यह बहुत सुंदर बना हुआ है।

    केन्द्रीय विश्वविद्यालय

    केन्द्रीय विश्वविद्यालय की स्थापना 20 मार्च 2009 को हुई। यह अजमेर-जयपुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर किशनगढ़ के पास बांदरा सिंदरी में मुख्य मार्ग से सात सौ मीटर दूर स्थापित की गई है। जो अजमेर से 46 किलोमीटर दूर है। इसके प्रथम चांसलर प्रो. एम. एम. सांखुले थे।

    क्षेत्रीय महाविद्यालय

    पुष्कर रोड पर स्थित क्षेत्रीय महाविद्यालय की स्थापना ई.1963 में हुई। इसमें देश भर से छात्र-छात्राएं पढ़ने के लिये आते हैं। इसके परिसर में डिमोंस्ट्रेशन स्कूल स्थापित हैं। इस संस्था में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर शिक्षा में होने वाले परिवर्तनों का परीक्षण किया जाता है।

    सोफिया कॉलेज

    सोफिया कॉलेज की स्थापना ई.1919 में कन्या विद्यालय के रूप में हुई। ई.1926 में इसे पब्लिक इंग्लिश स्कूल के रूप में मान्यता दे दी गई। ई.1927 में इसे शिक्षा विभाग द्वारा अनुदान देना आरंभ किया गया। ई.1935 में यह हाईस्कूल के रूप में क्रमोन्नत किया गया। ई.1942 में यह इंटर कॉलेज बना। यह राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त संस्थान है। ई.1959 में यहां त्रिवर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम आरंभ किया गया। तब इसे राजस्थान विश्वविद्यालय जयपुर से सम्बद्ध किया गया। वर्तमान में यह महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय से सम्बद्ध है।

    सावित्री कॉलेज

    सावित्री कॉलेज की स्थापना ई.1914 में प्राथमिक कन्या विद्यालय के रूप में की गई। इसे ई.1933 में हाईस्कूल के रूप में क्रमोन्नत किया गया। ई.1943 में इसे इण्टमीडियेट कॉलेज के रूप में तथा ई.1951 में डिग्री कॉलेज के रूप में क्रमोन्नत किया गया। अब यहाँ स्नातकोत्तर तक की शिक्षा होती है। संगीत एवं चित्रकला की शिक्षा भी स्नातकोत्तर स्तर पर दी जाती है।

    कॉन्वेण्ट गर्ल्स कॉलेज

    अजमेर का कॉन्वेण्ट गर्ल्स कॉलेज इण्टर कॉलेज के रूप में खोला गया था। बाद में इसमें डिग्री की पढ़ाई करवाई जाने लगी।

    व्यावसायिक महाविद्यालय

    अजमेर के व्यावसायिक महाविद्यालयों में जियालाल शिक्षक प्रशिक्षण संस्थान, राजकीय शिक्षक प्रशिक्षण संस्थान, हरिभाऊ उपाध्याय महिला शिक्षक महाविद्यालय के नाम प्रमुख हैं। अजमेर में जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज, राजकीय पोलिटेक्निक कॉलेज, महिला पोलिटेक्निक कॉलेज तथा औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान भी स्थित हैं।

    अजमेर में महर्षि दयानन्द विश्वविद्यालय के नाम से यूनीवर्सिटी की भी स्थापना की गई है। संस्कृत शिक्षा के लिये राजकीय शास्त्री संस्कृत महाविद्यालय भी कार्यरत है। पश्चिम रेल्वे के कर्मचारियों को प्रशिक्षित करने के लिये यहाँ का प्रशिक्षण केन्द्र पूरे हिन्दुस्तान में प्रसिद्ध रहा है। अजमेर का विजयसिंह पथिक श्रमजीवी कॉलेज भी किसी समय पूरे भारत में प्रसिद्ध था। वर्तमान में भी जिले में उच्च शिक्षण संस्थाओं का निरंतर विकास हो रहा है। वर्तमान में अजमेर जिले में एक विश्वविद्यालय, 13 स्नातकोत्तर महाविद्यालय, 18 स्नातक महाविद्यालय, 2 अभियांत्रिकी महाविद्यालय, 2 पॉलिटेक्निक कॉलेज, 6 बी. एड. कॉलेज व 3 एम. बी. ए. संस्थान कार्यरत हैं।

    संगीत महाविद्यालय

    19 अक्टूबर 1942 को अजमेर में एन. एन. आयंगर ने अजमेर में संगीत समाज की स्थापना की। इस संस्थान ने संगीत महाविद्यालय की स्थापना की जिसके प्रथम प्राचार्य वी. एन. इनामदार थे। प्रारंभ में यह महाविद्यालय गन्धर्व महाविद्यालय से सम्बद्ध रहा। इसके बाद माधव संगीत महाविद्यालय से जोड़ा गया। ई.1960 से यह बैरागढ़ भोपाल के इंद्रा कला संगीत विश्वविद्यालय से सम्बद्ध हो गया। केन्द्रीय संगीत नाट्य अकादमी एवं राजस्थान संगीत एवं नाटक अकादमी से भी इसे सम्बद्धता प्राप्त है। यहां नृत्य शिक्षण की भी व्यवस्था है।

    विजयसिंह पथिक श्रमजीवी महाविद्यालय

    विजयसिंह पथिक श्रमजीवी महाविद्यालय की स्थापना राजस्थान विद्यापीठ उदयपुर द्वारा 5 अगस्त 1968 को की गई।

    माध्यमिक शिक्षा बोर्ड

    पूरे राजस्थान में दसवीं तथा बारहवीं कक्षाओं की परीक्षायें आयोजित करने वाला माध्यमिक शिक्षा बोर्ड अजमेर में स्थित है। इसकी स्थापना ई.1957 में हुई। यह बोर्ड ई.1958 से 1962 तक हाई स्कूल, हायर सैकेण्डरी तथा इन्टरमीडियेट की परीक्षायें आयोजित करता था। ई.1962 से इन्टरमीडियेट की परीक्षाएं बन्द कर दी गईं। ई.1964 से संस्कृत शालाओं के लिये प्रवेशिका और उपाध्याय परीक्षायें आयोजित की जाने लगीं। ई.1965 से हाई स्कूल परीक्षा के स्थान पर सैकेण्डरी परीक्षा आयोजित की जाने लगी। ई.1986 से सैकेण्डरी व सीनियर सैकेण्डरी (10 तथा 10+2) कक्षाओं की परीक्षायें आयोजित की जा रही हैं। बोर्ड द्वारा प्रतिवर्ष 25 हजार स्वयंपाठी विद्यार्थियों का शिक्षण तथा लगभग 8 लाख विद्यार्थियों की परीक्षायें आयोजित की जाती हैं।

    अंध विद्यालय

    अंध महाविद्यालय नेत्रहीनों की शिक्षा के लिये अंध विद्यालय की स्थापना ई.1935 में श्रीमती मनोरमा टण्डन एवं अन्य समाज सेवियों के प्रयासों से हुई। ई.1951 में इसे केन्द्र सरकार ने आदर्श बाल अंध विद्यालय का स्वरूप दे दिया। ई.1956 से यह राजस्थान सरकार के अधीन कार्य कर रहा है।

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