Blogs Home / Blogs / अजमेर नगर का इतिहास - पुस्तक / अजमेर का इतिहास - 85
  • अजमेर का इतिहास - 85

     02.06.2020
    अजमेर का इतिहास - 85

    राजस्थान में प्रवेश


    हमारी नई वैबसाइट - भारत का इतिहास - www.bharatkaitihas.com

    जैसे-जैस राजस्थान आकार लेता जा रहा था, अजमेर को राजस्थान में सम्मिलित करने की मांग बढ़ती जा रही थी। राजस्थान सरकार ने भारत सरकार के समक्ष अपना दावा प्रस्तुत करके कहा कि नृजातीयता (मदजीदवसवहपबंससल), एकता तथा भाषा की दृष्टि से अजमेर सदैव से ही राजस्थान का अंग रहा है। ब्रिटिश शासन काल में पूर्णतः राजनीतिक दृष्टि से अजमेर को छोटा किंतु सामरिक दृष्टि से महत्त्वपूर्ण मानकर उसे केन्द्र सरकार के अधीन रखने की आवश्यकता अनुभव हुई थी जिससे राजस्थान की रियासतों पर ब्रिटिश शासन की सत्ता बनी रहे।

    राजस्थान बनने से पहले अजमेर चारों तरफ से रियासतों से घिरा हुआ था किंतु राजस्थान बनने के बाद स्थिति बदल गई थी। राजस्थान का प्रशासनिक ढांचा संविधान के अंतर्गत पार्ट बी स्टेट का होने से पार्ट सी स्टेट की तुलना में काफी प्रगतिशील और लोकतांत्रिक है। ब्रिटिश सरकार द्वारा अजमेर मेरवाड़ा को सीधे केन्द्रीय नियंत्रण में रखने के आधार भी बदले हुए परिवेश में अप्रासंगिक हो गये हैं और अजमेर स्टेट के पृथक प्रशासनिक इकाई के रूप में निरतंरता प्रदान करने को कोई औचित्य नहीं रह गया। इस पर जो खर्च किया जा रहा था, वह भी जनसंख्या तथा राजस्व को देखते हुए असंतुलित था।

    अरावली पर्वत माला की तलहटी में डकैती की स्थिति बनी हुई थी। प्रायः डकैत अजमेर के सीमावर्ती पाली, भीलवाड़ा, उदयपुर आदि जिलों में डकैती डालकर अजमेर के क्षेत्र में घुस जाया करते थे। अजमेर की अधिकांश जनता भी यह चाहती थी कि ऐसी प्रशासनिक व्यवस्था की जाये जिससे जनता को पूरा लाभ मिल सके और उसके संसाधनों को भारी भरकम तथा खर्चीली प्रशासनिक मशीनरी द्वारा लंगड़ा न बनाया जाये। अजमेर में प्रजातांत्रिक शासन की स्थापना करने के लिये इसे राजस्थान में विलय करने तथा राजस्थान राज्य प्रशासन के अंतर्गत लाने की मांग की गई।

    अजमेर जिले का प्रशासनिक पुनर्गठन

    राजस्थान सरकार तथा राजस्थान की जनता की मांग को देखते हुए 1 नवम्बर 1956 को राज्य पुनर्गठन अधिनियम प्रभाव में आया। अजमेर राज्य का राजस्थान राज्य में विलय कर दिया गया तथा अजमेर नाम से, राजस्थान के 26वें जिले का गठन किया गया। 1 दिसम्बर 1956 को, जयपुर जिले में सम्मिलित पूर्ववती किशनगढ़ रियासत, अजमेर जिले में सम्मिलित कर दी गई। किशनगढ़ में उस समय चार तहसीलें-किशनगढ़, रूपनगढ़, अरांई एवं सरवाड़ थीं।

    कैपीटल इन्कवायरी कमीशन

    11 जून 1956 को सत्यनारायण राव की अध्यक्षता में कैपीटल इन्कवायरी कमीशन का गठन हुआ। इस कमीशन की रिपोर्ट के आधार पर अजमेर में राजस्थान लोक सेवा आयोग का मुख्यालय खोला गया। 4 दिसम्बर 1957 को पारित शिक्षा अधिनियम के अंतर्गत अजमेर में माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की स्थापना की गई। अजमेर में राजस्थान राजस्व मण्डल तथा राजस्थान आयुर्वेद निदेशालय की स्थापना की गई। ई.1956 में अजमेर जिले को जयपुर संभाग में सम्मिलित किया गया। जयपुर संभाग का नाम बदल कर अजमेर संभाग कर दिया गया किन्तु संभाग का मुख्यालय जयपुर में ही रखा गया। केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड का क्षेत्रीय कार्यालय एवं रीजनल कॉलेज की भी अजमेर में स्थापना करके इसके महत्त्व को बनाये रखा गया।

    विभिन्न विकास कार्य

    15 जून 1958 से राजस्थान का भूमि राजस्व अधिनियम 1950 तथा खातेदारी अधिनियम 1955 अजमेर जिले में भी प्रभावी किये गये। 22 जुलाई 1958 को राजस्व मण्डल का अजमेर में हस्तांतरण किया गया। ई. 1959-60 में तहसीलों का पुनर्गठन किया गया और अरांई तथा रूपनगढ़ तहसीलें समाप्त कर दी गईं। जिले में पांच तहसीलें अजमेर, किशनगढ़, ब्यावर, केकड़ी एवं सरवाड़ बना दी गईं। केकड़ी तहसील का हिस्सा देवली अलग करके टोंक जिले में मिला दिया गया। ई.1962 में सुखाड़िया सरकार ने संभागीय व्यवस्था को समाप्त कर दिया।

    26 जनवरी 1987 को हरिदेव जोशी सरकार ने संभागीय व्यवस्था को पुनर्जीवित किया। अजमेर संभाग सहित 6 संभागों का निर्माण हुआ। अजमेर, भीलवाड़ा, टोंक और नागौर जिले, अजमेर संभाग में रखे गये। 1 अगस्त को अजमेर में महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय की स्थापना की गयी। 5 मई 1992 को अजमेर विश्वविद्यालय का नाम बदलकर महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय किया गया।

    ई.1996 में तारागढ़ दुर्ग के मार्ग पर भारत के अन्तिम हिन्दू सम्राट पृथ्वीराज चौहान (तृतीय) की स्मृति में एक स्मारक बनवाया गया। सम्राट पृथ्वीराज की अश्वारूढ़ प्रतिमा स्थापित की गयी। ई.1997 में पुष्कर मार्ग पर नाग पहाड़ की गोद में दाहिरसेन स्मारक का निर्माण किया गया। यहाँ सिंधुपति महाराजा दाहिरसेन, संत कंवरराम, हेमू कालानी, स्वामी विवेकानंद तथा हिंगलाज माता की मूर्तियाँ लगाई गई हैं। 19 जुलाई 2000 को अजमेर में अजमेर विद्युत वितरण निगम की स्थापना की गयी।

    हमारी नई वैबसाइट - भारत का इतिहास - www.bharatkaitihas.com


  • Share On Social Media:
Categories
SIGN IN
Or sign in with
×
Forgot Password
×
SIGN UP
Already a user ?
×