Blogs Home / Blogs / अजमेर नगर का इतिहास - पुस्तक / अजमेर का इतिहास - 83
  • अजमेर का इतिहास - 83

     02.06.2020
    अजमेर का इतिहास - 83

    अजमेर के स्वतंत्रता आंदोलन में प्रेस की भूमिका


    हमारी नई वैबसाइट - भारत का इतिहास - www.bharatkaitihas.com

    अजमेर के स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में प्रेस का विशिष्ट स्थान रहा है। राजपूताना रियासतों में नागरिकों को आंदोलन करने तथा शासकों के विरुद्ध अपनी बात रखने के लिये नाम मात्र की भी स्वतंत्रता नहीं थी। जबकि अजमेर-मेरवाड़ा प्रांत में ब्रिटिश सत्ता होने से जनता को कुछ सीमा तक नागरिक अधिकार प्राप्त थे। यही कारण है कि स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान अजमेर में कई संगठनों की स्थापना हुई तथा बड़ी संख्या में समाचार पत्रों का प्रकाशन हुआ जिन्होंने सम्पूर्ण राजपूताने में राजनीतिक चेतना का अलख जगाया।

    ई.1885 में भारत में कांग्रेस की स्थापना हुई। इसी वर्ष अजमेर से कुछ समाचार पत्र प्रारंभ हुए। इनमें सबसे पहला समाचार पत्र राजस्थान टाइम्स था। यह अंग्रेजी समाचार पत्र था। इसका हिन्दी संस्करण राजस्थान पत्रिका के नाम से निकला। दोनों पत्रों के सम्पादकीय लेखों में अंग्रेजी प्रशासन की खुलकर आलोचना की जाती थी। ई.1888 में इन समाचार पत्रों के प्रकाशन पर प्रतिबंध लगा दिया गया तथा इनके सम्पादक बक्शी लक्ष्मणदास को जेल में डालकर उन पर मुकदमा चलाया गया तथा डेढ़ साल के कारावास की सजा दी गई। ई.1907 में यह समाचार पत्र ब्रिटिश अधिकारियों द्वारा किये गये दमन के कारण बंद हो गया।

    ई.1885 में अजमेर से राजपूताना हेराल्ड नामक समाचार पत्र का प्रकाशन आरंभ हुआ। इसके सम्पादक हनुमानसिंह थे तथा यह अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित होता था। इस पत्र में भारतीय राज्यों में अंग्रेज अधिकारियों के अनावश्यक हस्तक्षेप के विरुद्ध लेख एवं समाचार छपते थे। इस समाचार पत्र में इस विषय पर इतने लेख छपे कि ब्रिटिश संसद में इन लेखों के आधार पर अनेक प्रश्न उठे। विजयसिंह पथिक ने अजमेर से राजस्थान संदेश नामक साप्ताहिक समाचार पत्र का प्रकाशन किया। आर्थिक अभाव के कारण इसे बंद करना पड़ा। पथिकजी ने नव संदेश नामक पत्र निकाला किंतु वह भी अर्थाभाव के कारण नियमित रूप से नहीं चल सका। इस समाचार पत्र ने जन साधारण में काफी लोकप्रियता प्राप्त कर ली थी।

    ई.1885 में ही अजमेर से राजपूताना मालवा टाईम्स नामक समाचार पत्र प्रारंभ हुआ। इसकी विषय वस्तु में भी देशी रियासतों में अंग्रेज अधिकारियों के अनावश्यक हस्तक्षेप का विरोध सम्मिलित था। ये समाचार पत्र अंग्रेजी में छपने के कारण आम पाठक से दूर थे किंतु इन्होंने प्रबुद्ध वर्ग को काफी सीमा तक प्रभावित किया।

    ई.1889 में अजमेर से अमृतदास चारण ने राजस्थान समाचार नामक साप्ताहिक हिन्दी समाचार पत्र प्रारम्भ किया। यह समाचार पत्र आर्यसमाज के विचारों से काफी प्रभावित था तथा इसमें राष्ट्रीय आंदोलन से सम्बन्धित सामग्री भी छपती थी। अजमेर से राजपूताना गजट नामक एक समाचार पत्र 19वीं सदी के अंतिम दशक में प्रारम्भ हुआ। इसने राजपूताना एवं अन्य क्षेत्रों के शासकों के अन्याय पूर्ण निर्णयों की भर्त्सना की तथा सामाजिक बुराइयों के विरुद्ध वकालात की। इन समाचार पत्रों ने अजमेर के नागरिकों में जन चेतना पैदा करने का प्रयास किया जिससे अजमेर राजनीतिक चेतना का गढ़ बन गया।

    ई.1919 के पश्चात् समाचार पत्रों के प्रकाशन में और अधिक प्रगति हुई। समाचार पत्रों के प्रचलन में आने से प्रांतों की दूरियां मिट गई थीं तथा राजनीतिक आंदोलन प्रांत की सीमाओं को पार करके राष्ट्रीय चरित्र प्राप्त करता चला गया था। ई.1919 के पश्चात् देश में क्रांतिकारी आंदोलन का स्थान कांग्रेस के अहिंसा आंदोलन ने ले लिया। गांधीजी द्वारा प्रारंभ असहयोग आंदोलन, राजस्थान में अजमेर से प्रारंभ हुआ। गांधीजी की प्रेरणा से अर्जुनलाल सेठी, केसरीसिंह बारहठ, विजयसिंह पथिक आदि ने शांतिपूर्ण तरीके से राजनीतिक चेतना जागृत करने और सामाजिक सुधारों के उद्देश्य से राजस्थान सेवा संघ की स्थापना की।

    ई.1920 में इसका कार्यालय वरधा से अजमेर में स्थानांतरित कर दिया गया। कोटा, जोधपुर, उदयपुर एवं बूंदी में इसकी शाखायें स्थापित की गईं। इस समय अजमेर में तीन दलों के नेतृत्व में स्वतंत्रता सम्बन्धी गतिविधियां संचालित की जा रही थीं- विजयसिंह पथिक प्रथम दल का नेतृत्व कर रहे थे, अर्जुनलाल सेठी दूसरे दल का और जमनालाल बजाज एवं हरिभाऊ उपाध्याय के हाथों में तीसरे दल का नेतृत्व था। ई.1919 के बाद राजस्थान केसरी व तरुण राजस्थान का प्रकाशन आरम्भ हुआ। ई.1918 में राजपूताना मध्य भारत सभा की स्थापना हुई तथा ई.1919 से राजस्थान केसरी नामक समाचार पत्र वरधा से प्रकाशित होने तक विजयसिंह पथिक को इसका सम्पादक तथा रामनारायण चौधरी को सहायक सम्पादक बनाया गया।

    ई.1922 में विजयसिंह पथिक राजस्थान केसरी के सम्पादन कार्य से मुक्त हो गये। इसी वर्ष उन्होंने अजमेर से नवीन राजस्थान नामक साप्ताहिक हिन्दी समाचार पत्र निकालना आरंभ किया। इस समाचार पत्र का उद्देश्य राजस्थान में राजनीतिक चेतना जागृत कर स्वतंत्रता आंदोलन को आगे बढ़ाना था। इसके माध्यम से मेवाड़ के किसान आंदोलन को भारी समर्थन मिला। मेवाड़ राज्य ने विजयसिंह पथिक के विरुद्ध कार्यवाही करते हुए मई 1923 में उन्हें गिरफ्तार कर लिया। इनकी गिरफ्तारी के बाद नवीन राजस्थान के सम्पादन का भार शोभालाल गुप्त पर आ गया। मेवाड़ राज्य में राजस्थान केसरी एवं नवीन राजस्थान का प्रवेश प्रतिबन्धित कर दिया गया था।

    जयपुर, अलवर और बूंदी राज्यों ने भी अपने यहाँ इन समाचार पत्रों का प्रवेश बंद कर दिया। बूंदी, बरड़, अलवर के किसान आंदोलनों के समर्थन में लेख लिखने के कारण ऐसा किया गया। तरुण राजस्थान पर राजा महेन्द्र प्रताप की एक चिट्ठी और अग्र लेख छापने के आधार पर राजद्रोह का मुकदमा चलाया गया। रामनारायण चौधरी और शोभालाल गुप्त अभियुक्त बनाये गये। इन्हें जेल भेज दिया गया। इनका मुकदमा अंग्रेज कमिश्नर हॉपकिन्स की अदालत में चला। मुकदमे में काफी धांधली हुई।

    अंत में रामनारायण चौधरी को बरी कर दिया गया और शोभालाल गुप्त को एक साल की सजा हुई। शंकरलाल शर्मा ने भी ई.1928 तक तरुण राजस्थान में कार्य किया। तत्कालीन समाचार पत्र समाज सुधार की भूमिका का निर्वाह करते थे। रामनारायण चौधरी ने कम दहेज लाने वाली पुत्रवधू के प्रति अन्याय को बंद करवाया और एक महिला की समस्या सुलझाई जिसके पति की, किशनगढ़ रियासत के दीवान बहादुर पौनस्कर ने हत्या कर दी थी।

    ई.1926 के बाद हरिभाऊ उपाध्याय की गतिविधियाँ मेरवाड़ा में बढ़ीं। उन्होंने अजमेर में सस्ता साहित्य मण्डल की स्थापना की एवं त्यागभूमि नामक समाचार पत्र आरंभ किया। इसके माध्यम से समाज सुधार, महिला उत्थान, छुआछूत विरोध, ग्रामीण उत्थान, चरखा व खादी तथा भारतीय परम्परा एवं संस्कृति के विकास को अपना ध्येय बनाया। जवाहरलाल नेहरू ने भी त्यागभूमि की भारी प्रशंसा की। यह समाचार पत्र आर्थिक अभाव के कारण ई.1931 में बंद हो गया।

    ई.1929 में रामनारायण चौधरी एवं शोभालाल गुप्त ने अजमेर से यंग राजस्थान नामक अंग्रेजी साप्ताहिक समाचार पत्र का प्रकाशन आरम्भ किया। यह समाचार पत्र एक वर्ष ही निकल पाया क्योंकि दिसम्बर 1929 में रामनारायण चौधरी वरधा चले गये। विजयसिंह पथिक उग्र विचारों के व्यक्ति थे, उन्होंने ई.1929 से ई.1932 तक राजस्थान संदेश हिन्दी साप्ताहिक समाचार पत्र अजमेर से प्रकाशित किया। इसके माध्यम से वे राजस्थान में क्रांतिकारी जन चेतना उत्पन्न करने में सफल रहे।

    ई.1934 में उदारवादी विचारों का दरबार नामक समाचार पत्र मदनमोहन लाल गुप्ता के सम्पादन में अजमेर से प्रकाशित होने लगा। यह व्यापारिक आधारों पर संचालित था। 2 अक्टूबर 1936 से राजस्थान सेवक मण्डल के अधीन अजमेर से नवज्योति नामक साप्ताहिक हिन्दी पत्र का प्रकाशन आरम्भ हुआ। प्रारंभ में शोभालाल गुप्त इसके सम्पादक थे तथा शीघ्र ही यह कार्य रामनारायण चौधरी को सौंप दिया गया। इस समाचार पत्र का उद्देश्य राष्ट्रीय चेतना व राष्ट्रीय आंदोलन को विकसित करना था। नवज्योति ने अंग्रेजों व सामंती शासकों की नीतियों का विरोध करते हुए जनता को राष्ट्रीय आंदोलन से जोड़ने का महत्त्वपूर्ण कार्य किया। ई.1942 में रामनारायण चौधरी के साबरमती आश्रम चले जाने के कारण दुर्गाप्रसाद चौधरी नवज्योति के सम्पादक बने। यह राजस्थान में राष्ट्रीय आंदोलन का मुखपत्र बन गया। ई.1948 से यह साप्ताहिक के स्थान पर दैनिक समाचार पत्र बन गया।

    ई.1937 में अजमेर से हिन्दी साप्ताहिक पत्र मीरा का प्रकाशन जगदीश प्रसाद माथुर 'दीपक' एवं उनके भाई अम्बालाल माथुर ने किया। यह समाचार पत्र कांग्रेस, किसान व श्रमिकों का पक्का समर्थक था। देशी रियासतों में महिलाओं के उत्पीड़न के विरुद्ध ही मीरा ने जमकर आवाज उठाई। मीरा का प्रकाशन ई.1964 तक होता रहा। ई.1938 में जगदीश प्रसाद माथुर 'दीपक' के सम्पादन में अजमेर से रियासती नामक साप्ताहिक हिन्दी समाचार पत्र प्रकाशित हुआ। यह समाचार पत्र राजस्थान के स्वतंत्रता आंदोलन का मुख पत्र बन गया। ई.1939 में ठाकुर नारायणसिंह एवं कनक मधुकर के सम्पादन में नवजीवन नामक साप्ताहिक हिन्दी पत्र प्रकाशित हुआ। ई.1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में नवज्योति, मीरा, रियासती एवं नवजीवन नामक समाचार पत्रों की महत्त्वपूर्ण भूमिका रही।

    सिन्धी समाज के समाचार पत्र

    भारत पाक विभाजन के बाद पाकिस्तान में चले गये सिन्ध क्षेत्र से, भारत में आये सिन्धी समाज ने बड़ी संख्या में अजमेर में निवास किया। इस कारण अजमेर से सर्वाधिक सिन्धी भाषा के समाचार पत्र निकले। इनमें दैनिक समाचार पत्र- हिन्दू (सं. किशन वरियाणी) तथा भारत भूमि (सं. टीकमदास खियलदास), साप्ताहिक समाचार पत्र- हिन्दवासी (सं. किशन मोटवाणी), हिन्दुभूमि (सं. नानकराम इसराणी), संत कंवरराम (सं. किशन वरियाणी), वीर विजय (सं. नथरमल नेशूमल), संत हाथीराम (सं. भैंरू पेंहलवाणी), पाक्षिक समाचार पत्र- सहयोग (सं. गुलाबराय रानी), मासिक समाचार पत्र- आर्यवीर (सं. दीपचंद्र तिलोकचंद्र), आत्म दर्शन (सं. दीपचंद्र तिलोकचंद्र), फुलवाड़ी (सं. दीपचंद्र तिलोकचंद्र), शेवा मार्ग (सं. दीपचंद्र तिलोकचंद्र), आदर्श (सं. एम आर बलेछा), आर्य प्रेमी (सं. मोहनलाल तेजवाणी) तथा मयार (सं. राधाकृष्ण विजलाणी) सम्मिलित हैं।

    हमारी नई वैबसाइट - भारत का इतिहास - www.bharatkaitihas.com


  • Share On Social Media:
Categories
SIGN IN
Or sign in with
×
Forgot Password
×
SIGN UP
Already a user ?
×