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  • अजमेर का इतिहास - 61

     03.06.2020
    अजमेर का इतिहास - 61

    चीफ कमिश्नर एवं एजीजी आर. जे. क्रॉस्थवेट एवं मार्टिण्डल


    कर्नल एच. बी. ऐबॉट

    हमारी नई वैबसाइट - भारत का इतिहास - www.bharatkaitihas.com

    कर्नल जी. एच. ट्रेवर के स्थानांतरण के बाद 20 मार्च 1895 से 28 अक्टूबर 1895 तक कर्नल एच. बी. ऐबॉट के पास चीफ कमिश्नर (अजमेर-मेरवाड़ा) एवं एजीजी का कार्यभार रहा।

    आर. जे. क्रॉस्थवेट (आई.सी.एस.)

    28 अक्टूबर 1895 से क्रॉस्थवेट अजमेर का चीफ कमिश्नर एवं एजीजी राजपूताना बना। वह रहमदिल अधिकारी था किंतु अक्सर बीमार रहता था। उसके कार्यकाल में ई.1896 में राजकीय महाविद्यालय अजमेर में डिग्री कॉलेज की स्थापना की गयी।

    ख्वाजा की दरगाह पर होलकर की दुर्गति

    ई.1897 में महाराजा तुकाराव होलकर अजमेर आया। वह ख्वाजा की दरगाह पर भी गया। वहाँ खादिमों ने इतना दंगा किया कि तुकाराव को अपने गले का कण्ठा और जान बचाना कठिन हो गया। उसे ख्वाजा की दरगाह के बाहर से ही लौटना पड़ा। अपने पड़ाव पर पहुँचने के बाद होलकर ने अजमेर के कमिश्नर से शिकायत की। खादिमों पर दंगा फैलाने का आरोप लगा। सात खादिमों को सजा हुई। कोई कैद हुआ और कोई जुर्माना भरकर छूटा।

    म्युन्सिपिल कमेटी की बदनामी

    ई.1897 में अजमेर म्युन्सिपल कमेटी ने अपने दोषी कर्मचारियों को सजा होने से बचाया जिससे कमेटी के सदस्यों की खूब बदनामी हुई।

    वायसराय लॉर्ड एल्गिन की अजमेर यात्रा

    ई.1897 में भारत का वायसराय लॉर्ड एल्गिन राजपूताना के दौरे पर आया। 10 नवम्बर को वह अजमेर पहुँचा। उसके अजमेर पहुँचने से पहले ही बूंदी का महाराव रघुवीरसिंह, किशनगढ़ का महाराजा शार्दूलसिंह, टोंक का नवाब मुहम्मद इब्राहीम अली खां तथा शाहपुरा का राजाधिराज नाहरसिंह उसके स्वागत के लिये अजमेर पहुँच गये। ये समस्त शासक, 10 नवम्बर 1897 को वायसराय की ट्रेन आने से पहले अजमेर रेलवे स्टेशन पहुँच गये।

    उन दिनों जैसलमेर के महारावल शालिवाहन तथा मणिपुर के राजा मीडिंगनू चंद्रचूड़सिंह मेयो कॉलेज में पढ़ते थे, इसलिये वे भी अजमेर स्टेशन पहुँच गये। जब प्रातः 9 बजे वायसरॉय की स्पेशल ट्रेन आई तो ये लोग प्लेटफार्म पर जाकर खड़े हो गये। ट्रेन रुकने के पांच मिनट बाद वॉयसराय ट्रेन से बाहर निकला। उसने प्लेटफॉर्म पर उपस्थित राजाओं से हाथ मिलाया तथा रेजीडेंसी कोठी चला गया। इसके बाद समस्त राजागण एक-एक करके वायसरॉय से मिलने रेजीडेंसी कोठी पर गये।

    उनके स्वागत में तोपें छोड़ी गईं। जिस समय शाहपुरा का राजाधिराज वायसरॉय से मिलने गया, उस समय तोपचियों ने समझा कि जैसलमेर का महाराव आया है, इसलिये तोपचियों ने तोपों की सलामी देनी आरंभ कर दी। तोपें चलती हुई देखकर शाहपुरा का राजाधिराज भी उलझन में पड़ गया और उसने घबराकर दो बार वायसरॉय को नजर की।

    बाद में इस भूल का पता चला और तोपों की सलामी को लिखित कार्यवाही से हटाया गया। राजाओं के जाने के बाद अजमेर जिले के इस्तिम्रारदार सरदारों को बुलाकर उनका दरबार आयोजित किया गया। इसके बाद वायसरॉय समस्त राजाओं के निवास पर गया तथा अंत में मेयो कॉलेज गया जहाँ उसने विद्यार्थियों को पुरस्कार बांटे। 11 नवम्बर को वह उदयपुर चला गया।

    क्रॉथवेस्ट के कार्यकाल में वृद्धि

    मार्च 1897 में सर रॉबर्ट क्रॉस्थवेट की आयु 55 साल हो गई। इस कारण उसे सेवानिवृत्ति दी जानी थी किंतु झालावाड़ के राज्य को तक्सीम करने के विशेष कारण से उसकी सेवानिवृत्ति एक वर्ष के लिये टाल दी गई। 8 मार्च 1898 को उसे सेवानिवृत्त किया गया। जब क्रॉस्थवेट सेवानिवृत्त होने लगा तो जयपुर, जोधपुर, उदयपुर, कोटा तथा झालावाड़ के राजा, क्रॉस्थवेट को विदाई देने के लिये आबू गये।

    मार्टिण्डल

    आर. जे. क्रॉस्थवेट के बाद 1 मार्च 1898 को ऑर्थर हेन्री टेम्पल मार्टिंडल चीफ कमिश्नर (अजमेर-मेरवाड़ा) एवं एजीजी नियुक्त हुआ। वह पहले भी 14 अप्रेल 1892 से 1 मार्च 1896 तक कमिश्नर (अजमेर-मेरवाड़ा) रह चुका था। मार्टिण्डल सरल स्वभाव का सिविल अधिकारी था। उसने अपने कार्यकाल में राजपूताना टूर्नामेंट आयोजित करवाया। हर साल दिसम्बर के अंत में अजमेर तथा विभिन्न रियासतों के छात्रों के बीच खेलकूद प्रतियोगिताएं आयोजित करवाईं।

    विक्टोरिया जनरल हॉस्पिटल

    ई.1898 में विक्टोरिया जनरल हॉस्पिटल बिल्डिंग का निर्माण पूरा हुआ। इसी वर्ष से अजमेर में टीकाकरण अनिवार्य किया गया।

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