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  • गुड़िया की यलो बस क्यों नहीं आती!/ कहानी/डॉ. मोहनलाल गुप्ता

     19.05.2020
    गुड़िया की यलो बस क्यों नहीं आती!/ कहानी/डॉ. मोहनलाल गुप्ता

    गुड़िया की यलो बस क्यों नहीं आती!/ कहानी/डॉ. मोहनलाल गुप्ता


    गुड़िया को यह तो समझ में आता है कि पापा पिछले दिनों जब यूस गए थे तो गुड़िया और उसकी मम्मी को नोडा में अकेले छोड़कर गए थे किंतु गुड़िया को यह समझ में नहीं आता कि पापा केवल ऑफिस के काम से गुड़िया और उसकी मम्मी को नोडा में छोड़कर दिल्ली क्यों चले गए हैं!

    चार साल की गुड़िया यूएस को यूस और नोएडा को नोडा कहती है। इन दिनों ऐसी बहुत सी बातें हो गई हैं जो गुड़िया के समझ में नहीं आतीं। पहले तो नब्बा अपने मम्मी-पापा के साथ रोज ही गुड़िया से मिलने आती थी किंतु अब नब्बा हमारे घर क्यों नहीं आती! गुड़िया अपने से एक साल छोटी फुफेरी बहिन नव्या को नब्बा ही कह पाती है।

    मम्मी ने घर के सारे खिड़की दरवाजे बंद कर रखे हैं और गुड़िया को घर से बाहर नहीं झांकने देती, कहती है, कुलिस आ जाएगी! गुड़िया के लिए खाकी कपड़े पहनने वाला प्रत्येक आदमी पुलिस है और गुड़िया पुलिस को कुलिस कहती है।

    उसने यह शब्द नब्बा से सीखा था। तीन साल की नब्बा जब भी किसी खाकी कपड़े वाले को देखती है तो जोर से सैल्यूट देते हुए चिल्लाती है-‘जयहिंद कुलिस!’

    नब्बा ने ऐसा करना टेलिविजन से सीखा था। संभवतः वह कोई दिल्ली पुलिस का एड था जिसे नब्बा बहुत ध्यान से देखती है और अपनी नन्हीं सी हथेली माथे पर रखकर जोर से पैर पटकती है, ठीक वैसे ही जैसे टीवी वाले कुलिस अंकल करते हैं।

    गुड़िया सारे दिन जिद करती है कि मम्मी उसे घुमाने के लिए पार्क में ले जाए किंतु मम्मी कहती है कि कोई भी बच्चा घर से बाहर नहीं निकल सकता, बाहर करोना फैला हुआ है! गुड़िया समझ नहीं पाती, करोना क्या होता है! पहले कभी उसने यह नाम नहीं सुना था। गुड़िया को लगता है कि करोना भी कुलिस जैसी कोई चीज होती होगी। जैसे कुलिस शैतानी करने वाले बच्चे को पकड़ कर ले जाती है, वैसे ही करोना भी पार्क में जाने वाले बच्चे को पकड़ कर ले जाती है।

    -‘अच्छा तो पेटीम से चॉकलेट दिलवा दो।’ गुड़िया जिद करती है। गुड़िया पेटीएम को पेटीम कहती है, उसे मालूम है कि मम्मी जब भी घर का सामान खरीदती है तो अपना फोन दुकान के एक कागज के सामने रखकर पेटीम से पैसे देती है।

    मम्मी गुड़िया की यह बात भी नहीं मानती, कहती है-‘पुलिस ने सारी दुकानें बंद करवा दी हैं, कोई चॉकलेट लेने नहीं जा सकता।’

    -‘अच्छा तो फोन करके पूछ तो लो कि आज यलो बस आएगी क्या!' गुड़िया फिर से अपनी मम्मी को मनाने का प्रयास करती है। गुड़िया अपनी स्कूल बस को यलो बस कहती है। गुड़िया को इस बात का बड़ा गर्व है कि वह यलो बस में बैठकर बड़े वाले स्कूल में जाती है। जबकि नब्बा तो अपनी मम्मी के साथ छोटे स्कूल में जाती है। बस का रंग और स्कूल का आकार दोनों ही गुड़िया के लिए बड़े गर्व के विषय हैं।

    -‘कोई बस-वस नहीं आएगी। तुम्हें समझ में नहीं आता क्या, पुलिस ने बस भी बंद कर रखी है।’ मम्मी खीझ कर कहती है।

    -‘कुलिस ने यलो बस भी बंद कर दी?’ गुड़िया फिर पूछती है।

    -‘हाँ!’ मम्मी छोटा सा जवाब देकर पल्ला झाड़ना चाहती हैं।

    -‘तो कुलिस ने हमारा स्कूल भी बंद कर दिया? गुड़िया फिर से हैरान होकर पूछती है।

    -‘हाँ, तुम्हारा स्कूल भी बंद है।’

    -‘और हमारी यलो बस भी!’

    -‘हाँ, अभी तो बताया था!’

    -‘और पार्क भी!’

    -‘हाँ, पार्क भी!

    -‘क्यों मम्मी?’

    -‘क्योंकि बाहर करोना फैला हुआ है!’

    -‘तो फिर पापा कैसे आएंगे?’

    -‘जब करोना खत्म हो जाएगा, तब पापा अपने आप आ जाएंगे।’

    -‘करोना खत्म कब होगा?’

    -‘जल्दी हो जाएगा।’

    -‘जल्दी कब, मुझे पापा की याद आ रही है।’ गुड़िया के सवालों का कोई अंत नहीं है किंतु मम्मी के पास सवालों के बहुत छोटे-छोटे जवाब हैं। डोरबैल बजती है तो गुड़िया दौड़कर दरवाजे के पास जाती है।

    -‘वहां मत जाओ, रुको तुम यहीं।’ मम्मी गुड़िया को रोकती हैं।

    -‘दरवाजे से कोराना भीतर आ जाएगा!’ गुड़िया पूछती है।

    -‘दूध वाले भइया हैं, तुम पीछे हटो।’

    गुड़िया दरवाजे से पीछे हटती है तो मम्मी दरवाजा खोलती है। दूध वाले भइया दूध की थैलियाँ दरवाजे के बाहर रखकर चले गए हैं। पहले गुड़िया ही दूध की थैलियां दरवाजे से उठाकर किचन में रखती थी किंतु अब मम्मी गुड़िया को दूध की थैलियों के हाथ नहीं लगाने देती। मम्मी अपने मुंह पर मास्क लगाकर थैलियों को उठाती हैं और उन्हें किचन में ले जाकर साबुन से धोती हैं। उसके बाद खुद भी साबुन से हाथ धोकर मास्क उतारती हैं।

    -‘तुम ये मास्क क्यों लगाती हो मम्मी!’

    -‘कल बताया तो था!’

    -‘मास्क नहीं लगाया तो करोना आ जाएगा!’ गुड़िया फिर पूछती है।

    -‘ओफ्फ ओह गुड़िया तुम कितने सवाल करती हो! चलो तुम्हारी ऑनलाइन क्लास का टाइम हो गया।’ मम्मी मोबाइल फोन ऑन कर देती है।

    आजकल मीनाक्षी मैम सैलफोन पर आकर पढ़ाती हैं। पहले मम्मी मीनाक्षी मैम से पढ़ती हैं और फिर मम्मी गुड़िया को पढ़ाती हैं। मीनाक्षी मैम फोन पर ही होमवर्क देती हैं और मम्मी गुड़िया से होमवर्क करवाकर फोन से फोटो खींचकर मीनाक्षी मैम को भेज देती हैं। जैसे मम्मी मास्क लगाकर दूध और सब्जी लेती है, वैसे मीनाक्षी मैम भी मास्क लगाकर फोन पर पढ़ाती हैं।

    गुड़िया को लगता है जैसे उसके आसपास की सारी दुनिया बदल गई है। उसे कुछ समझ में नहीं आता कि करोना कौन है, कहां से आ गया है, क्यों उसने गुड़िया का स्कूल, यलो बस, पार्क, चॉकलेट की शॉप, नब्बा का आना, पापा की कार सब बंद कर दिए हैं। वह एक बार करोना को देखना चाहती है किंतु मम्मी कहती है कि करोना को देखा नहीं जा सकता। एक दिन मम्मी ने टीवी पर करोना का फोटा दिखाया जो, दिखने में कुछ-कुछ गुड़िया की बॉल जैसा ही है किंतु यह इतनी करोना इतनी शैतानी क्यों करता है, किसी को सड़क पर क्यों नहीं निकलने देता, गुड़िया कुछ नहीं समझ पाती। (961 शब्द)

    -डॉ. मोहनलाल गुप्ता 63, सरदार क्लब योजना वायुसेना क्षेत्र, जोधपुर।

    सैलफोन-9414076061

    हमारी नई वैबसाइट - भारत का इतिहास - www.bharatkaitihas.com


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