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  • अंतिम उपदेश/ कहानी/डॉ. मोहनलाल गुप्ता

     05.02.2018
    अंतिम उपदेश/ कहानी/डॉ. मोहनलाल गुप्ता

    अंतिम उपदेश/ कहानी/डॉ. मोहनलाल गुप्ता

    महात्माजी बड़े प्रसन्न हैं। जंगल के जानवरों पर उनके प्रवचनों का अच्छा प्रभाव पड़ रहा है। जंगल का सम्पूर्ण वातारण ही जैसे बदल गया है। अब बहुत से भेड़िये नदी पर पानी पीने आते तो हरिणों तथा खरगोशों की ओर आ

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  • पक्की छत/ कहानी/डॉ. मोहनलाल गुप्ता

     15.04.2018
    पक्की छत/ कहानी/डॉ. मोहनलाल गुप्ता

    पक्की छत/ कहानी/डॉ. मोहनलाल गुप्ता

    शारदा बेचैन है। बार-बार करवटें बदल रही है। थोड़ी-थोड़ी देर में बाहर जाकर देख आती है, कितनी रात बाकी रही है। झौंपड़े में सन्नाटा है। पास 
    में ही उसका पति मदन बेसुध होकर सोया प

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  • अंधेरे में पलते उजाले (कहानी)

     10.05.2018
    अंधेरे में पलते उजाले (कहानी)

    बबीता स्वप्न बुनती है और स्वप्न के जंजाल में उनींदी सी रहकर स्वेटर बुनती है। स्वप्न और स्वेटर से इतर बबीता और भी बहुत कुछ बुनती है। बबीता जानती है कि जब तक उसमें बुनने की क्षमता है, तब तक ही वह बुन सकती है। बुनना उसके हाथ की बात नहीं है। उसे बुनने की भूमिका मिली है। उसे जीवन भर और सामर

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  • घर चलो माँ! (हिन्दी कहानी)

     20.05.2018
     घर चलो माँ! (हिन्दी कहानी)

     घर चलो माँ!

    बबलू बेचैन है। क्या कहे माँ से! कुछ बोलने की हिम्मत ही नहीं होती। वह कनखियों से माँ की ओर देखता है, माँ का चेहरा पूरी तहर निर्विकार है। बबलू को इस चेहरे को पढ़ने का अभ्यास तब से है जब वह बोल भी नहीं पाता था। तब वह केवल रो कर माँ को बता देता था कि वह क्या चाहता है! थोड़ा सा र

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  • सेमल का पेड़ (हिन्दी कहानी)

     20.05.2018
     सेमल का पेड़ (हिन्दी कहानी)

    सेमल का पेड़ (हिन्दी कहानी) 

    कमल बाबू ने लोहे का गेट खोलकर घर में प्रवेश करते हुए देखा, सेमल का पेड़ आज भी कौने में प्रहरी की तरह खड़ा हुआ है, ठीक उसी तरह जिस तरह आज से चौबीस साल पहले कमल बाबू ने आखिरी बार उसे यहाँ खड़े हुए देखा था। प्रहरी शब्द कमल बाबू को दुविधा में डा

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