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  • अंतिम उपदेश/ कहानी/डॉ. मोहनलाल गुप्ता

     28.09.2019
    अंतिम उपदेश/ कहानी/डॉ. मोहनलाल गुप्ता

    अंतिम उपदेश/ कहानी/डॉ. मोहनलाल गुप्ता

    महात्माजी बड़े प्रसन्न हैं। जंगल के जानवरों पर उनके प्रवचनों का अच्छा प्रभाव पड़ रहा है। जंगल का सम्पूर्ण वातारण ही जैसे बदल गया है। अब बहुत से भेड़िये नदी पर पानी पीने आते तो हरिणों तथा खरगोशों की ओर आ

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  • पक्की छत/ कहानी/डॉ. मोहनलाल गुप्ता

     28.09.2019
    पक्की छत/ कहानी/डॉ. मोहनलाल गुप्ता

    पक्की छत/ कहानी/डॉ. मोहनलाल गुप्ता

    शारदा बेचैन है। बार-बार करवटें बदल रही है। थोड़ी-थोड़ी देर में बाहर जाकर देख आती है, कितनी रात बाकी रही है। झौंपड़े में सन्नाटा है। पास 
    में ही उसका पति मदन बेसुध होकर सोया प

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  • अंधेरे में पलते उजाले (कहानी)

     10.05.2018
    अंधेरे में पलते उजाले (कहानी)

    बबीता स्वप्न बुनती है और स्वप्न के जंजाल में उनींदी सी रहकर स्वेटर बुनती है। स्वप्न और स्वेटर से इतर बबीता और भी बहुत कुछ बुनती है। बबीता जानती है कि जब तक उसमें बुनने की क्षमता है, तब तक ही वह बुन सकती है। बुनना उसके हाथ की बात नहीं है। उसे बुनने की भूमिका मिली है। उसे जीवन भर और सामर

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  • घर चलो माँ! (हिन्दी कहानी)

     20.05.2018
     घर चलो माँ! (हिन्दी कहानी)

     घर चलो माँ!

    बबलू बेचैन है। क्या कहे माँ से! कुछ बोलने की हिम्मत ही नहीं होती। वह कनखियों से माँ की ओर देखता है, माँ का चेहरा पूरी तहर निर्विकार है। बबलू को इस चेहरे को पढ़ने का अभ्यास तब से है जब वह बोल भी नहीं पाता था। तब वह केवल रो कर माँ को बता देता था कि वह क्या चाहता है! थोड़ा सा र

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  • सेमल का पेड़ (हिन्दी कहानी)

     20.05.2018
     सेमल का पेड़ (हिन्दी कहानी)

    सेमल का पेड़ (हिन्दी कहानी) 

    कमल बाबू ने लोहे का गेट खोलकर घर में प्रवेश करते हुए देखा, सेमल का पेड़ आज भी कौने में प्रहरी की तरह खड़ा हुआ है, ठीक उसी तरह जिस तरह आज से चौबीस साल पहले कमल बाबू ने आखिरी बार उसे यहाँ खड़े हुए देखा था। प्रहरी शब्द कमल बाबू को दुविधा में डा

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  • चिट्ठी/हिन्दी कहानी/ डॉ. मोहनलाल गुप्ता

     23.02.2020
    चिट्ठी/हिन्दी कहानी/ डॉ. मोहनलाल गुप्ता

    चिट्ठी


    आप यह समझने की भूल कदापि न करें कि आप कोई कहानी पढ़ रहे हैं। यह एक चिट्ठी है जो मैंने आपके नाम लिखी है। लोगों को दूसरों के घरों में झाँकने की आदत होती है, दूसरों के नाम आई चिट्ठी पढ़ने की आदत होती है। यह

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  • दावत/ कहानी/ डॉ. मोहनलाल गुप्ता

     23.02.2020
    दावत/ कहानी/ डॉ. मोहनलाल गुप्ता

    दावत/ कहानी/ डॉ. मोहनलाल गुप्ता


    जग्गा सड़क के किनारे उदास आंखों से, बिजली के तारों पर भूखे बैठे कबूतरों की ओर देख रहा था और कबूतर बिजली के तारों पर कतार में बैठे हुए, जग्गा की ओर सूनी निगाहों से ताक रहे थे। न

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  • गर्म हवा/कहानी/डॉ. मोहनलाल गुप्ता

     27.02.2020
    गर्म हवा/कहानी/डॉ. मोहनलाल गुप्ता

    गर्म हवा/कहानी/डॉ. मोहनलाल गुप्ता


    कच्ची साल के आंगन में लिपा गोबर और घर की छान में लगी खींप, तेज गर्मी पाकर झुलसाये से हो चले हैं। बाहर चल रही लू के गर्म थपेड़े जब साल में घुसते हैं तो लगता है जैसे कच्ची दीवा

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  • गाली/कहानी/डॉ. मोहनलाल गुप्ता

     27.02.2020
    गाली/कहानी/डॉ. मोहनलाल गुप्ता

    गाली/कहानी/डॉ. मोहनलाल गुप्ता


    शांति को गुस्सा आ गया। बहुत ज्यादा वाला गुस्सा। इससे पहले उसे इतना गुस्सा कभी नहीं आया था। सच पूछो तो उसे इससे पहले गुस्सा ही नहीं आया था। गुस्सा करने वाली औरत नहीं वह। वह तो अपने ना

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  • निर्णय/कहानी/डॉ. मोहनलाल गुप्ता

     27.02.2020
    निर्णय/कहानी/डॉ. मोहनलाल गुप्ता

    निर्णय/कहानी/ मोहनलाल गुप्ता

    गाँव के लोग मास्टर लीलाधर को बेकार आदमी समझते थे। मास्टर लीलाधर इसी गाँव में जन्मे थे, इसी में उनका बचपन, कैशोर्य, यौवन और प्रौढ़त्व व्यतीत हुए थे और अब इसी गाँव में उनका बुढ़ापा भी व्यतीत हो रहा था। मास्टर लीलाधर के कारण इस गाँव को कई बार राष्ट्रीय स

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