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  • अब पाकिस्तान में प्रधानमंत्री जल्दी-जल्दी बदले जाते रहेंगे!

     06.10.2019
    अब पाकिस्तान में प्रधानमंत्री जल्दी-जल्दी बदले जाते रहेंगे!

    क्यों हो रही है, इमरान की इतनी जल्दी विदाई!

    इमरान खान 18 अगस्त 2018 को अर्थात् आज से लगभग केवल 13 महीने पहले ही पाकिस्तान के प्रधानमंत्री बने थे। उनका प्रधानमंत्री बनना उतना आश्चर्यजनक नहीं था, जितना कि केवल 13 महीने में उनकी विदाई की आहट सुनाई देना!

    इमरान खान पाकिस्तान की सेना की पसंद से इस पद तक पहुंचे थे। उन्होंने आज तक पाकिस्तानी सेना के विरुद्ध एक भी काम नहीं किया किंतु फिर भी पाकिस्तानी सेना उन्हें प्रधानमंत्री के रूप में पसंद नहीं कर रही तो इसके पीछे इमरान खान की अपनी नाकामियां हैं, इसके लिए पाकिस्तानी सेना को दोष नहीं दिया जा सकता।

    इमरान खान के सलाहकारों ने उन्हें शायद यह मंत्र पढ़ाया था कि जब तक भारत के खिलाफ जहर उगलते रहोगे, तब तक पाकिस्तान की जनता और सेना दोनों के चहेते बने रहोगे किंतु मंत्र देने वालों ने यह नहीं बताया कि इमरान को भारत के खिलाफ कितना जहर उगलना है।

    इमरान खान को जब भी मौका मिलता या नहीं भी मिलता, वे भारत को गालियां देने के लिए खड़े हो जाते। उन्होंने एक तरफ तो आतंकवादियों के हाथों की कठपुतली बनकर अमरीका का विश्वास खो दिया तथा दूसरी तरफ भारत को इस बात का पूरा मौका दे दिया कि भारत डिप्लोमेटिक स्तर पर पाकिस्तान को पूरी दुनिया के सामने एक्सपोज कर सके।

    इमरान खान ने कुलभूषण जाधव के मामले में अंतर्राष्ट्रीय प्रोटोकॉल की अवहेलना करके भी पूरी दुनिया में अपनी इज्जत खराब करवा ली।

    इमरान खान एक ओर तो भारत से वार्ता करने की जिद्द करते रहे और दूसरी ओर भारत में उरी तथा पुलमावा जैसी घटनाओं को अंजाम देते रहे। इस चक्कर में पाकिस्तान, भारत से वार्ता तो शुरु नहीं करवाया पाया किंतु सर्जिकल स्ट्राइक और बालाकोट एयर स्ट्राइक के माध्यम से मार खा बैठा।

    इतना ही नहीं, पाकिस्तान अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर ऐसे झूठ बोलता रहा जिनके कारण दुनिया के सामने उसकी विश्वसनीयता दो कौड़ी की भी नहीं रही।

    आज की तारीख में दुनिया भर के सैटेलाइट आकाश में चौबीसों घण्टे घूमते हैं, उन्हें सब दिखता है कि किस देश के आतंकवादी किस दिशा में जा रहे हैं और कौनसा देश किस देश पर सर्जिकल स्ट्राइक कर रहा है!

    आज की दुनिया में विकासशील देशों को अमरीका, रूस और चीन के साथ बहुत सावधानी से व्यवहार करने की आवश्यकता है, जरा भी संतुलन बिगड़ा नहीं कि आपको मित्र तो शायद ही मिले किंतु आप कम से कम दो बड़े दुश्मन एक साथ खड़े कर लेंगे।

    इमरान खान एक तरफ तो अमरीका के सामने आज्ञाकारी बच्चा बने रहने की एक्टिंग करते रहे और दूसरी तरफ चीन के सामने गुलामों की तरह पेश आते रहे।

    यही कारण था कि अमरीकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने न्यूयार्क में इमरान खान की उतनी बेइज्जती की जितनी कि किसी देश का प्रधान, किसी दूसरे देश के प्रधान की उसके मुंह पर कर सकता है।

    पाकिस्तानी प्रधानमंत्री द्वारा यूएनओ के मंच से जेहाद और एटमबम की धमकियां देना तथा भारत से युद्ध के अतिरिक्त और कोई विकल्प नहीं होने की बात करना जैसी बचकानी बातों ने पाकिस्तान को पूरी दुनिया के सामने हास्यास्पद बना दिया।

    एक वास्तविकता यह भी है कि भारत की डिप्लोमैटिक कार्यवाहियों ने अमरीका को इस मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया है कि वह पाकिस्तान को पैसा नहीं दे सके।

    ऐसी स्थिति में पाकिस्तानी सेना का खर्चा चलना मुश्किल हो गया है। अब पाकिस्तानी सेना को ऐसा नया प्रधानमंत्री चाहिए जो अमरीका से पैसा ला सके।

    भारत ने अपनी ओर से पाकिस्तान के साथ वार्ताओं का दौर बंद करके पाकिस्तान को अब उस युग में लाकर पटक दिया है जहाँ पाकिस्तानी लीडर्स भारत के साथ वार्ताओं का दौर जारी रखकर तथा उसे बीच-बीच में पटरी से उतारकर पाकिस्तानी जनता को यह अहसास नहीं दिला सकते कि पाकिस्तान, भारत के साथ जैसा चाहे व्यवहार कर सकता है और भारत को बार-बार नीचा दिखा सकता है।

    इस प्रकार इमरान खान के लिए प्रधानमंत्री की कुर्सी पर अधिक समय तक बने रहना संभव नहीं रह गया है। हालांकि इमरान के जाने से भारत को न तो नुक्सान होगा, न लाभ क्योंकि जो भी अगला प्रधानमंत्री होगा, वह भी वैसा ही व्यवहार करेगा जैसा कि आजतक पाकिस्तान के लीडर्स करते आए हैं किंतु एक बात अवश्य होगी कि अब पाकिस्तान में प्रधानमंत्री जल्दी-जल्दी बदले जाते रहेंगे।

    - डॉ. मोहनलाल गुप्ता

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