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  • जो बोया था, वही काट रहे हैं मुलायमसिंह

     03.06.2020
    जो बोया था, वही काट रहे हैं मुलायमसिंह

    हमारी नई वैबसाइट - भारत का इतिहास - www.bharatkaitihas.com

    भारतीय राजनीति में प्रतिदिन ऐसा कुछ विक्षुब्धकारी घटित होता है कि कोई भी लेखक कम्प्यूटर का की-बोर्ड और माउस उठाने के लिये विवश हो जाये। (पहले के लेखक कलम उठाते थे) मैं सामान्यतः राजीनीतिक लेखन नहीं करता हूँ किंतु यदि कोई घटना इतिहास की झलक दिखाती है तो राजनीति पर लिखने से परहेज भी नहीं करता। भारतीय राजनीति में नेताजी के नाम से विख्यात किये गये मुलायमसिंह यादव (वस्तुतः यह टाइटल सुभाषचंद्र बोस का है) के साथ इन दिनों जो कुछ हो रहा है, उसके लिये कोई और नहीं वे स्वयं ही जिम्मेदार हैं, कम से कम मैं तो ऐसा ही मानता हूँ। मुलायमसिंह का राजनीतिक जीवन खुली किताब की तरह हमारे सामने है। वे 1989 से 1991, 1993 से 1995 तथा 2003 से 2007 तक उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे। वे देवगौड़ा मंत्रिमण्डल में रक्षामंत्री रहे और आज भी लोकसभा सदस्य हैं। ये वहीं मुलायमसिंह हैं जिन्होंने वर्ष 2004 में सोनिया गांधी की ताजपोशी रोकी। ये वही मुलायमसिंह हैं जिन्होंने लालू यादव, ममता बनर्जी तथा अन्य राजनेताओं के साथ अलग-अलग समय पर राजनीतिक समझौते किये और उन हर्फों की स्याही सूखने से पहले ही तोड़ दिये। ये वही मुलायमसिंह हैं जिन्होंने अयोध्या के कार सेवकों पर गोलियां चलवाने से कभी परहेज नहीं किया। उनकी सरकार के समय कारसेवकों के शव बोरियों में भरकर सरयू नदी में बहाये गये। कारसेवकों को कुचलने की अपनी जिद पर वे इस बुरी तरह कायम रहे कि उन्होंने यह कहने में भी परहेज नहीं किया कि औरंगजेब मेरा आदर्श है। अब जिस आदमी का आदर्श औरंगजेब होगा, उसे परिवार का प्रेम कैसे मिलेगा! औरंगजेब को भी नहीं मिला था। औरंगजेब ने भी किसी को प्रेम नहीं किया था। उसने अपने 65 वर्षीय बूढ़े पिता शाहजहां को कैद में डालकर बड़े भाई दारा शिकोह को दर्दनाक मौत दी। दूसरे नम्बर के बड़े भाई शाहशुजा और चौथे नम्बर के छोटे भाई मुराद को धोखे से मारा। हालांकि जब जब औरंगजेब 89 वर्ष का बूढ़ा हो गया और उसकी कमर 90 डिग्री के कोण पर झुक गई तथा गर्दन स्प्रिंग पर रखी हुई गेंद की तरह कांपने लगी, तब उसने आशा की कि उसका परिवार उसे प्रेम करेगा किंतु परिवार उसे सहन भले ही करता रहा किंतु प्रेम नहीं कर सका। औरंगजेब को आदर्श बताने वाले मुलायमसिंह यादव भी अखिलेश यादव और रामगोपाल यादव से प्रेम पाने की आशा लगाये हुए हैं किंतु अखिलेश और रामगोपाल सहित, मुलायम से जुड़े तमाम लोग मुलायमसिंह को आदर और इज्जत तो दे सकते हैं किंतु प्रेम नहीं। औरंगजेबों की यही नियति हुआ करती है।

    - डॉ. मोहनलाल गुप्ता

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