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  • किसकी अंतर-आत्मा को पुकार रही हैं मीरा कुमार!

     03.06.2020
    किसकी अंतर-आत्मा को पुकार रही हैं मीरा कुमार!

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    विपक्ष द्वारा 2017 के राष्ट्रपति चुनावों में प्रत्याशी बनाए जाने के बाद मीरा कुमार ने अंतर-आत्मा की पुकार पर मतदान करने की अपील की है। यह अपील 1969 में हुए राष्ट्रपति चुनावों की याद दिलाती है जब ऑल इण्डिया कांग्रेस कमेटी ने नीलम संजीव रेड्डी को राष्ट्रपति पद का प्रत्याशी घोषित किया तथा विपक्ष ने सर चिंतामन द्वारकानाथ देशमुख को अपना प्रत्याशी बनाया। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को ये दोनों ही प्रत्याशी पसंद नहीं आए। उस समय वी. वी. गिरि उपराष्ट्रपति थे, उन्होंने अपने पद से त्यागपत्र देकर निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में राष्ट्रपति पद का चुनाव लड़ा। इंदिरा गांधी ने वी. वी. गिरी को समर्थन दे दिया और कांग्रेसियों से अपनी अंतर-आत्मा की आवाज पर मतदान करने की अपील की। कांग्रेसियों की अंतर-आत्मा जाग उठी और उन्होंने कांग्रेस के अधिकृत प्रत्याशी को हराकर निर्दलीय प्रत्याशी को राष्ट्रपति बना दिया। वी. वी. गिरि पर अनैतिक साधनों से चुनाव जीतने की रिट दायर हुई। वी. वी. गिरि भारत के राष्ट्रपति रहते हुए भी न्यायालय का सम्मान करते हुए व्यक्तिगतशः न्यायालय में उपस्थित हुए तथा न्यायालय में रिट खारिज हुई।

    1969 के बाद 2017 में एक बार फिर से नेताओं की अंतर-आत्मा को जगाने के लिए पुकार लगाई गई है। समझ में नहीं आया कि मीरा कुमार किस की अंतर-आत्मा को जगा रही हैं। कहीं ऐसा न हो कि 1969 की तरह कांग्रेसियों की अंतर-आत्मा जाग पड़े और चौबेजी, छब्बेजी बनने की बजाय दुब्बेजी ही रह जाएं। कांग्रेस तो वैसे ही आपताकाल के दौरान 1976 में 42वें संविधान संशोधन के बाद भारत को धर्म-निरपेक्ष देश घोषित कर चुकी है। धर्म-निरपेक्ष लोग आत्मा-परमात्मा जैसी चीजों से काफी ऊपर उठे हुए होते हैं इसलिए वे किसी की अंतर-आत्मा को कैसे पुकार सकते हैं! यह अंतर-आत्मा क्या होती है, और कहाँ रहती है। धर्म से पूरी तरह निरपेक्ष मीरा कुमार को अंतर-आत्मा का एड्रेस किसने दिया !

    यदि मीरा कुमार भारतीय जनता पार्टी के सांसदों एवं विधायकों की अंतर-आत्मा को पुकार रही हैं तो भी यह बात समझ में नहीं आती है। कांग्रेस जिन भाजपाइयों के नेता नरेन्द्र मोदी पर मौत का सौदागर होने का आरोप लगाती रही है (सोनिया गांधी का 2007 के चुनावों में वक्तव्य), जिन भाजपाइयों और संघियों पर कांग्रेस, गांधी की हत्या का आरोप लगाती रही है (राहुल गांधी का 2014 के चुनावों में आरएसएस पर वक्तव्य), जिन भाजपाइयों पर कांग्रेस असहिष्णुता का आरोप लगाती रही है (2015 में कांग्रेस समर्थित साहित्यकारों एवं बुद्धिजीवियों द्वारा पुरस्कार लौटाने का अभियान) जिन भाजपाइयों पर कांग्रेस, साम्प्रदायिक होने का आरोप लगाती रही है (दिग्विजय सिंह, राजीव शुक्ला सहित तमाम नेताओं के वक्तव्य), ऐसे भाजपाइयों से मीरा कुमार कैसे अंतर-आत्मा पर मतदान करने की अपील कर सकती हैं!

    जिन भाजपाइयों को मीरा कुमार ने लोकसभा में बोलने तक का मौका देने में कंजूसी की (सुषमा स्वराज का नवीनतम वक्तव्य) उन्हीं भाजपाइयों को अपनी चुनावी नौका के तारणहार के रूप में मीराकुमार कैसे देख सकती हैं! जो कांग्रेस, भाजपाइयों के नेता नरेन्द्र मोदी पर सहारा गु्रप से 9 बार धन लेने का आरोप लगाकर कोर्ट में मुंह की खा चुकी है। (राहुल गांधी का दिसम्बर 2016 का वक्तव्य), अब उसी कांग्रेस की जीवन भर सदस्य रही कांग्रेसी प्रत्याशी मीरा कुमार किस अंतर-आत्मा के जागने की आशा कर रही हैं! क्या वे कांग्रेस द्वारा घोषित साम्प्रदायिक शक्तियों (भाजपाइयों एवं संघियों) के बल पर राष्ट्रपति बनने का सपना संजोए बैठी हैं।

    -डॉ. मोहनलाल गुप्ता

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