Blogs Home / Blogs / सम-सामयिक / क्या इमरान खान की विदाई का वक्त आ गया है!
  • क्या इमरान खान की विदाई का वक्त आ गया है!

     06.10.2019
    क्या इमरान खान की विदाई का वक्त आ गया है!

    इस बात को अभी अधिक दिन नहीं बीते हैं जब इमरान खान अपनी तीसरी दुल्हन को विदा करवाकर लाए थे। इमरान की तीनों दुल्हनें एक से बढ़कर एक खूबसूरत हैं किंतु स्वयं इमरान खान पाकिस्तान की राजनीति में एक कुरूप दुल्हन के रूप में याद किए जाएंगे। इमरान खान की विदाई का समय आ गया है।

    इमरान की विदाई की तारीख तो तभी तय हो गई थी जब इमरान खान यूनाइटेड नेशन्स के मंच से जेहाद-जेहाद चिल्ला रहे थे और मुस्लिम बिरादरी से अपनी मुंह दिखाई की रस्म के बदले भारत पर परमाणु बम गिराने की जिद्द कर रहे थे।

    इमरान खान नवाज शरीफ और आसिफ अली जरदारी को गालियां दे-देकर पाकिस्तान की सत्ता के मण्डप तक पहुंचे थे जहाँ पाकिस्तान की सेना ने काजी की तरह उनका प्रधानमंत्री की कुर्सी से निकाह करवाया लेकिन इमरान खान ये भूल गए थे कि पाकिस्तान में सत्ता के मण्डप तक पहुंचने वाली प्रत्येक दुल्हन के निकाह और तलाक की तारीखें पास्तिानी सेना तय करती है।

    ई.1951 में पाकिस्तान के पहले प्रधानमंत्री लियाकत अली खान की गोली मारकर हत्या की गई थी। ई.1958 में पाकिस्तान के राष्ट्रपति मेजर जनरल इस्कंदर मिर्जा ने तत्कालीन प्रधानमंत्री फिरोज खान नून को गद्दी से उतार कर पाकिस्तान में पहली बार मार्शल लॉ की घोषणा की थी। इस्कंदर मिर्जा ने अय्यूब खान को मार्शल लॉ एडमिनिस्ट्रेटर नियुक्त किया किंतु अयूब खां ने केवल 13 दिन बाद ही राष्ट्रपति इस्कंदर मिर्जा का तख्ता पलट दिया और स्वयं को राष्ट्रपति घोषित कर दिया।

    जनरल अयूब खान ने पूरे 7 साल तक पाकिस्तान को मिलिट्री शासन के अधीन रखा तथा 1965 में फर्जी चुनाव करवाकर पाकिस्तान का निर्वाचित राष्ट्रपति बन गया। इस प्रकार पूरे 11 साल तक जनरल अयूब पाकिस्तान की जनता पर मिलिट्री शासन पेलता रहा।

    ई.1969 में जनरल याह्या खाँ ने अयूब खाँ का तख्ता पलट दिया तथा स्वयं राष्ट्रपति बन गया। उसने ई.1970 में देश में पहले आम चुनाव करवाए किंतु चुनाव परिणाम आने के बाद सरकार बनवाने में आनाकानी करता रहा। अंत में 7 दिसम्बर 1971 को नूरूल अमीन की सरकार बनी किंतु केवल 13 दिन ही शासन कर सकी तथा देश पर याह्या खाँ के नेतृत्व पाकिस्तानी सेना शासन करती रही।

    ई.1973 में जुल्फिकार अली भुट्टो को पाकिस्तान का प्रधानमंत्री बनाया गया। उसने पाकिस्तान की जनता को बेवकूफ बनाने के लिए यूएनओ में वक्तव्य दिया कि हम एक हजार साल तक घास की रोटी खाकर भारत से लड़ते रहेंगे। जुल्फिकार अली भुट्टो ने जनरल जियाउल हक को पाकिस्तानी सेना का प्रमुख बनाया किंतु उसने 4 जुलाई 1977 को भुट्टो तथा उसकी पार्टी के सदस्यों को गिरफ्तार करके स्वयं राष्ट्रपति बन गया। कुछ समय बाद जियाउल हक ने अपने पुराने मालिक जुल्फिकार अली भुट्टो को फांसी पर लटका दिया।

    अंत में ई.1988 में एक विमान हादसे में जियाउल हक की मौत हुई और पाकिस्तान को मार्शल लॉ से छुटकारा मिला।

    इसके बाद बेनजीर भुट्टो तथा नवाज शरीफ बारी-बारी से कुछ दिनों के लिए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री बनते रहे। नवाज शरीफ ने जनरल परवेज मुशर्रफ को चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ बनाया। अक्टूबर 1999 में जब परवेज मुशर्रफ श्रीलंका यात्रा पर गया तब नवाज शरीफ ने उसे अपदस्थ करके जनरल अजीज को चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ नियुक्त किया।

    नवाज शरीफ यह नहीं जानता था कि जनरल अजीज, परवेज मुशर्रफ का विश्वस्त बुलडॉग है। परवेज मुशर्रफ तुरन्त श्रीलंका से लौटा। उसने नवाज शरीफ तथा उसके मंत्रियों को गिरफ्तार करके जेल में ठूंस दिया और स्वयं राष्ट्रपति बन गया।

    पाकिस्तान के शासकों में से याह्या खाँ, जुल्फिकार अली भुट्टो, जनरल मुहम्मद जियाउल हक तथा बेनजीर भुट्टो आतंकवादी गतिविधियों, राजनीतिक हत्याओं एवं सेना द्वारा दी गई फांसियों आदि के माध्यम से मारे गए जबकि नवाज शरीफ, आसिफ अली जरदारी और परवेज मुशर्रफ जेल में बंद हैं।

    अब इमरान खान भी वहीं पहुंच सकते हैं। वे बेचारे तो केवल एक साल पहले अर्थात् 18 अगस्त 2018 को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री बने थे। कहने का मतलब ये कि अभी तो उनके हाथों की मेहंदी भी नहीं सूखी थी कि पाकिस्तानी सेना उसकी विदाई कराने आ रही है।

  • इस बात को अभी"/> इस बात को अभी"> इस बात को अभी">
    Share On Social Media:
Categories
SIGN IN
Or sign in with
 
×
Forgot Password
×
SIGN UP
Already a user ?
×