Blogs Home / Blogs / आलेख- सम-सामयिक / जिंदा है जो इज्जत से वो इज्जत से मेरगा!
  • जिंदा है जो इज्जत से वो इज्जत से मेरगा!

     03.06.2020
    जिंदा है जो इज्जत से वो इज्जत से मेरगा!

    हमारी नई वैबसाइट - भारत का इतिहास - www.bharatkaitihas.com


      साठ के दशक में आई मदर इण्डिया फिल्म के गीत जन-जन की जिह्वा पर थे जिसके एक गीत की एक पंक्ति यह भी थी कि जिंदा है जो इज्जत से वो इज्जत से मरेगा............ किंतु देश में जैसा वातावरण बनाया जा चुका है, उसमें ऐसा लगता है कि जिंदा है जो विवादों में वो रातों रात मीडिया में छा जायेगा..... इज्जत से जियेगा.. बुद्धिजीवी कहलायेगा.... पैसे कमायेगा.........एमएलए बनेगा। इसी को कहते हैं मुंह में रजनीगंधा और कर लो दुनिया मुट्ठी में।

    एक बहुत ही होशियार हो गई डीयू की छात्रा ने कितनी बेशर्मी से लिखा कि उसके फौजी बाप को दुश्मन ने नहीं युद्ध ने मारा। मैं कहता हूं कि उसके फौजी बाप को उस वैज्ञानिक ने मारा जिसने बंदूक बनाई, जिसने गोली बनाई। उस मास्टर ने मारा जिसने वैज्ञानिक को बंदूक और गोली बनाने की शिक्षा दी। उस चाणक्य ने मारा जिसने भारत देश बनाया। उस विवेकानंद ने मारा जिसने देश को स्वाभिमान से उठ खड़ा होने की प्रेरणा दी। उस गांधी और नेहरू ने मारा जो देश की आजादी के आंदोलन में शामिल हुए।उस भगतसिंह ने मारा जिसने देश से गोरों को भगाने के लिये अपने प्राण न्यौछावर कर दिये।

    उस वीर सावरकर ने मारा जिसने अंग्रेजों को उनकी औकात बताकर दो काले पानी की सजा भुगती। उस इंदिरागांधी ने मारा जिसने परमाणु बम का विस्फोट करके देश को शक्तिशाली बनाया।

    यह तो अच्छा हुआ कि जिस समय इसका फौजी पिता देश के लिये शहीद हुआ, उस समय डीयू की यह छात्रा इतनी समझदार नहीं हुई थी अन्यथा यह उसे लड़ने से यह कहकर रोक देती कि वार मत करो। वार मार देता है। तुम अपनी गोली भारत के उन नेताओं पर चलाओ जो पाकिस्तान के वार का जवाब वार से देते हैं.......... वगैरा-वगैरा।

    अराजकतावादी राजनीति के जन्मदाता अरविंद केजरीवाल की आप पार्टी के राम सुब्रम्ण्यम की एजेंट इस छात्रा को यह नहीं बताया गया कि 1965 की लड़ाई में जब पाकिस्तान देश के कुछ हिस्सों में घुस आया था तो उसके सैनिकों ने हमारे देश की महिलाओं के स्तन काट दिये थे। बहुत सी औरतों का सतीत्व भंग हुआ था।

    जिस वार ने इस छात्रा के फौजी बाप को मारा, वह युद्ध क्या अटलबिहारी वाजपेयी ने शुरु किया था! क्या दुश्मन की गोली का जवाब गोली से देना बुरी बात है! क्या देश की सेनाएं अहिंसा का उपदेश देने और शत्रु का स्वागत करने के लिये सीमाओं पर खड़ी की गई हैं।

    शर्म करो!!! जैसे दुश्मन की गोली यह नहीं देखती कि सामने खड़ा दुश्मन कौन है वैसे ही उनके सैनिक यह नहीं देखेंगे कि जिस स्त्री के स्तन काट रहा है, उसके घर वाले फेसबुक पर पाकिस्तान का समर्थन कर रहे थे या विरोध। गौतम और गांधी का देश बताने वालों को यह बताना जरूरी है कि गौतम और गांधी की आड़ लेकर बुरी बातें मत करो, इसमें तुम्हारा भी बराबर का नुक्सान है।

    हमारी नई वैबसाइट - भारत का इतिहास - www.bharatkaitihas.com


     


  • Share On Social Media:
Categories
SIGN IN
Or sign in with
×
Forgot Password
×
SIGN UP
Already a user ?
×