Blogs Home / Blogs / चित्रकूट का चातक ( अब्दुर्रहीम खानखाना की जीवनी पर ऐतिहासिक उपन्यास)
  • चित्रकूट का चातक - 1

     07.06.2017
    चित्रकूट का चातक - 1

    प्रस्तावना

    अब्दुर्रहीम खानखाना की पहचान आज के भारत में एक 'संत-कवि' की है। इसीलिये हिन्दू उन्हें रहीमदासजी कहते हैं। विगत चार सौ वर्षों से वे करोड़ों हिन्दी भाषी भारतीयों के लिये श्रद्धा के पात्र हैं। वे दर्शन और नीति के प्रकाण्ड पण्डित

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  • चित्रकूट का चातक - 2

     07.06.2017
    चित्रकूट का चातक - 2

    खूनी ताकत

    इंसानी खून


    संसार में इंसानी खून का रंग हर जगह लाल है किंतु उसकी ताकत हर जगह अलग है। जब इंसानी खून की ताकत जोर मारती है तो इंसान, इंसान नहीं रहता, हैवान बन जाता है। वह दूसरों का सर्वस्व छ

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  • चित्रकूट का चातक - 3

     07.06.2017
    चित्रकूट का चातक - 3

    भारत भारत की स्वतंत्रता का हरण

    ई. 712 में मुहम्मद बिन कासिम ने सिंध पर आक्रमण किया। वह पहला मुस्लिम आक्रांता था जिसने भारत की भूमि पर पैर रखा था। उसने सिंध के राजा दाहिर सेन को मार डाला तथा राज परिवार के सदस्यों की नृशंस हत्याएं कीं। हिन्दू

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  • चित्रकूट का चातक - 4

     07.06.2017
    चित्रकूट का चातक - 4

    रक्त और मांस का पिण्ड

    1155 ईस्वी की एक सुबह। ओमन नदी का शांत जल प्रतिदिन की भांति अपनी मंथर गति से प्रवाहित हो रहा था। उसके निर्मल जल में सहस्रों रूपहली मछलियाँ और जलमुर्गियाँ अठखेलियां कर रही थीं। कोटि-कोटि सूर्य-रश्मियां जब ओमन नदी के जल

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  • चित्रकूट का चातक - 5

     07.06.2017
    चित्रकूट का चातक - 5

    स्तब्ध परमात्मा!

    चंगेजखाँ पहला मंगोल था जिसने भारत पर आक्रमण किया। उन दिनों दिल्ली पर मुहम्मद गौरी के गुलाम के गुलाम, अर्थात् कुतुबुद्दीन के गुलाम इल्तुतमिश का शासन था। जब 1221 ईस्वी में चंगेजखाँ पंजाब तक चढ़ आया तो इल्तुतमिश ने चंगेजखाँ स

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  • चित्रकूट का चातक - 6

     07.06.2017
    चित्रकूट का चातक - 6

    - 'और चौधरी तुम! तुम क्या करोगे?' लाला कनछेदीलाल ने पूछा। वह चौधरी संतराम का बालसखा था।

    -'हाँ-हाँ चौधरी, तुम क्या करोगे?' बहुत से लोग एक साथ बोल पड़े। वे जानना चाहते थे कि आखिर चौधरी अपने लिये क्या निर्णय लेता है।

    - 'मैं......मैं क्या करूंगा! मुझे नहीं पता कि मैं क्या करूंगा! जैसे दीना

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  • चित्रकूट का चातक - 7

     07.06.2017
    चित्रकूट का चातक - 7

    मृतकों के नगर

    यह तो नहीं कहा जा सकता कि इतिहास की वह कौनसी तिथि थी जब मंगोलों ने इस्लाम स्वीकार किया किंतु इस शाखा में उत्पन्न हुआ तैमूर लंगड़ा इस्लाम का अनुयायी था। उसके बाप-दादे मध्य एशिया में छोटे-मोटे जागीरदार हुआ करते थे जो अमीर कहलात

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  • चित्रकूट का चातक - 8

     07.06.2017
    चित्रकूट का चातक - 8

    फिर से बादशाही

    भाग्य ने बाबर की शीघ्र ही फिर से सुधि ली। जब बाबर के शत्रु शैबानीखाँ ने कुन्दुज के शासक खुसरो शाह को हरा कर उसकी सेना भंग कर दी तो खुसरो शाह के चार हजार सैनिक पहाड़ों में छिपे हुए बाबर से आ मिले। यहीं से बाबर की खूनी ताकत ने फिर

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  • चित्रकूट का चातक - 9

     07.06.2017
    चित्रकूट का चातक - 9

    काले पन्ने

    बाबर के सेनापति मीरबाकी के मन में हसरत थी कि वह हिन्दुस्तान में ऐसा कुछ करे जिससे सदियों तक उसका नाम इतिहास में याद रखा जाये। उसने अपने आदमियों से सलाह मशवरा किया कि ऐसा क्या किया जाये? कुछ लोगों ने सलाह दी कि जिस तरह चंगेजखाँ औ

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  • चित्रकूट का चातक - 10

     07.06.2017
    चित्रकूट का चातक - 10

    प्रस्थान

    जब महाराणा सांगा ने देखा कि बाबर ने देखते ही देखते दिल्ली और आगरा पर अधिकार कर लिया तो सांगा को भारत के भाग्य की चिंता हुई उसने भारत भूमि से म्लेच्छों को मार भगाने का संकल्प ले रखा था और वह कई वर्षों से इब्राहीम लोदी को उखाड़ फैंकने की तै

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