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  • मुगल काल में राजपूत रियासतों की स्थिति - 2

     12.07.2017
     मुगल काल में राजपूत रियासतों की स्थिति - 2

    1526 ई. में खुरासान से आये मुगल आक्रांता बाबर ने भारत पर आक्रमण किया। उस समय दिल्ली पर इब्राहीम लोदी का शासन था किंतु भारत में मेवाड़ तथा मारवाड़ प्रबल हिंदू राज्यों की श्रेणी में आते थे। मेवाड़ पर महाराणा राणा संग्रामसिंह का तथा मारवाड़ पर राव गांगा का शासन था। (आर.ए.एस. मुख्य परीक्ष

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  • मुगल काल में राजपूत रियासतों की स्थिति - 3

     15.07.2017
    मुगल काल में राजपूत रियासतों की स्थिति - 3

    किशनगढ़ रियासत का संस्थापक महाराजा कृष्णसिंह अथवा किशनसिंह जोधपुर के राठौड़ शासक उदयसिंह के 16 पुत्रों में से एक था। वह अपने भाई से महाराजा सूरसिंह से असंतुष्ट होकर अकबर के पास चला गया। किशनसिंह की बुआ जोधा बाई का विवाह अकबर से हुआ था। अकबर ने किशनसिंह को हिन्दुआन, सेठोलाव तथा कुछ अ

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  • मुगलकाल में राजपूत रियासतों की स्थिति- 4

     21.08.2017
    मुगलकाल में राजपूत रियासतों की स्थिति- 4

    मुगलकाल में राजपूत रियासतों की स्थिति- 4

    बीकानेर राज्य


    भारतवर्ष के बीकानेर, किशनगढ़, ईडर, विजयनगर, झाबुआ, अमझेरा, रतलाम, सीतामऊ तथा सैलाना राज्यों के शासक, जोधपुर के राठौड़ वंश में

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  • मुगल काल में राजपूत रियासतों की स्थिति - 5

     07.09.2018
    मुगल काल में राजपूत रियासतों की स्थिति - 5

    मुगल काल में राजपूत रियासतों की स्थिति - 5

    मारवाड़ राज्य

    मारवाड़ राज्य की स्थापना का कार्य बदायूं के राठौड़ों के वंशज सीहाजी द्वारा थार रेगिस्तान में आकर बसने के बाद आरम्भ हुई। सीहा की

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  • मुगलकाल में राजपूताने के छोटे राज्यों की स्थिति

     21.08.2017
    मुगलकाल में राजपूताने के छोटे राज्यों की स्थिति

    मुगलकाल में राजपूताने के छोटे राज्यों की स्थिति

    जैसलमेर

    जैसलमेर राज्य की स्थापना यदुवंशी भट्टियों ने की। ये लोग भटनेर से चलकर तन्नोट आये। आठवीं शताब्दी में इन्होंने तन्नोट का किला बनाया। तन

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  • किशनगढ़ की चित्रकला पर वल्लभ एवं निम्बार्क मतों का प्रभाव

     09.11.2017
    किशनगढ़ की चित्रकला पर वल्लभ एवं निम्बार्क मतों का प्रभाव

    किशनगढ़ की चित्रकला शैली विश्व भर में अपने अनूठेपन के लिये जानी जाती है। न केवल जनसमान्य में अपितु किशनगढ़ के राजवंश में भी चित्रकला के प्रति दृढ़ अनुराग रहा। यही कारण है कि जोधपुर एवं जयपुर जैसी बड़ी रियासतों के बीच में स्थित होते हुए भी किशनगढ़ जैसी अत्यंत छोटी रियासत में स्वतंत्र च

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  • गींदड़ नृत्य

     11.04.2018
    गींदड़ नृत्य

    गींदड़ नृत्य

    राजस्थान के शेखावाटी अंचल में वसंत पंचमी से ही ढफ बजने लगते हैं तथा धमालें गाई जाने लगती हैं। कुछ धमाल भक्ति प्रधान एवं कुछ धमाल शृंगार प्रधान होती हैं। जब होली में 15 दिन रह जाते हैं तो गांव-गांव गी

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  • घुड़ला नृत्य

     14.04.2018
    घुड़ला नृत्य

    घुड़ला नृत्य

    घुड़ला नृत्य मारवाड़ क्षेत्र में किया जाता है। यह सुहागिन स्त्रियों द्वारा किया जाने वाला सामूहिक नृत्य है। कई स्थानों पर कुंवारी कन्याएं भी इसमें भाग लेती हैं। यह नृत्य गणगौर पर्व के आसपास किया जाता है। इस अवसर पर माता गौरी अर्थात् पार्वतीजी एवं उनके ईश्वर शिवज

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  • राजस्थान का लोकप्रिय नृत्य - घूमर

     15.04.2018
    राजस्थान का लोकप्रिय नृत्य - घूमर

    घूमर नृत्य

    घूमर नृत्य समूचे राजस्थान का लोकप्रिय नृत्य है। इसे राजस्थान के लोकनृत्यों की रानी कहा जा सकता है। यह लोकनृत्य थार के रेगिस्तान से लेकर, डूंगरपुर-बांसवाड़ा के आदिवासी क्षेत्र, अलवर-भरतपुर के मेवात क्षेत्र, कोटा-बूंदी-झालावाड़ के हाड़ौती क्षेत्र एवं धौलपुर-करौली के

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  • पर्यावरण का प्रखर प्रहरी - बिश्नोई समाज

     24.05.2018
    पर्यावरण का प्रखर प्रहरी - बिश्नोई समाज

    उत्तर भारत के पंजाब, हरियाणा एवं राजस्थान आदि प्रांतों में बसने वाली बिश्नोई जाति ने पर्यावरण की सुरक्षा के लिए जो महत्वपूर्ण कार्य किया है, उसकी जितनी प्रशंसा की जाए, कम है। पंद्रहवीं शताब्दी ईस्वी में जब भारत पर दिल्ली सल्तनत के तुर्की शासकों का शासन था और चारों ओर हिंसा का वाता

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