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  • राजस्थान का पहला इतिहासकार कर्नल जेम्स टॉड (2)

     07.06.2017
    राजस्थान का पहला इतिहासकार कर्नल जेम्स टॉड (2)

    मार्च 1919 में अंग्रेजी सेना भी सालिमसिंह से आ मिली। इन दोनों सेनाओं ने मिलकर मेरों के मुख्य स्थान बोरवा, झाक और लुलुवा पर अधिकार कर लिया तथा अपने थाने बैठा दिये। इस पर मेरों ने जोधपुर राज्य की तरफ से अंग्रेजी थानों पर हमले करने आरंभ कर दिये। नवम्बर 1819 में टॉड जोधपुर आया तथा उधर से भी थानों का प्रबंध करवा दिया।

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  • राजस्थान में इतिहास के प्रमुख स्रोत

     21.08.2017
    राजस्थान में इतिहास के प्रमुख स्रोत

    शिलालेख


    राजस्थान में प्राचीन दुर्गों, मंदिरों, सरोवरों, बावड़ियों एवं महत्वपूर्ण भवनों की दीवारों, देव प्रतिमाओं, लाटों एवं विजय स्तंभों आदि पर राजाओं, दानवीरों, सेठों और विजेता योद्धाओं द्वारा समय-समय प

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  • राजस्थान की प्राचीन सभ्यताएं

     07.09.2018
     राजस्थान की प्राचीन सभ्यताएं

    प्रागैतिहासिक पृष्ठभूमि

    राजस्थान अपनी जटिल भू-जैविकीय संरचना के लिये जाना जाता है। इस सम्पूर्ण प्रदेश को अरावली पर्वत माला दो भिन्न भागों में बांटती है। इस पर्वतमाला के पूर्व का भाग हरा-भरा क्षेत्र है तो पश्चिमी भाग बलु

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  • राजस्थान का प्राचीन इतिहास

     21.08.2017
     राजस्थान का प्राचीन इतिहास

    जनपदकाल

    ईसा से एक हजार वर्ष पूर्व से लेकर ईसा के तीन सौ वर्ष पूर्व तक का समय जनपद काल कहलाता है। यहाँ से इतिहास की आधारभूत सामग्री, सिक्के, आभूषण अभिलेख आदि मिलने लगते हैं। सिकंदर के आक्रमण के काल में और उसके बाद गुप्तों तक राजस्थान में अ

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  • भारत में राजपूत शासक वंशों का उदय

     07.09.2018
    भारत में राजपूत शासक वंशों का उदय

    भारत में राजपूत शासक वंशों का उदय


    पुष्यभूति राजा हर्षवर्द्धन की मृत्यु के उपरान्त भारत की राजनीतिक एकता पुनः भंग हो गई और देश के विभिन्न भागों में छोटे-छोटे राज्यों की स्थापना हुई। इन राज्यों के शासक रा

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  • राजस्थान में गुहिलों एवं प्रतिहारों का उदय एवं विस्तार

     06.06.2017
    राजस्थान में गुहिलों एवं प्रतिहारों का उदय एवं विस्तार

    राजस्थान पर प्राचीन काल से विभिन्न क्षत्रिय वंशों के राजा शासन करते आ रहे थे। हर्षवर्द्धन की मृत्यु के बाद क्षत्रिय राजा नेपथ्य में चले जाते हैं तथा उनके स्थान पर राजपूत राजाओं के राज्य अस्तित्व में आने लगते हैं।


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  • राजस्थान में चौहान, परमार, कच्छवाहा एवं अन्य राजपूत वंशों का उदय

     06.06.2017
    राजस्थान में चौहान, परमार, कच्छवाहा एवं अन्य राजपूत वंशों का उदय

    चौहान

    कवि चंद बरदाई द्वारा लिखित पृथ्वीराज रासो के अनुसार एक बार ऋषियों ने आबू पर्वत पर यज्ञ करना आरंभ किया तो राक्षसों ने मल-मूत्र तथा हड्डियां आदि अपवित्र वस्तुएं डालकर यज्ञ को भ्रष्ट करने की चेष्टा की। वसिष्ठ ऋषि ने यज्ञ की रक्षा के लिये मं

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  • राजस्थान में राठौड़ वंश का उदय

     06.06.2017
    राजस्थान में राठौड़ वंश का उदय

    राजस्थान में राठौड़ वंश का उदय

    राठौड़ों को संस्कृत में राष्ट्रकूट कहा जाता है, जिसका प्राकृत रूप रट्टउड है। अशोक के शिलालेखों में रिस्टिक, लटिक तथा रटिक शब्दों का प्रयोग किया गया है जो राष्ट्रकूट से मिलते जुलते

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  • वैदिक युग से राजपूत युग तक राजस्थान में सामाजिक व्यवस्था

     06.06.2017
    वैदिक युग से राजपूत युग तक राजस्थान में सामाजिक व्यवस्था

    वर्ण व्यवस्था

    ऋग्वैदिक काल में भारतीय समाज में दो वर्ण थे। पहला वर्ण गौर वर्ण के लोगों का था जो आर्य कहलाते थे। दूसरा वर्ग कृष्ण वर्ण के लोगों का था जो अनार्य कहलाते थे। ऋग्वेद में ब्राह्मण और क्षत्रिय शब्दों का प्रयोग तो बार-बार हुआ है क

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  • मुगल काल में राजपूत रियासतों की स्थिति - 1

     06.07.2017
     मुगल काल में राजपूत रियासतों की स्थिति - 1

    आम्बेर राज्य

    आम्बेर राज्य की स्थापना नरवर के कच्छवाहा राजकुमार धौलाराय अथवा दूल्हाराय के वंशजों ने की। ढोला-मारू की कथा का नायक भी यही दूल्हाराय है। (आर.ए.एस. मुख्य परीक्षा 2012, अधिकतम 15 शब्दों में उत्तर दीज

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