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  • राजस्थान में इतिहास के प्रमुख स्रोत

     06.06.2017
    राजस्थान में इतिहास के प्रमुख स्रोत

    शिलालेख


    राजस्थान में प्राचीन दुर्गों, मंदिरों, सरोवरों, बावड़ियों एवं महत्वपूर्ण भवनों की दीवारों, देव प्रतिमाओं, लाटों एवं विजय स्तंभों आदि पर राजाओं, दानवीरों, सेठों और विजेता योद्धाओं द्वारा समय-समय प

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  • राजस्थान की प्राचीन सभ्यताएं

     06.06.2017
     राजस्थान की प्राचीन सभ्यताएं

    प्रागैतिहासिक पृष्ठभूमि

    राजस्थान अपनी जटिल भू-जैविकीय संरचना के लिये जाना जाता है। इस सम्पूर्ण प्रदेश को अरावली पर्वत माला दो भिन्न भागों में बांटती है। इस पर्वतमाला के पूर्व का भाग हरा-भरा क्षेत्र है तो पश्चिमी भाग बलु

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  • राजस्थान का प्राचीन इतिहास

     06.06.2017
     राजस्थान का प्राचीन इतिहास

    जनपदकाल

    ईसा से एक हजार वर्ष पूर्व से लेकर ईसा के तीन सौ वर्ष पूर्व तक का समय जनपद काल कहलाता है। यहाँ से इतिहास की आधारभूत सामग्री, सिक्के, आभूषण अभिलेख आदि मिलने लगते हैं। सिकंदर के आक्रमण के काल में और उसके बाद गुप्तों तक राजस्थान में अ

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  • भारत में राजपूत शासक वंशों का उदय

     06.06.2017
    भारत में राजपूत शासक वंशों का उदय

    भारत में राजपूत शासक वंशों का उदय


    पुष्यभूति राजा हर्षवर्द्धन की मृत्यु के उपरान्त भारत की राजनीतिक एकता पुनः भंग हो गई और देश के विभिन्न भागों में छोटे-छोटे राज्यों की स्थापना हुई। इन राज्यों के शासक रा

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  • मुगलकाल में राजपूत रियासतों की स्थिति- 4

     06.06.2017
    मुगलकाल में राजपूत रियासतों की स्थिति- 4

    मुगलकाल में राजपूत रियासतों की स्थिति- 4

    बीकानेर राज्य


    भारतवर्ष के बीकानेर, किशनगढ़, ईडर, विजयनगर, झाबुआ, अमझेरा, रतलाम, सीतामऊ तथा सैलाना राज्यों के शासक, जोधपुर के राठौड़ वंश में

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  • मुगल काल में राजपूत रियासतों की स्थिति - 5

     06.06.2017
    मुगल काल में राजपूत रियासतों की स्थिति - 5

    मुगल काल में राजपूत रियासतों की स्थिति - 5

    मारवाड़ राज्य

    मारवाड़ राज्य की स्थापना का कार्य बदायूं के राठौड़ों के वंशज सीहाजी द्वारा थार रेगिस्तान में आकर बसने के बाद आरम्भ हुई। सीहा की

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  • पानी की कहानी : भारतीय पुराणों की जुबानी

     06.06.2017
    पानी की कहानी : भारतीय पुराणों की जुबानी

    सौर मण्डल के जिस ग्रह पर हम रहते हैं उसे पृथ्वी कहना भ्रामक सा लगता है। धरती का 70.8 प्रतिशत धरातल जल से ढका हुआ है तथा पूरे सौर मण्डल में यही एक मात्र ऐसा ग्रह है जिसका विशिष्ट लक्षण जल का इतनी अधिक मात्रा में होना है। इसलिये इसे जलग्रह कहना अधिक तर्क संगत प्रतीत होता है। चूंकि जल के अतिरिक्त अन्य

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  • मारवाड़ में स्त्री रक्षा के लिये प्राणोत्सर्ग की घटनाएं

     06.06.2017
     मारवाड़ में स्त्री रक्षा के लिये प्राणोत्सर्ग की घटनाएं

    राजस्थान के वीरों ने स्त्रियों की रक्षा के लिये अपने प्राण गंवाने में कभी संकोच नहीं किया। इस सम्बन्ध में मारवाड़ में अनेक प्रसिद्ध घटनायें हुईं। इतिहास इन घटनाओं से भरा पड़ा है। कुछ उदाहरण अपने पाठकों के लिये प्रस्तुत हैं-

    महेवे की कन्याओं के लिये राव जगमाल का पराक्रम

    ई.1

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  • रणथंभौर की रानियां

     06.06.2017
    रणथंभौर की रानियां

    रणथम्भौर के बाघ राजस्थान में प्रथम बाघ परियोजना सवाईमाधोपुर जिले के रणथम्भौर क्षेत्र में वर्ष 1973 में हुई थी। बाघ इससे पहले भी अनादि काल से इस क्षेत्र में रहते आये हैं। जब दुनिया से बाघ समाप्त होने लगे तो विश्व भर के पर्यटक बाघों को देखने के लिये भारत आने लगे। भारत में बाघों को मुख्य रूप से पूर्वी भारत के सु

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  • राजस्थान की पर्यावरणीय संस्कृति

     06.06.2017
    राजस्थान की पर्यावरणीय संस्कृति

    राजस्थान की पर्यावरणीय संस्कृति पर्यावरणीय संस्कृति से आशय एक ऐसी सरल जीवन शैली से है जो मानव जीवन को सुखद एवं आराम दायक बनाती है तथा पर्यावरण को भी नष्ट नहीं होने देती। राजस्थान में विगत हजारों वर्षों से निवास कर रही मानव जाति द्वारा स्थापित परम्पराएं, सिद्धांत एवं व्यवहार में लाई जाने वाली ऐसी अनगिनत

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