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  • पश्चिमी राजस्थान में आयुर्वेद तथा पुरातत्व को पर्यटन का प्रमुख आधार बनाया जाये

     07.06.2017
    पश्चिमी राजस्थान में आयुर्वेद तथा पुरातत्व को पर्यटन का प्रमुख आधार बनाया जाये

    वर्तमान में पश्चिमी राजस्थान में रियासती इतिहास पर्यटन का प्रमुख आधार बना हुआ है जिसके चलते राजस्थान में आने वाले पर्यटकों को रियासत कालीन महलों, दुर्गों, हवेलियों तथा अन्य राजकीय भवनों की सैर करवाई जाती है। राजस्थान में आने वाले पर्यटकों को प्राचीन किलों तथा राजसी प्रासादों के साथ-साथ रेतीले धोरों, सं

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  • अंग्रेज देते थे राजाओं को तोपों की सलामी

     07.06.2017
    अंग्रेज देते थे राजाओं को तोपों की सलामी

    मुगलों के आगमन से पूर्व राजपूताना में 11 राज्य थे- मेवाड़, मारवाड़, आम्बेर, बीकानेर, जैसलमेर, सिरोही, अजमेर, बूंदी, बांसवाड़ा, डूंगरपुर एवं करौली। मुगलों के काल में राजपूताना में 7 नये राज्य अस्तित्व में आये- कोटा, अलवर, भरतपुर, धौलपुर, किशनगढ़, प्रतापगढ़ तथा शाहपुरा जबकि एक राज्य- अजमेर समाप्त हो गया। इस प्रकार

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  • राजस्थान की लोक संगीत परम्परा एवं प्रमुख लोक गीत

     07.06.2017
    राजस्थान की लोक संगीत परम्परा एवं प्रमुख लोक गीत

    बिना राजस्थान आये यदि कोई व्यक्ति राजस्थान को समझना चाहता है तो वह यहाँ का लोक संगीत सुन ले। सम्पूर्ण राजस्थान सुरीली स्वर लहरियों में विरल होकर यहाँ के लोक संगीत में समाया हुआ है। लोक संगीत की यह धारा दो रूपों में प्रवाहित हुई है। एक तो जन साधारण द्वारा सामाजिक उत्सवों, जन्म, विवाह, स्वागत, विदाई, संस्कार,

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  • राजस्थान का पहला इतिहासकार कर्नल जेम्स टॉड (भाग - 1)

     07.06.2017
    राजस्थान का पहला इतिहासकार कर्नल जेम्स टॉड (भाग - 1)

    कर्नल टॉड का जन्म 20 मार्च 1782 को इंगलैण्ड के इंग्लिस्टन नामक स्थान पर हुआ था। उसके किसी पूर्वज ने स्कॉटलैण्ड के राजा रॉबर्ट दी ब्रूस के बच्चों को इंगलैण्ड के राजा की कैद से छुड़ाया था इस कारण टॉड परिवार को नाइटबैरोनेट की उपाधि तथ लोमड़ी का चिह्न धारण करने का अधिकार मिला हुआ था। जब जेम्स टॉड 17 वर्ष का हुआ तो ई. 1799 म

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  • राजस्थान का पहला इतिहासकार कर्नल जेम्स टॉड (2)

     07.06.2017
    राजस्थान का पहला इतिहासकार कर्नल जेम्स टॉड (2)

    मार्च 1919 में अंग्रेजी सेना भी सालिमसिंह से आ मिली। इन दोनों सेनाओं ने मिलकर मेरों के मुख्य स्थान बोरवा, झाक और लुलुवा पर अधिकार कर लिया तथा अपने थाने बैठा दिये। इस पर मेरों ने जोधपुर राज्य की तरफ से अंग्रेजी थानों पर हमले करने आरंभ कर दिये। नवम्बर 1819 में टॉड जोधपुर आया तथा उधर से भी थानों का प्रबंध करवा दिया।

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  • मुगलकाल में राजपूत रियासतों की स्थिति- 4

     21.08.2017
    मुगलकाल में राजपूत रियासतों की स्थिति- 4

    मुगलकाल में राजपूत रियासतों की स्थिति- 4

    बीकानेर राज्य


    भारतवर्ष के बीकानेर, किशनगढ़, ईडर, विजयनगर, झाबुआ, अमझेरा, रतलाम, सीतामऊ तथा सैलाना राज्यों के शासक, जोधपुर के राठौड़ वंश में

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  • मुगल काल में राजपूत रियासतों की स्थिति - 5

     21.08.2017
    मुगल काल में राजपूत रियासतों की स्थिति - 5

    मुगल काल में राजपूत रियासतों की स्थिति - 5

    मारवाड़ राज्य

    मारवाड़ राज्य की स्थापना का कार्य बदायूं के राठौड़ों के वंशज सीहाजी द्वारा थार रेगिस्तान में आकर बसने के बाद आरम्भ हुई। सीहा की

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  • पानी की कहानी : भारतीय पुराणों की जुबानी

     06.06.2017
    पानी की कहानी : भारतीय पुराणों की जुबानी

    सौर मण्डल के जिस ग्रह पर हम रहते हैं उसे पृथ्वी कहना भ्रामक सा लगता है। धरती का 70.8 प्रतिशत धरातल जल से ढका हुआ है तथा पूरे सौर मण्डल में यही एक मात्र ऐसा ग्रह है जिसका विशिष्ट लक्षण जल का इतनी अधिक मात्रा में होना है। इसलिये इसे जलग्रह कहना अधिक तर्क संगत प्रतीत होता है। चूंकि जल के अतिरिक्त अन्य

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  • मारवाड़ में स्त्री रक्षा के लिये प्राणोत्सर्ग की घटनाएं

     06.06.2017
     मारवाड़ में स्त्री रक्षा के लिये प्राणोत्सर्ग की घटनाएं

    राजस्थान के वीरों ने स्त्रियों की रक्षा के लिये अपने प्राण गंवाने में कभी संकोच नहीं किया। इस सम्बन्ध में मारवाड़ में अनेक प्रसिद्ध घटनायें हुईं। इतिहास इन घटनाओं से भरा पड़ा है। कुछ उदाहरण अपने पाठकों के लिये प्रस्तुत हैं-

    महेवे की कन्याओं के लिये राव जगमाल का पराक्रम

    ई.1

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  • रणथंभौर की रानियां

     06.06.2017
    रणथंभौर की रानियां

    रणथम्भौर के बाघ राजस्थान में प्रथम बाघ परियोजना सवाईमाधोपुर जिले के रणथम्भौर क्षेत्र में वर्ष 1973 में हुई थी। बाघ इससे पहले भी अनादि काल से इस क्षेत्र में रहते आये हैं। जब दुनिया से बाघ समाप्त होने लगे तो विश्व भर के पर्यटक बाघों को देखने के लिये भारत आने लगे। भारत में बाघों को मुख्य रूप से पूर्वी भारत के सु

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