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  • मुगलकाल में राजपूताने के छोटे राज्यों की स्थिति

     21.08.2017
    मुगलकाल में राजपूताने के छोटे राज्यों की स्थिति

    मुगलकाल में राजपूताने के छोटे राज्यों की स्थिति

    जैसलमेर

    जैसलमेर राज्य की स्थापना यदुवंशी भट्टियों ने की। ये लोग भटनेर से चलकर तन्नोट आये। आठवीं शताब्दी में इन्होंने तन्नोट का किला बनाया। तन

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  • किशनगढ़ की चित्रकला पर वल्लभ एवं निम्बार्क मतों का प्रभाव

     09.11.2017
    किशनगढ़ की चित्रकला पर वल्लभ एवं निम्बार्क मतों का प्रभाव

    किशनगढ़ की चित्रकला शैली विश्व भर में अपने अनूठेपन के लिये जानी जाती है। न केवल जनसमान्य में अपितु किशनगढ़ के राजवंश में भी चित्रकला के प्रति दृढ़ अनुराग रहा। यही कारण है कि जोधपुर एवं जयपुर जैसी बड़ी रियासतों के बीच में स्थित होते हुए भी किशनगढ़ जैसी अत्यंत छोटी रियासत में स्वतंत्र च

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  • पानी की कहानी : भारतीय पुराणों की जुबानी

     06.06.2017
    पानी की कहानी : भारतीय पुराणों की जुबानी

    सौर मण्डल के जिस ग्रह पर हम रहते हैं उसे पृथ्वी कहना भ्रामक सा लगता है। धरती का 70.8 प्रतिशत धरातल जल से ढका हुआ है तथा पूरे सौर मण्डल में यही एक मात्र ऐसा ग्रह है जिसका विशिष्ट लक्षण जल का इतनी अधिक मात्रा में होना है। इसलिये इसे जलग्रह कहना अधिक तर्क संगत प्रतीत होता है। चूंकि जल के अतिरिक्त अन्य

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  • मारवाड़ में स्त्री रक्षा के लिये प्राणोत्सर्ग की घटनाएं

     06.06.2017
     मारवाड़ में स्त्री रक्षा के लिये प्राणोत्सर्ग की घटनाएं

    राजस्थान के वीरों ने स्त्रियों की रक्षा के लिये अपने प्राण गंवाने में कभी संकोच नहीं किया। इस सम्बन्ध में मारवाड़ में अनेक प्रसिद्ध घटनायें हुईं। इतिहास इन घटनाओं से भरा पड़ा है। कुछ उदाहरण अपने पाठकों के लिये प्रस्तुत हैं-

    महेवे की कन्याओं के लिये राव जगमाल का पराक्रम

    ई.1

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  • रणथंभौर की रानियां

     06.06.2017
    रणथंभौर की रानियां

    रणथम्भौर के बाघ राजस्थान में प्रथम बाघ परियोजना सवाईमाधोपुर जिले के रणथम्भौर क्षेत्र में वर्ष 1973 में हुई थी। बाघ इससे पहले भी अनादि काल से इस क्षेत्र में रहते आये हैं। जब दुनिया से बाघ समाप्त होने लगे तो विश्व भर के पर्यटक बाघों को देखने के लिये भारत आने लगे। भारत में बाघों को मुख्य रूप से पूर्वी भारत के सु

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  • राजस्थान की पर्यावरणीय संस्कृति

     06.06.2017
    राजस्थान की पर्यावरणीय संस्कृति

    राजस्थान की पर्यावरणीय संस्कृति पर्यावरणीय संस्कृति से आशय एक ऐसी सरल जीवन शैली से है जो मानव जीवन को सुखद एवं आराम दायक बनाती है तथा पर्यावरण को भी नष्ट नहीं होने देती। राजस्थान में विगत हजारों वर्षों से निवास कर रही मानव जाति द्वारा स्थापित परम्पराएं, सिद्धांत एवं व्यवहार में लाई जाने वाली ऐसी अनगिनत

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  • HISTORY OF RAILWAY IN RAJASTHAN

     06.06.2017
    HISTORY  OF  RAILWAY  IN  RAJASTHAN

    The first full scale working railway steam locomotive was built in the United Kingdom in 1804 by Richard Trevithick. World's first railway journey took place On 21st February 1804, as Trevithick's unnamed Steam locomotive hauled a train along the Rail transport of the Penydarren iron works, near Merthyr Tydfil in South Wales. In 1814 George Stephenson, inspired by the early locomotives of Trevithick and others, built the Blucher locomotive, one of the first successful Flange-wheel adhesion locomotives.

    Stephenson played a pivotal role in the development and widespread adoption of the steam locomotive. It was not until 1825 that the success of the Stockton and Darlington Railway proved that the railways could be made as useful to the general shipping public as to the colliery

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  • कठिनाइयों से भरा हुआ था राजस्थान का प्रशासनिक एकीकरण

     06.06.2017
    कठिनाइयों से भरा हुआ था राजस्थान का प्रशासनिक एकीकरण

     राजस्थान का राजनीतिक एकीकरण, जटिल एवं दीर्घकालीन प्रक्रिया थी जिसके कारण राजस्थान का वातावरण हलचलों से भरा हुआ तथा उत्तेजनापूर्ण बना हुआ था किंतु राजस्थान का प्रशासनिक एकीकरण उससे भी अधिक जटिल एवं कठिन था जिसके लिए असीम धैर्य और कठोर परिश्रम की आवश्यकता थी।

    लोकप्रिय सरकार का ग

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  • राजस्थान में इतिहास के प्रमुख स्रोत

     21.08.2017
    राजस्थान में इतिहास के प्रमुख स्रोत

    शिलालेख


    राजस्थान में प्राचीन दुर्गों, मंदिरों, सरोवरों, बावड़ियों एवं महत्वपूर्ण भवनों की दीवारों, देव प्रतिमाओं, लाटों एवं विजय स्तंभों आदि पर राजाओं, दानवीरों, सेठों और विजेता योद्धाओं द्वारा समय-समय प

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  • राजस्थान की प्राचीन सभ्यताएं

     21.08.2017
     राजस्थान की प्राचीन सभ्यताएं

    प्रागैतिहासिक पृष्ठभूमि

    राजस्थान अपनी जटिल भू-जैविकीय संरचना के लिये जाना जाता है। इस सम्पूर्ण प्रदेश को अरावली पर्वत माला दो भिन्न भागों में बांटती है। इस पर्वतमाला के पूर्व का भाग हरा-भरा क्षेत्र है तो पश्चिमी भाग बलु

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