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  • भारत भर में अकेला है मण्डोर का एक थम्बा महल

     01.09.2019
    भारत भर में अकेला है मण्डोर का एक थम्बा महल

    मारवाड़ नरेश अजीतसिंह ने औरंगजेब के मरते ही जोधपुर पर अधिकार दुर्ग पर कर लिया था तथा ई.1707 से ई.1724 तक मारवाड़ राज्य पर शासन किया था जिसे जोधपुर राज्य के नाम से भी जाना जाता था।

    महाराजा अजीतसिंह ने जोधपुर राज्य में अनेक मंदिर तथा महल बनवाए थे। उन्होंने ही जोधपुर नगर से बाहर स्थित मण्डोर उद्यान में एक थम्बा महल का निर्माण करवाया था। यह अपने आपमें एक अद्भुत रचना है। इस प्रकार का दूसरा महल भारत में कहीं अन्यत्र देखने को नहीं मिलता।

    अष्ट कोणीय खम्भे के आकार में बने इस महल के चारों तरफ बड़े-बड़े पत्थरों को तराश कर जालियों का रूप दिया गया है। इन जालियों के ऊपरी कोनों पर विभिन्न प्रकार के फूलों का अंकन किया गया है।

    जोधपुर में लाल घाटू पत्थर एवं गुलाबी छीतर पत्थर नामक दो तरह के पत्थर पाए जाते हैं। ये दोनों ही पत्थर बहुत मुलायम हैं, इस कारण भवन निर्माण की दृष्टि से अत्यंत उपयोगी हैं। इन्हें काटकर तथा तराशकर मनचाहा आकार दिया जा सकता है। जोधपुर के समस्त प्राचीन एवं मध्यकालीन भवन इन्हीं दोनों पत्थरों से बने हुए हैं।

    एक थम्बा महल में लाल घाटू पत्थर का उपयोग किया गया है जिस पर कुराई आसानी होती है। पत्थरों को तराश कर इस प्रकार जोड़ा गया है कि जोड़ आसानी से दिखाई नहीं देते। दूर से लगता है मानो एक ही बड़े पत्थर को तराश कर इस महल का निर्माण किया गया हो।

    इस भवन के चारों ओर बंगाली काट के सदृश्य पत्थर से निर्मित छज्जे लगाए गए हैं। यह महल तीन मंजिला है। ऊपरी दो मंजिलों में चारों तरफ झरोखों का निर्माण करवाया गया है।

    इस महल का निर्माण जनाना महल के ठीक निकट करवाया गया था ताकि गर्मियों के मौसम में रानियां एक थम्बा महल में आकर ठण्डी हवा के झौंकों का आनंद ले सकें। आज भी यह महल देखने वालों का मन मोह लेता है।

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